जानिए क्यों, यहां के बच्चे सात साल से पांचवीं कक्षा से आगे पढ़ नहीं पाते हैं

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक गांव के बच्चे पांचवीं कक्षा से आगे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: July 22, 2019, 8:39 AM IST
जानिए क्यों, यहां के बच्चे सात साल से पांचवीं कक्षा से आगे पढ़ नहीं पाते हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर: उत्तरकाशी जिले के सटुड़ी गांव के बच्चे पुल बह जाने के चलते पांचवीं से आगे नहीं पढ़ पाते हैं.
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Updated: July 22, 2019, 8:39 AM IST
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक गांव के बच्चे पांचवीं कक्षा से आगे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं. ऐसा इसलिए नहीं है कि बच्चे आगे पढ़ना नहीं चाहते हैं. दरअसल उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सटुड़ी गांव में पुल नहीं होने के चलते यहां के नौनिहाल शिक्षा से वंचित रह जाते हैं. यह आलम उत्तराखंड में वर्ष 2012 में आई आपदा आने के बाद से ही बना हुआ है. वर्ष 2012 में आई बाढ़ अपने साथ सटुड़ी गांव का पुल ही बहा ले गई. गांव में एक स्कूल है जिसमें यहां के बच्चे पांचवीं तक पढ़ाई पूरी कर लेते हैं, लेकिन इससे आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें गांव से बाहर दूसरे स्कूल जाना पड़ेगा. यहां से गुजर रही सुपिन नदी में सालभर खूब पानी रहता है, ऐसे में बच्चे नदी पार कर कैसे पढ़ाई के लिए जाएं.

बीमार व गर्भवती महिलाओं को भी उठानी पड़ती है परेशानी

सटुड़ी गांव-satudi village
प्रतीकात्मक तस्वीर: वर्ष 2012 में आई बाढ़ अपने साथ सटुड़ी गांव का पुल ही बहा ले गई.


यहां नदी पर पुल के निर्माण नहीं होने से ना सिर्फ बच्चे परेशान हैं बल्कि इससे बीमार व विशेषकर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य उपचार के लिए गांव से बाहर जाने में भी भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है. गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है तो उसे भी इलाज करवाने के लिए बाहर जाने में काफी मुश्किल पेश आती है.

सुपिन नदी पर बना पुल बह जाने से पैदा हुआ है ये संकट

यह मामला उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 185 किमी. दूर सड़क मार्ग और करीब छह किमी. की पैदल दूरी पर स्थित मोरी ब्लॉक के सटुड़ी गांव का है. यहां मानसून में सुपिन नदी पूरे आवेग के साथ बहती है. ऐसे में गांव से निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं होने के चलते लोग अपने गांव में ही कैद होने को मजबूर होते हैं.

ग्रामीणों ने तैयारी की थी कच्ची पुलिया, वह भी जर्जर
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गांव से बाहर निकलने के लिए सुपिन नदी पर बना पुल वर्ष 2013 की आपदा की भेंट चढ़ गया था. करीब छह—सात बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन ने इस गांव के लोगों की समस्याओं की सुध लेने की कोशिश तक नहीं की. जिला प्रशासन ने ट्राली का निर्माण करना तक उचित नहीं समझा. ग्रामीणों ने पुल बहने के बाद गांव तक पहुंचने के लिए लकड़ी की बलियों का कच्ची पुलिया तैयार की थी, जो वर्तमान समय में पूरी तरह जर्जर हो गया है.

जरूरी सामान के लिए चुकानी पड़ती है दोगुनी कीमत

इस गांव में 45 परिवार के 300 लोग रहते हैं. पुल नहीं होने के कारण गांव में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को लाने जाने में भी परेशानी उठानी पड़ती है. मजबूरी में गांव के लोगों को आवश्यकता की वस्तुओं के लिए दोगुनी कीमत देनी पड़ती है.

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First published: July 22, 2019, 8:37 AM IST
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