चार घंटे की थानेदार ने बाल मज़दूर को घर तक पहुंचाया

News18India
Updated: October 12, 2017, 12:42 PM IST
चार घंटे की थानेदार ने बाल मज़दूर को घर तक पहुंचाया
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Updated: October 12, 2017, 12:42 PM IST
उत्तरकाशी में चार घंटे के लिए पुलिस थाना इंचार्ज बनीं किशोरी ने बाल मज़दूरी और सार्वजनिक रूप से नशे के ख़िलाफ़ कार्रवाई की.

हीना गांव की 19 साल की पूनम रावत को चार घंटे का थानेदार बनने का मौका अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मिला. भुवनेश्वरी महिला आश्रम और प्लान इंडिया के सहयोग से बालिकाओं में आत्म विश्वास जगाने के लिए यह आयोजन किया गया था.

इसके लिए पुलिस मुख्यालय से विशेष अनुमति ली गई थी. इसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्र की बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है. इससे पहले आश्रम के सहयोग से पिछले तीन साल में तीन बालिकाओं को तीन गांव का प्रधान बनाया गया था.

19 वर्षीय पूनम रावत ने सुबह 11 बजे उत्तरकाशी थाने में पहुंचकर थानाध्यक्ष महादेव उनियाल से चार घंटे का चार्ज संभाला. इसके बाद थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पूनम ने बाल मजदूरी और शोषण के खिलाफ एक नाटिका में कोतवाली प्रभारी की भूमिका निभाई. इस दौरान उन्होंने एक कोतवाल के अंदाज में दुकान में काम कर रहे एक नाबालिग बच्चे को उसके घर तक पहुंचाने का काम किया.

इसके बाद पूनम थानाध्यक्ष के वाहन में नगर क्षेत्र की गश्त पर निकली. उनके साथ एक सिपाही भी रहा, जहां उन्होंने जीजीआईसी के बाहर खुली दुकानों में बेचे जा रहे तंबाकू और गुटके आदि को लेकर दुकानदारों को चेतावनी दी कि दुकान के सामने 18 वर्ष से कम बच्चों को गुटका व तंबाकू न बेचें. इस संबंध में दुकान के आगे एक बोर्ड भी लगाया जाए.

साथ ही उन्होंने पास के होटलों का भी जायजा लिया. उन्होंने दुकानदारों को स्पष्ट कहा कि अगर दुकान में शराब परोसते हुए पकड़े गए या शराब बरामद होती है, तो कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद पूनम उत्तरकाशी कोतवाली लौटकर थानाध्यक्ष महादेव उनियाल को कार्यभार सौंपा.

पूनम रावत उत्तरकाशी स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक की द्वितीय वर्ष की छात्रा है. उसके पिता विरेंद्र सिंह रावत की हीना गांव के पास दुकान है. मां गृहणी है. जबकि घर में उसकी दादी के अलावा दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई है.

 
First published: October 12, 2017
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