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चारधाम यात्रा में पहली बार बना ये दुर्लभ संयोग

आगामी यात्रा के लिए चारों धाम के कपाट खुलने की तिथि और मुहूर्त तय हो गया है. इस बार जहां यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को खोले जाएंगे, वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट दो दिन बाद 11 मई को खुलेंगे. हालांकि, यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट तो एक दिन खुलते रहे हैं, लेकिन इस बार दुर्लभ संयोग है कि केदारनाथ के कपाट भी उसी दिन खुलेंगे.
आगामी यात्रा के लिए चारों धाम के कपाट खुलने की तिथि और मुहूर्त तय हो गया है. इस बार जहां यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को खोले जाएंगे, वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट दो दिन बाद 11 मई को खुलेंगे. हालांकि, यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट तो एक दिन खुलते रहे हैं, लेकिन इस बार दुर्लभ संयोग है कि केदारनाथ के कपाट भी उसी दिन खुलेंगे.

आगामी यात्रा के लिए चारों धाम के कपाट खुलने की तिथि और मुहूर्त तय हो गया है. इस बार जहां यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को खोले जाएंगे, वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट दो दिन बाद 11 मई को खुलेंगे. हालांकि, यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट तो एक दिन खुलते रहे हैं, लेकिन इस बार दुर्लभ संयोग है कि केदारनाथ के कपाट भी उसी दिन खुलेंगे.

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आगामी यात्रा के लिए चारों धाम के कपाट खुलने की तिथि और मुहूर्त तय हो गया है. इस बार जहां यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को खोले जाएंगे, वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट दो दिन बाद 11 मई को खुलेंगे. हालांकि, यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट तो एक दिन खुलते रहे हैं, लेकिन इस बार दुर्लभ संयोग है कि केदारनाथ के कपाट भी उसी दिन खुलेंगे.

अगर उत्तराखंड में मौजूदा राजनीतिक हालात ऐसे ही बने रहे तो पहली बार उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा राष्ट्रपति शासन में शुरू होगी. यानि गर्वनर के निजाम में शासन और संबधित जिलों के अफसरों का बड़ा इम्तिहान होगा. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का दावा है कि उन्होंने पहले ही चारधाम यात्रा के पुख्ता इंतजाम कर दिए थे, जिससे असहमति जताते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि राज्यपाल की सक्रियता से यात्रा सफलतापूर्वक चलेगी.

कहने की जरूरत नहीं है कि चारधाम यात्रा न सिर्फ आस्था बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान से भी जुड़ी है और अगर मौजूदा सियासी हालात ऐसे ही बने रहे तो ये पहला मौका होगा जब राष्ट्रपति शासन के दौरान यात्रा संचालित होगी.



सभी जानते हैं कि साल 2013 के दौरान केदारनाथ में भयंकर जलप्रलय आई थी, जिसके बाद न सिर्फ चरधाम यात्रा बल्कि पर्यटन कारोबार पूरी तरह से पटरी से उतर गया था. लेकिन बर्खास्त हरीश रावत सरकार वहां निम के सहारे पुनर्निर्माण कार्यों के जरिए श्रद्धालुओं में नया भरोसा पैदा करने में जरूर कामयाब रही.
वहीं कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि कहीं उत्तराखण्ड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से आगामी मई में शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा तो प्रभावित नहीं होगी.

सूबे के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह का दावा है कि इस बार यात्रियों को पहले से बेहतर सुविधाएं और कनेक्टिविटी मुहैया होंगी.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का दावा है कि उन्होंने अपनी सरकार रहते ही इस बार 75 लाख श्रद्धालुओं की आमद के मद्देनजर इंतजाम किए थे. लेकिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट उनके दावे को खोखला बताते हुए राज्यपाल के.के. पॉल की सक्रियता से चारधाम यात्रा का शानदार आगाज होने की उम्मीद जता रहे हैं.
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