कस्तूरबा गांधी आवासीय स्‍कूलों में जमीन पर सो रहीं लड़कियां
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कस्तूरबा गांधी आवासीय स्‍कूलों में जमीन पर सो रहीं लड़कियां

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आवासीय विद्यालय के माध्यम से शिक्षा दिए जाने के लिए खोले गए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बच्चे अमानवीय परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर हैं.

नौगांव ब्लॉक के गंगनानी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की अव्यवस्थाओं को देखकर आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं. आर्थिक तंगी के चलते कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं.

यहां 72 छात्राओं के लिए महज 21 बेड हैं. तीन छात्राओं के लिए एक बेड है. बताया जाता है कईं छात्राएं तो कड़ाके की इस ठंड में भी जमीन पर सोने को मजबूर हैं. कड़ाके की इस ठंड में पानी गरम करने के लिए बच्चों को जंगल से लकड़ी बीनकर लानी पड़ती है.



बाताया तो यहां तक जा रहा है कि यहां बच्चों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल पा रहा है. पर्याप्त मात्रा में पोषण तो दूर की बात है. दूध की जगह आधा कप पानी मिला दूध मिलता है. कुछ यही हाल कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय चिन्यालीसौड का भी है.
जिन अधिकारियों के जिम्मे ये नौनिहाल हैं, वे उतने ही बड़े लापरवाह साबित हो रहे हैं. यहां बच्चों की दयनीय हालत पर बार-बार पूछने के बावजूद जिम्मेदार अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं.

 

 

 
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