निकाय चुनाव: बागियों के कारण भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों का गड़बड़ाया गणित

उत्तरकाशी - बागियों के कारण भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना हुआ मुश्किल.

नगर पालिका बाड़ाहाट में अध्यक्ष पद पर सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. भाजपा से हरीश सेमवाल को प्रत्याशी बनाए जाने पर जिला पंचायत सदस्य कुलदीप बिष्ट ने बगावत कर निर्दलीय नामांकन किया.

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    उत्तरकाशी जिले के नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद पर बागी प्रत्याशियों द्वारा नामांकन करने से भाजपा और कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों का चुनावी गणित गड़बड़ाने लगा है. वहीं नगर पालिका बड़कोट से जसोदा राणा का नामांकन रद्द होने को कांग्रेसी अपने लिए शुभ संकेत मान रहे हैं. दूसरी तरफ यह बीजेपी के लिए चुनाव से पहले बड़ा झटका है.

    अब नगर पालिका बाड़ाहाट में अध्यक्ष पद पर सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. भाजपा से हरीश सेमवाल को प्रत्याशी बनाए जाने पर जिला पंचायत सदस्य कुलदीप बिष्ट ने बगावत कर निर्दलीय नामांकन किया. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से बागी हुए चार धाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल ने प्रदेश स्तर पर उत्तराखंड जनता मोर्चा का गठन कर यहां महेश पंवार को चुनाव मैदान में उतारा है. महेश पंवार भी पूर्व में भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं.

    वहीं चिन्यालीसौड़ पालिका में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी कुसुमलता रावत ने भी भाजपा के टिकट के लिए आवेदन किया था. यहां भाजपा ने जयनी बिष्ट को पार्टी प्रत्याशी बनाया है.

    उधर नगर पालिका बड़कोट में कांग्रेस ने आखिरी समय पर भाजपा की टिकट की दावेदार अनुपमा रावत को अपने खेमे में मिलाकर कांग्रेस प्रत्याशी बना डाला. बता दें कि यहां भाजपा से बागी होकर कृष्णा राणा को भाजपा ने अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया है. अनिता चौहान भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतर चुकी हैं. इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी जशोदा राणा का नामांकन रद्द होने से कांग्रेसी इसको भाजपा का पहला विकेट गिरना बता रहे हैं. अगर ऐसा चलता रहा तो यहां मुकाबला कांग्रेस और निर्दलीय के बीच होगा.

    निकाय चुनाव 2019 लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी भी मानी जा रही है. इसमें जिलों के पार्टी नेताओं का मान, मनोबल और प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है. देखना होगा कि इस निकाय चुनाव में बड़ी पार्टियां बाजी मारती हैं या फिर उत्तरकाशी का इतिहास फिर से निर्दलीयों के नाम पर रहेगा. बता दें कि उत्तरकाशी में निर्दलीयों का दबदबा ज्यादा रहा है.

    (उत्तरकाशी से जगमोहन सिंह)

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