चितकुल ट्रैक पर निकला 22 ट्रैकरों का दल बडासु के पास फंसा, एक की तबियत बिगड़ी

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में पुराने भारत-तिब्बती मार्ग पर, भारत की सीमाओं के बीच बसा चिततकुल सबसे आखिरी गांव के रूप में प्रसिद्ध है.

News18 Uttarakhand
Updated: June 14, 2018, 5:30 PM IST
चितकुल ट्रैक पर निकला 22 ट्रैकरों का दल बडासु के पास फंसा, एक की तबियत बिगड़ी
फ़ाइल फ़ोटो- सतेंद्र बर्तवाल
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Updated: June 14, 2018, 5:30 PM IST
उत्तरकाशी हरकी दून से चितकुल ट्रैक पर निकले 22 ट्रैकरों का दल चितकुल से चार किमी पहले बडासु के पास फंस गया है. इनमें से एक ट्रैकर की तबियत बिगड़ने की सूचना है.

उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन को मिली सूचना के बाद मौके के लिए SDRF, फॉरेस्ट, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान टीम रवाना हो चुकी है. हिमाचल से भी ITBP के जवान रवाना हुए हैं.

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में पुराने भारत-तिब्बती मार्ग पर, भारत की सीमाओं के बीच बसा चिततकुल सबसे आखिरी गांव के रूप में प्रसिद्ध है. रकचम, सांगला और चितकुल के बीच बसा हुआ गाँव क्षेत्र के आदर्श गांव माना जाता है.

जो लोग इस ऐतिहासिक मार्ग से जाने की हिम्मत रखते हैं उनके लिए यह किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं माना जाता है. चितकुल पहुंचना किसी यात्रा के शिखर पर पहुंचने जैसा है.

उत्तरकाशी के आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ट्रैकिंग दल के संचालक से उनकी बात हो गई है. उन्होंने बताया है कि हिमाचल से आईटीबीपी की टीम उनके पास पहुंच गई है और उन्होंने हिमाचल की तरफ़ उतरना शुरू कर दिया है.

(हरीश थपलियाल की रिपोर्ट)
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