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ऐसा दमकल विभाग जिसके पास पानी का टैंक तक नहीं है

बडकोट में फायर ब्रिगेड की हालत खस्ता है. गाड़ियां धूल फांक रही हैं और पानी के लिए टैंक नहीं है. यहां दस्ते के पास गैराज नहीं है इसलिए सारी गाड़ियां सड़क पर पार्क रहती हैं. दस्ते के पास अपना स्थायी टैंक नहीं है इसलिए कर्मचारी गदेरों से पानी लेकर गाड़ी में भरते हैं.

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    बडकोट में पुलिस फायर सर्विस स्टेशन की हालत खस्ता है. गाड़ियां धूल फांक रही हैं और पानी के लिए टैंक नहीं है. यहां दस्ते के पास गैराज नहीं है इसलिए सारी गाड़ियां सड़क पर पार्क रहती हैं. दस्ते के पास अपना स्थायी टैंक नहीं है इसलिए कर्मचारी गदेरों से पानी लेकर गाड़ी में भरते हैं.
    सर्दियों में पहाड़ी इलाकों में सूखी घास में अक्सर आग लग जाती है. ऐसे में अग्निशमन दस्ता लोगों की कैसे मदद कर पाता है ये उससे बेहतर कोई नहीं समझ सकता. आठ साल से सिंचाई विभाग के जर्जर भवनों और बैरक में फायर सर्विस का दफ़्तर चल रहा है. इस दफ़्तर में गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं है. इसलिए दमकल की सारी गाड़ियां नेशनल हाईवे पर पार्क कर दी जाती हैं. गाड़ियां खुले में खड़ी होने के कारण धूल फांक रही हैं. गाड़ियां खड़े-खड़े ही ख़राब हो रही हैं. है
    सबसे बड़ा मज़ाक तो ये है कि दमकल विभाग के पास अपना खुद का पानी का टैंक नहीं है. दस्ते में शामिल गाड़ियां 3 से लेकर 30 किमी दूर तक जाकर नालों और गदेरों से पानी भरती हैं.
    पुलिस फायर सर्विस बडकोट से करीब 75 किमी के दायरे तक यानी बडकोट और पुरोला थाने के अलवा मोरी थाना क्षेत्र तक अपनी सेवा देती है. ज़िले में कुल दो फायर स्टेशन हैं. इनमें से एक उत्तरकाशी में तो इमारत बनकर तैयार है. लेकिन बडकोट में भवन के लिए अभी तक जगह ही नहीं मिली है.  (यमुनाघाटी से नितिन चौहान की रिपोर्ट)

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