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प्रभु ने एक बार फिर उत्तराखंड को किया निराश

प्रभु ने एक बार फिर उत्तराखंड को किया निराश

तमाम उम्मीदें जगाने के बाद मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उत्तराखंड की जनता को एक बार फिर निराश किया.

तमाम उम्मीदें जगाने के बाद मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उत्तराखंड की जनता को एक बार फिर निराश किया.

तमाम उम्मीदें जगाने के बाद मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उत्तराखंड की जनता को एक बार फिर निराश किया.

तमाम उम्मीदें जगाने के बाद मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उत्तराखंड की जनता को एक बार फिर निराश किया. सीएम हरीश रावत ने इस बजट को उम्मीदें टूटने वाला बताया.

सामरिक दृष्टि से महत्तवपूर्ण उत्तराखंड में कईं नए रेल ट्रैक अपेक्षित थे तो जिन पुरानी परियोजनाओं पर पहले घोषणा हो चुकी है कम से कम उन पर काम तेजी से आगे बढ़ाने की उम्मीद थी. इसके बावजूद 2016-17 में उत्तराखंड को प्रभु ने निराश ही किया.

नए ट्रैक तो छोड़ दीजिए कोई नई ट्रेन नहीं चलाई गई. रामनगर से दिल्ली के लिए एक फास्ट ट्रेन की लंबे समय से मांग की जा रही थी.

नई दिल्ली-देहरादून जन शताब्दी 2055/2056, दिल्ली-काठगोदाम/रामनगर सम्पर्क क्रान्ति एवं आनन्द विहार-काठगोदाम शताब्दी में यात्रियों की अधिक संख्या को देखते हुए इनमें एक अतिरिक्त प्रथम श्रेणी वातानुकूल एवं वातानुकूल कुर्सीयान की बेहद जरूरत है.

हरिद्वार-देहरादून ट्रैक को डबल करने और देवबंद-रूड़की नए ट्रेक को बनाने का बेहद इंतजार उत्तराखंड को लोगों को था.

रेलवे की आर्थिकी को समझने वाले डॉ वीबी चौरसिया का कहना है कि उत्तराखंड इस रेल बजट से बेहद निराश हुआ है. देहरादून के रेलवे स्टेशन की बेहतरी के लिए चार चाल पहले घोषणा की गई थी लेकिन आज तक कुछ भी धरातल पर देखने को नहीं मिला है.

सीएम ने भी जताई निराशा

उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत प्रभु के इस बजट को बेहद निराश करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा के पांचों सांसदों को अब उत्तराखंड की जनता को जवाब देनेा चाहिए कि आखिर क्यों केंद्र में बैठी उनकी सरकार ने उत्तराखंड की इस कदर उपेक्षा की है.

प्रभु के इस रेल बजट से ये थी उत्तराखंड को उम्मीदें

सहारनपुर-विकासनगर-देहरादून नए रेल मार्ग के निर्माण को बड़ी उम्मीद थी. 2013-14 के रेल बजट में स्वीकृत रामनगर-चौखुटिया रेल मार्ग, राष्ट्रीय सामरिक महत्व के ऋषीकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग परियोजना और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर आज तक सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया काम.

सामरिक दृष्टिकोण से उत्तराखंड राज्य चीन-तिब्बत और नेपाल की विशाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है. उत्तराखंड एक विशेष श्रेणी राज्य होने और राजस्व की कमी के कारण रेलवे परियोजनाओं के व्यय में अंशदान देने में असमर्थ है तथा सामरिक महत्व की परियोजनाओं को आर्थिक मानदण्ड प्रक्रिया से मुक्त रखना भी आवश्यक होगा.

सहारनपुर देहरादून मार्ग का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण भी हो चुका है. इस नए मार्ग का निर्माण हरबर्टपुर (विकासनगर) होते हुए देहरादून करने से यमुना घाटी और चकराता-त्यूनी/जौनसार के जनजातीय निवासियों के साथ पर्यटकों को भी अत्यन्त सुविधा होगी तथा हरिद्वार मार्ग में भीड़ को नियंत्रित करने में भी सुविधा होगी.

रामनगर-चैखुटिया रेल मार्ग हेतु 2013-14 के रेल बजट में स्वीकृति प्रदान की गयी थी. गैरसैण, चैखुटिया के अत्यन्त निकट है. इसलिए रामनगर से गैरसैण रेल सम्पर्क की आवश्यकता है. यह रेल मार्ग सामरिक दृष्टि से भी बेहद खास है.

राष्ट्रीय सामरिक महत्व के ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग परियोजना को पूर्ण करने के लक्ष्य को त्वरित रूप से निर्धारित करने की नितान्त आवश्यकता है.

इसी प्रकार सामरिक दृष्टि से टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण पर भी शीध्र क्रियान्वयन की आवश्यकता है.

इसी प्रकार देवबन्द-रूड़की रेल मार्ग हेतु भी भारत सरकार के द्वारा त्वरित व्यवस्था और कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है.

ऋषिकेश से डोईवाला हेतु नए रेल मार्ग निर्माण का 2013-14 बजट में अनुमोदन किया गया था. जिसका सर्वे पूर्व में हो चुका है जिस पर त्वरित कार्य किए जाने की आवश्यकता है. साल 2013-14 के रेल बजट में हरिद्वार-कोटद्वार-रामनगर डाईरेक्ट लिंक बनाए जाने की घोषणा की गयी थी. यह मार्ग उत्तराखंड के लिए प्राणदायक है.

काशीपुर नजीबाबाद वाया धामपुर रेल लाइन का सर्वे पूर्व में किया जा चुका है. इसके निर्माण से ही यह लिंक मार्ग पूर्ण हो सकेगा और एक विशाल क्षेत्र इससे लाभान्वित होगा. रूड़की-पीरान कलियर/ देहरादून-पुरोला (यमुना किनारे-2)/टनकपुर-जौलजीवी-नई रेल लाइनों के सर्वे की घोषणा विगत वर्षों के रेल बजट में की गयी थी.

इन रेल मार्गों के निर्माण पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है. लालकुआं-मेलानी-टनकपुर-पीलीभीत-भोजीपुरा-बरेली सेक्शन के मीटर गेज (101.79 किमी) को ब्रांड गेज हेतु रेल मंत्रालय की ओर से विगत वर्षों में स्वीकृति प्रदान की गयी है. इसके द्रुत गति से अमान परिवर्तन के लिए पर्याप्त बजट की स्वीकृति आवश्यक है.

रामनगर से दिल्ली नई हेतु एक सीधी द्रुतगामी नॉन-स्टोप रेलगाड़ी की उम्मीद जताई जा रही थी.

दिल्ली से कोटद्वार जाने हेतु वाया नजीबाबाद रेल मार्ग निर्धारित किया जाय तो यात्रा समय में बचत होगी. रानीखेत एक्सप्रेस 5013ए/5014ए में रामनगर हेतु एक प्रथम एसी यान अथवा आधा 1ए कोच लगाने की नितान्त आवश्यकता है.

Tags: Rail Budget, Suresh prabhu

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