आंधी आए या तूफान, तय समय पर खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री कपाट; पारंपरिक ढंग से होगी पूजा
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आंधी आए या तूफान, तय समय पर खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री कपाट; पारंपरिक ढंग से होगी पूजा
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को खुल जाएंगे. इसके साथ ही उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा की आधिकारिक रूप से शुरुआत हो जाएगी.

गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सदस्य ने कहा- सदियों से आज तक एक दिन भी मुखबा में पूजा बंद नहीं हुई, चाहे बर्फ गिरे या तूफान आए. हम गंगा जी के भक्त हैं, इस बार भी रीति-रिवाजों के साथ ही पूजा होगी..

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के चार धामों में सम्मिलित देश की जीवनदायिनी और पूजनीय नदियों के गंगा-यमुना के उद्गम स्थल माने जाने वाले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को खुल जाएंगे. इसके साथ ही उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा की आधिकारिक रूप से शुरुआत हो जाएगी. हालांकि कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण के चलते इस साल इस यात्रा पर असर पड़ना तय है और श्रद्धालुओं के आने की अभी कोई संभावना नहीं दिख रही, लेकिन गंगोत्री-यमुनोत्री मंदिर समितियों का कहना है कि पूजा समेत सभी धार्मिक रीतियां हमेशा की तरह ही होंगी. उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

तय मुहूर्त पर खुलेंगे कपाट

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल बताते हैं कि गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 25 अप्रैल को मां गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखबा से उनकी डोली चलेगी और 26 तारीख को दोपहर 12:35 बजे गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे. इससे पहले ही परंपरानुसार मुखबा में अप्रैल की शुरुआत के साथ की निरंतर पूजा-अर्चना शुरू हो गई है.



यमुनोत्री मंदिर समिति सदस्य अनिरुद्ध उनियाल भी कहते हैं कि यमुनोत्री धाम के कपाट खोलने की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अक्षय तृतीया के दिन 26 तारीख की दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे. उनियाल कहते हैं कि सदियों से जैसे यमुनोत्री धाम में उनके पुरखे पूजा करते आ रहे हैं, इस साल भी वैसे ही होगी. कोरोना वायरस महामारी से भले ही यात्रा पर असर पड़े लेकिन पूजा और धार्मिक रीति-रिवाजों पर नहीं पड़ेगा.
हम मां के भक्त हैं, हमारा काम है यह

 

सेमवाल कहते हैं कि 2013 में आपदा आई, 2014 में नाममात्र के श्रद्धालु पहुंचे. तब तो सरकार ने कुछ नहीं दिया. हमने अपने पास से ही किया. पहले भी हम लोग अपने घरों से लाए गए फलों से ही मां को भोग लगाते थे. सदियों से आज तक एक दिन भी मुखबा में पूजा बंद नहीं हुई, चाहे बर्फ़ गिरे या तूफान आए. हम गंगा जी के भक्त हैं, हमारा काम है यह. अनिरुद्ध उनियाल भी यही कहते हैं. वह कहते हैं मां यमुना पर हमारी आस्था है कि वह सब ठीक करेंगीं. हमार काम उनकी सेवा करना है तो हम करते रहेंगे, सदियों से कर रहे हैं.

देवस्थानम बोर्ड को लेकर विवाद

राज्य सरकार ने बीते साल गंगोत्री-यमुनोत्री मंदिर को भी देवस्थानम बोर्ड में शामिल कर लिया था. इसे गंगोत्री मंदिर समिति और फिर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. निर्धारित अवधि में सरकार ने अदालत के नोटिस का जवाब नहीं दिया और फिर कोरोना वायरस के चलते कोर्ट बंद हो गया.

सेमवाल कहते हैं कि सरकार ने अनावश्यक और जल्दबाजी में चार धामों की परंपराओं के साथ खिलवाड़ किया. अगर सरकार कुछ करना ही चाहती थी तो सड़क बनवाती. मुखबा तक चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है. 2013 में घाट बह गए, वह अब तक नहीं बने. इंटरनेट वहां है नहीं और इसलिए बैंकिंग व्यवस्था भी नहीं है.

कोरोना की समाप्ति के लिए प्रार्थना

गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों ही धामों की मंदिर समितियों के प्रतिनिधि कहते हैं कि विश्व को कोराना वायरस से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना की जाएगी. उनियाल कहते हैं कि मां यमुना से प्रार्थना करेंगे कि इस विश्वव्यापी महामारी से पूरी दुनिया को छुटकारा दिलाएं.

सेमवाल कहते हैं कि गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के पहले दिन एक यज्ञ किया जाएगा कि मां गंगा इस महामारी से मुक्ति दिलवाएं. इसके साथ ही सेमवाल यह भी कहते हैं कि श्रद्धालुओं को इस बार अपने घरों में ही रहकर मां गंगा की आराधना करनी चाहिए कि वह सारे संकट हरें. उनियाल कहते हैं कि अगर यह संकट ख़त्म हो गया और मां यमुना ने चाहा को श्रद्धालु उनके दर्शन को आ पाएंगे.

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