मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर आपदा पीड़ित
Uttarkashi News in Hindi

मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर आपदा पीड़ित
साल 2013 को केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा में जहां हजारों लोगों की भेंट चढ़ गई, वहीं कई लोगों पर आपदा की मार ऐसी पड़ी की वो घर से बेघर हो गए. उन्हें अपनी रोजी-रोटी से भी हाथ धोना पड़ा.

साल 2013 को केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा में जहां हजारों लोगों की भेंट चढ़ गई, वहीं कई लोगों पर आपदा की मार ऐसी पड़ी की वो घर से बेघर हो गए. उन्हें अपनी रोजी-रोटी से भी हाथ धोना पड़ा.

  • Share this:
साल 2013 को केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा में जहां हजारों लोगों की भेंट चढ़ गई, वहीं कई लोगों पर आपदा की मार ऐसी पड़ी की वो घर से बेघर हो गए. उन्हें अपनी रोजी-रोटी से भी हाथ धोना पड़ा.

टिहरी जिले के पांगर गांव निवासी रविन्द्र प्रसाद उनियाल आठवीं गढ़वाल रायफल जम्मू-कश्मीर में तैनात थे और 2002 में रिटायर होकर अपने घर लौट आए. परिवार के भरण-पोषण के लिए रविंद्र ने बिजनेस करने की ठानी और अपनी जमा पूंजी और रिटायरमेंट के समय मिले पैसे से साल 2009 में रामबाड़ा में होटल किराए पर लिया.

साल 2013-14 के लिए उन्होंने यात्राकाल में गढ़वाल मंडल विकास निगम की कैंटीन 3,20,000 रुपए में एक साल के लिए किराए पर ली. साल 2013 में 16-17 जून को केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा की मार ने सब कुछ खत्म कर दिया और रविंद्र ने अपने छह कर्मचारियों की जान बचाते हुए जंगलों में शरण ली.



हालात सामान्य होने के बाद वो किसी तरह घर पहुंचे और अब मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों को मुआवजे सहित कई तरह की राहत देने की घोषणाएं की गई और प्रभावितों को चैक भी बांटे गए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते रविंद्र का नाम आपदा प्रभावितों की सूची में नहीं चढ़ पाया.
व्यापार संघ द्वारा भी प्रशासन को सौंपी सूची से रविंद्र का नाम गायब रहा. करीब 14 लाख रुपए की हानि के कारण आज रविंद्र कर्ज में डूब चुका है और अब देनदारी के चलते आत्महत्या करने की बात कह रहा है. भले ही प्रकृति द्वारा बरपे कहर ने केदारनाथ में सैकड़ों लोगों की जिन्दगियां तबाह कर दी और उनसे उनकी रोजी-रोटी छीन ली. लेकिन प्रभावितों के जख्म भरने के लिए राज्य सरकार ने मुआवजा तो दिया, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते आजतक कई प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिल सका जिस कारण वो दर-दर भटकने को मजबूर हैं.

आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज