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Glacier Burst: आपदा में मलारी ब्रिज टूटने से बढ़ी चिंता, चीन की सीमा से जुड़ा है यह इलाका

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. यहां का मलारी ब्रिज भी टूट गया है. जबकि 170 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. यहां का मलारी ब्रिज भी टूट गया है. जबकि 170 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

Chamoli Glacier Burst: उत्‍तराखंड के जिस इलाके में ग्‍लेशियर फटा है, वह पूरा इलाका तिब्‍बत की सीमा से लगता है. ऐसे में चमोली जिले में बने मलारी ब्रिज के टूटने से परेशानियां खड़ी हो सकती हैं.

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नई दिल्‍ली. उत्‍तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने (Glacier Burst) से आई बाढ़ (Flood) ने तबाही मचा दी है. अभी तक इलाके से 15 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि करीब 150 लोग अभी भी लापता हैं. हालांकि, मौत और भय के इस तांडव के अलावा इस घटना ने भारत (India) के लिए एक और बड़ी चिंता खड़ी कर दी है. उत्‍तराखंड के जिस इलाके में यह घटना घटी है, वह देश का बेहद ही संवेदनशील इलाका है. इस घटना में मलारी गांव (Malari Village) का ब्रिज टूटने से भारत की चिंता दोगुनी हो गई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्‍तराखंड का यह इलाका दो मामलों में बेहद संवेदनशील है. पहला प्राकृतिक रूप से और दूसरा सेना और बॉर्डर एरिया (Border Area) होने की वजह से. 2013 में केदारनाथ आपदा पर ‘हैवॉक इन हेवेन’ नाम से किताब लिखने वाले उत्‍तराखंड निवासी वरिष्‍ठ पत्रकार वेद विलास उनियाल कहते हैं कि चमोली जिले का मलारी गांव इस मामले में बेहद अहम है. मलारी गांव से करीब 60-70 किलोमीटर बाद भारत की तिब्‍बत से सीमा (Indo-Tibetan Border) लगती है. मलारी नीति वैली में है जो चीनी सीमा (Chinese Border) से जुड़ी है. वहीं, नीति पास (Niti Pass) दक्षिण तिब्‍बत के साथ व्‍यापार का प्रमुख प्राचीन मार्ग रहा है. चिंता की बात है कि मलारी जाने का प्रमुख ब्रिज इस हादसे में टूट गया है.

उनियाल कहते हैं कि मलारी के आसपास बसे सात-आठ गांव और हैं, लेकिन वहां तक जाने के लिए इस ब्रिज का ही इस्तेमाल होता रहा है. यहां तक कि भारत की सेना भी इस ब्रिज का इस्‍तेमाल करती है. ऐसे में इसके टूटने से होने वाली असुविधा सैन्‍य और सामरिक द्रष्टि से भी चिंता पैदा करने वाली है.

उत्‍तराखंड में जहां ग्‍लेशियर फटा है वहां से कुछ दूरी पर इंडो-तिब्‍बतन बॉर्डर लगता है.

उत्‍तराखंड में जहां ग्‍लेशियर फटा है वहां से कुछ दूरी पर इंडो-तिब्‍बतन बॉर्डर लगता है.

वह बताते हैं कि पिछले साल कोरोना और उसके बाद चीन के साथ भारत के संबंधों में आई हलचल के बाद सीमा क्षेत्र पर किसी भी तरह की अव्‍यवस्‍था ठीक नहीं है. उत्‍तराखंड के और भी इलाके हैं जैसे उत्‍तरकाशी आदि जहां इस तरह की प्राकृतिक आपदा या घटनाएं बहुतायत में होती हैं. लिहाजा इन संवेदनशील इलाकों में बहुत ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत है.

चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में मिलती है सबसे कीमती कीड़ा जड़ी, इसके लिए ग्‍लेशियरों को खोद डालते हैं लोग

इलाके से बढ़ रहा पलायन
उत्‍तराखंड में ईको टास्क फोर्स के रिटायर्ड कमांडेंट ऑफिसर कर्नल हरिराज सिंह राणा कहते हैं कि इंडो-तिब्‍बतन बॉर्डर की ओर जाने का एक ही रास्‍ता है जो मलारी ब्रिज से होकर जाता है. चमोली में ग्‍लेशियर फटने से यही ब्रिज टूटा है. यह बहुत ही अहम रास्‍ता है. मलारी गांव के बाद पड़ने वाले कागा, द्रोणागिरि, बंपा, कैलाशपुर, गमशाली, लता आदि हैं. इन गांवों में पहले से ही बहुत कम संख्‍या में लोग रहते हैं, जबकि ये लोग ही सेना के आंख और कान होते हैं. इन इलाकों से पलायन भी बहुत ज्‍यादा हुआ है. पहले से ही यहां लोगों को बसाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब इस घटना से ये गांव पूरी तरह कट गए हैं. ऐसे में यह निश्चित ही चिंता की बात है.

राणा कहते हैं कि यह इलाका पर्यटन (Tourism) की दृष्टि से भी दुरूह इलाकों में ही आता है और कम संख्‍या में लोग यहां पहुंचते हैं. लेकिन, इंडो-तिब्‍बत बॉर्डर के चलते सेना की अच्‍छी खासी संख्‍या यहां होती है. ऐसे में सेना (Army) के आवागमन की दृष्टि से भी यह ब्रिज तत्‍काल बनाया जाना चाहिए और यहां सुविधाएं शुरू होनी चाहिए.

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उत्तराखंड : भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे बंद, बड़ेथी के पास 22 तक रूट रहेगा डायवर्ट

गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन हुआ.

भारी बारिश के चलते एक बार फिर गंगोत्री जाने वाला हाईवे ठप हो गया है. यहां राहत कार्य चल रहा है तो वहीं एक टनल निर्माण के कारण 22 सितंबर तक हाईवे पर रूट डायवर्ट किए जाने का प्लान बनाया गया है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 14, 2021, 11:19 IST
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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का कहर जारी है. ताज़ा समाचार के मुताबिक लगातार हो रही भारी बारिश के चलते उत्तरकाशी ज़िले में गंगोत्री हाईवे ठप हो गया है. यहां भूस्खलन के कारण चट्टानों के टुकड़े और मलबा सड़क पर गिर गया है, जिसे हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. इससे पहले खबर यह थी कि बड़ेथी के पास 15 से 22 सितंबर तक इस गंगोत्री हाईवे पर वाहनों का आना जाना बंद कर दिया जाना था क्योंकि यहां एक महत्वपूर्ण निर्माण कार्य होना है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्विटर पर जानकारी दी कि गंगोत्री हाईवे पर सुखी टॉप इलाके में भूस्खलन के चलते रास्ता बंद हो गया. उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल के हवाले से कहा गया कि बॉर्डर रोड्स संगठन यानी बीआरओ की मदद से यहां रेस्क्यू करवाया जा रहा है और मलबा हटाने की कवायद शुरू कर दी गई है. खबर लिखे जाने तक यात्री और वाहन फंसे हुए थे, जबकि कुछ को दूसरे रास्ते लेने की हिदायत दी गई.

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गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन से रास्ता बंद होने संबंधी एएनआई का ट्वीट.

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एक हफ्ते बंद रहेगा हाईवे, रूट डायवर्ट होगा
एक अन्य खबर में बताया गया कि बड़ेथी के पास चूंकि एक ओपन टनल का निर्माण किया जाना है इसलिए 15 से 22 सितंबर के बीच यहां रास्ता बंद रहेगा. वास्तव में, करीब 9 साल पहले की आपदा के चलते यहां भूस्खलन क्षेत्र बन गया था, जिससे यह सड़क दुर्घटना के लिए आशंकित हो गई थी. इसके ट्रीटमेंट पर 29 करोड़ खर्च करने के बाद भी काम सफल नहीं हो सका था. अब यहां और 28 करोड़ की लागत से एक ओपन टनल बनवाई जा रही है, जिसकी लंबाई 310 मीटर की होगी. इस निर्माण के चलते वाहनों को मनेरा बाईपास से डायवर्ट किया जाएगा.

Uttarakhand News: मंत्री हरक सिंह रावत के बेबाक बोल, ढेंचा बीज घोटाले पर कहीं ये बात!

Uttarakhand News: मंत्री हरक सिंह रावत के बेबाक बोल

Uttarakhand Scam News: उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ढेंचा बीज घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है. विपक्ष को बैठे बिठाए एक तरह से मुद्दा मिल गया है.

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देहरादून. उत्तराखंड की राजनीति के सबसे चर्चित ढेंचा बीज घोटाले (Dhencha Beej Scam)का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है. धामी सरकार में दिग्गज कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने न्यूज18 से बातचीत में सोमवार को बड़ा खुलासा किया है. हरक सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में हरीश रावत इससे पहले बीजेपी सरकार में कृषि मंत्री रहे त्रिवेंद्र रावत को ढेंचा बीज घोटाले के लिए जेल भेजना चाहते थे. हरक ने कहा कि उन्होंने त्रिवेंद्र के समर्थन में दो पेज की नोटिंग की थी. जिसके चलते वो जेल जाने से बच गए. उन्होंने कहा कि तब हरीश रावत ने कहा था कि तुम सांप को दूध पिला रहे हो. मंत्री हरक सिंह ने कहा कि यदि तब त्रिवेंद्र जेल गए होते तो 2017 में वो सीएम भी नहीं बन पाते.

बताते चलें कि 2007 से 12 के बीच बीजेपी की खंडूरी सरकार में त्रिवेंद्र रावत कृषि मंत्री थे, इसके बाद 2012 से 17 तक रही कांग्रेस सरकार में हरक सिंह रावत कृषि मंत्री बने. हरीश रावत मुख्यमंत्री थे. तब त्रिवेंद्र पर ढेंचा बीज खरीद में घोटाले के आरोप लगे थे. वहीं पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि हरक सिंह कुछ भी बोले मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता. तत्कालीन समय में हरीश रावत तब एक डेढ़ महीने दिल्ली स्थित एम्स में एडमिट रहे. ढेंचा बीज की उस फाइल को अपने सिरहाने के नीचे दबा कर रहे. त्रिवेंद्र का कहना है कि उस फाइल की बड़ी-बड़ी फोटो स्टेट कर के सचिवालय के चारों ओर चिपका दीजिए, जनता खुद फैसला कर लेगी. उसमें भ्रष्टाचार हुआ या नहीं. त्रिवेंद्र ने कहा कि हरक सिंह की आदत है कुछ भी कह देने की.

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अपने इस इंटरव्यू में हरक सिंह ने कहा कि 2016 की बगावत उन्होंने कैबिनेट मंत्री बनने के लिए नहीं की थी. उन्होंने आगे कहा कि उनको उम्मीद थी कि इसके बाद वो सीएम बन जाएंगे. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. मेरी किस्मत में नहीं है सीएम बनना. बहरहाल, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ढेंचा बीज घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है. विपक्ष को बैठे बिठाए एक तरह से मुद्दा मिल गया है. ऐसे में हरक की ये बयानबाजी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है.

Uttarakhand News: बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस विधायक राजकुमार, बोले- पीएम मोदी से हुए प्रभावित

Uttarakhand News: बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस विधायक राजकुमार

Uttarakhand Politics: उत्तराखंड के पुरोला से विधायक राजकुमार को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी की जीत होगी और फिर से डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में बनेगी.

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दिल्ली. उत्तराखंड के पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार (Congress MLA Raj kumar) रविवार को बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के योजनाओं से प्रभावित होकर के बीजेपी का दामन थाम रहे हैं. राजकुमार का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा काफी बड़ी है और अब भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता. बल्कि भारत के साथ आंख में आंख मिला कर के दोस्ती करना चाहता है. इसी से प्रभावित होकर के बीजेपी का दामन थाम रहे हैं.

न्यूज18 से बातचीत में पुरोला विधायक राजकुमार ने कहा, ‘वह चुनाव को लेकर नहीं बल्कि बीजेपी से प्रभावित होकर के पार्टी में शामिल हो रहे हैं. उनका कहना है कि बीजेपी के नेतृत्व में प्रदेश का काफी विकास हुआ है और ऑल वेदर रोड के बनने से प्रदेश में कनेक्टिविटी बढ़ी है.’ उनका कहना है कि कनेक्टिविटी बेहतर होने से धार्मिक स्थलों की यात्रा अब सुगम हो गई है. कोरोना काल में मोदी सरकार के 80 करोड़ों लोगों को मुफ्त में अनाज देने की योजना से भी वे काफी प्रभावित हुए हैं. राजकुमार का कहना है कि इस योजना से लोगों को काफी फायदा हुआ है.

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इसके साथ ही साथ पुरोला से कांग्रेस के विधायक रहे राजकुमार आगे कहते हैं कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों के लिए कुछ नहीं किया, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने अनुसूचित जाति समाज को स्वावलंबी बनाने के लिए काफी काम किया है. उत्तराखंड के पुरोला से विधायक राजकुमार को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी की जीत होगी और फिर से डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में बनेगी. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने राजकुमार को जनता से जुड़ा हुआ नेता बताया. इस मौके पर बीजेपी के सांसद और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और सह मीडिया प्रभारी संजय मयूख भी मौजूद रहे.

...जब अचानक भावुक हुए पूर्व CM हरीश रावत, Video देखकर लोगों ने किए तरह-तरह के कमेंट!

Uttarakhand News: हरीश रावत का रोता हुआ वीडियो वायरल

Harish Rawat News: जानकार मानते हैं कि हरीश रावत अपनी इन अलग कोशिशों से लोगों के करीब जाने का रास्ता निकालते हैं.

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शैलेंद्र सिंह नेगी/ उत्तराखंड. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Former CM Harish Rawat) अपने बयानों से लेकर अपने काम तक से चर्चा में बने रहते हैं. शुक्रवार को हरीश रावत ने एक ऐसा वीडियो अपनी सोशल मीडिया वॉल पर पोस्ट किया जिसमें वो अपने आंसू पोछते दिख रहे हैं. दरअसल हरीश रावत जिस समय आंसू पोंछ रहे हैं उस समय वो मोबाइल पर एक उत्तराखंडी लोकगीत सुन रहे हैं. इसी दौरान इस लोक गीतों के शब्द सुनकर हरीश रावत के आंखों में आंसू छलक जाते हैं.

हालांकि वीडियो में हरीश रावत अपने भावुक होने का कारण भी बता रहे हैं. ऑडियो में सुनाई दे रहा गीत हरीश रावत के कामों को लेकर गाया गया है. बताया जा रहा है कि इसे अल्मोड़ा में रहने वाले एक लोक गायक ने गाया है. जिसमें हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान किए गए अच्छे कामों को जिक्र है. जिसे सुनकर हरीश रावत भावुक हो गए हैं. हालांकि हरदा का वीडियो देख लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. हरदा के समर्थक जहां हरदा को 2022 के लिए जरूरी करार दे रहे हैं वहीं उनके विरोधी हरदा पर व्यंग कसने से बाज नहीं आ रहे.

गाने सुनकर करना पड़ेगा टाइम पास
भगवान कार्की नाम ने यूजर ने हरदा की वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा. ”हरदा पिछली बार भी आप पर गाने बने थे फिर भी आपको दो जगहों से हार का सामना करना पड़ा. आपको गीत नहीं आपकी नीतियां आपको जिताती हैं. नीतियां आपकी वही हैं 90 मिनट नमाज अदा करने के लिए छुट्टी देकर. आपको फिर यही गाने सुनकर टाइम पास करना पड़ेगा​.”

पॉलिटिक्स छोड़ शुरू की एक्टिंग
मुकुल पलड़िया नाम के एक शख्स ने कमेंट करते हुए व्यंग किया कि पॉलिटिक्स छोड़ हरदा ने एक्टिंग शुरू कर दी है. जबकि त्रिभुवन सिंह राणा ने हरीश रावत का समर्थन करते हुए लिखा कि निसंदेह आज संम्पूर्ण उत्तराखंड को आपकी जरूरत है. आप है तो विश्वास है कि उत्तराखंड के लोगों का बेरोजगारी का आलम, मंहगाई का आलम, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि की स्थिति फिर से जीने की इच्छा होगी.

हलवाई भी बन चुके हैं हरीश रावत
कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष हरीश रावत राजनीति के इतर भी चर्चाओं में रहते हैं. वो कभी मैंगो पार्टी, कभी नींबू पार्टी, कभी भुट्टा पार्टी तो कभी उत्तराखंडी पकवानों और व्यजंनों की पार्टी देते रहते हैं. यही नहीं अपने राजनीतिक दौरों के दौरान हरदा का किसी भी ढाबे में रुककर चाय बनाना, चाय पीना, जलेबी बनाना, राजमा-चावल और शिकंजी का मजा लेना चर्चाओं में बना रहता है. जानकार मानते हैं कि हरीश रावत अपनी इन अलग कोशिशों से लोगों के करीब जाने का रास्ता निकालते हैं.

गरतांग गली में स्काई वॉक पर घूमने आए, छोड़ गए 'गंदगी के निशान', मुकदमा दर्ज

नेलांग वैली में गरतांग गली के पास बने स्काई वॉक को गंदा करने पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा.

Uttarakhand Tourism: उत्तराखंड की नेलांग वैली में गरतांग गली के नाम से मशहूर पहाड़ के पास देवदार की लकड़ी के बने खूबसूरत स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने अपने नाम लिख दिए. पुलिस ने इसको लेकर मुकदमा दर्ज किया है.

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उत्तरकाशी. आपने ट्रेनों के टॉयलेट में या ऐतिहासिक स्थलों पर प्रेमी-प्रेमिकाओं या उपद्रवी तत्वों की हरकतें देखी होंगी, जो दीवारों पर अपने नाम लिखकर उसे गंदा करते हैं. पहाड़ पर रमणीक जगहों के लिए मशहूर उत्तराखंड में भी कुछ ऐसी ही हरकत देखने को मिली है. यहां उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में लकड़ी के बने खूबसूरत स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने अपने नाम के साथ-साथ तमाम तरह के मैसेज लिखकर इसे गंदा कर दिया है. गरतांग गली के नाम से मशहूर पहाड़ पर वर्षों पहले लकड़ी की सीढ़ियां बनाई गई थीं, जिसे स्काई वॉक के नाम से जाना जाता है. देवदार की लकड़ी से बने इस स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने कालिख पोतकर गंदगी के निशान छोड़ दिए हैं. पुलिस ने इसको लेकर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.

नेलांग वैली में गरतांग गली के नाम से खड़े पहाड़ पर जाने वाला यह रास्ता भारत-चीन को जोड़ता है. 1962 की लड़ाई से पहले यहां के स्थानीय लोग इस रास्ते से तिब्बत जाते थे. दुर्गम होने की वजह से वर्षों तक यह रास्ता आम लोगों या पर्यटकों के लिए बंद था, जिसे कुछ वर्ष पहले ही खोला गया है. सरकार ने देवदार की लकड़ी की सीढ़ियां बनाकर करीब 65 लाख रुपए की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया, ताकि यह खूबसूरत जगह उत्तराखंड में नामी पर्यटक स्थलों की शोहरत पा सके. इसके बाद यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगे. लेकिन कुछ हुड़दंगी सैलानी इसकी खूबसूरती खराब कर अपनी गंदगी के निशान यहां छोड़ गए.

आपको बता दें कि उत्तरकाशी के गंगोत्री इलाके में भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह रही गरतांग गली में लकड़ी की रेलिंग की भव्यता को खराब करने को लेकर अब प्रशासन सतर्क हो गया है. वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद सिंह की तहरीर पर गंगोत्री थाने में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा 427 के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने कहा कि गंगोत्री नेशनल पार्क के फॉरेस्ट अधिकारी की शिकायत के बाद पुलिस को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. यहां आने वाले पर्यटक इस स्थान की खूबसूरती के साथ छेड़छाड़ न करें, इसका ध्यान रखने को कहा गया है.

Landslides in Uttarakhand : चट्टानें गिरने से उत्तरकाशी का गंगोत्री हाईवे बंद, मसूरी-देहरादून रोड ठप

उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे अस्थायी तौर पर बंद हुआ.

देहरादून के अलावा पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं. वहीं राज्य में गुरुवार को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा चुका है. भारी बारिश के चलते मसूरी और टिहरी का रास्ता भी प्रभावित हुआ.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं रोज़मर्रा की बात हो गई हैं, लेकिन उत्तरकाशी से बड़ी खबर यह है कि चट्टानें सड़क पर गिर जाने के कारण गंगोत्री नेशनल हाईवे ठप हो गया है. हालांकि स्थानीय लोगों के रेस्क्यू और हाईवे को फिर से चालू करने की कवायद जारी है, लेकिन फिलहाल ट्रैफिक और कई लोग फंसे हुए हैं. गुरुवार को राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में खास तौर पर बेहद भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा चुका था. वहीं राजधानी देहरादून में भी भारी बारिश से खास सड़कें बंद होने की खबरें हैं.

हिमाचल के साथ ही उत्तराखंड में भूस्खलन के हादसे लगातार हो रहे हैं. समाचार एजेंसी एएनआई ने तस्वीरें जारी करते हुए बताया कि भूस्खलन के चलते उत्तरकाशी का गंगोत्री हाईवे अस्थायी तौर पर बंद हो गया है. BRO (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “हम स्थानीय लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे हैं. BRO द्वारा सड़क पर गिरे मलबे को हटाकर राजमार्ग को सुचारू किया जा रहा है.” बता दें कि राज्य में गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं और लोगों को मौसम के प्रति लगातार सचेत किया जा रहा है.

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एएनआई का ट्वीट

देहरादून मसूरी रोड बंद
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और उससे सटे मशहूर पर्यटन स्थल मसूरी में भारी बारिश का दौर जारी है. खबरों की मानें तो दोनों जगहों पर 100 मिलीमीटर बारिश हुई है. वहीं, देहरादून में शिव मंदिर और गलोगी पावर स्टेशन के पास बुधवार को भूस्खलन की घटनाएं भी हुईं, जिसके चलते मसूरी की रोड ठप हो गई. यही नहीं, मसूरी और टिहरी के मार्ग पर भी अंदाखेत के पास भूस्खलन होने से कुछ समय के लिए यह रास्ता भी अवरुद्ध रहा. गौरतलब है कि मसूरी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल केम्प्टी फॉल भी जलस्तर बढ़ने से विकराल हो रहा है.

International Tiger Day 2021: आज है अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस, जानिए देश के 5 मशहूर टाइगर सेंचुरी के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: भारत के विभिन्न राज्यों में कई अहम बाघ अभयारण्य हैं. (Image: Shutterstock)

International Tiger Day 2021: बाघों को वन्यजीवों (Wildlife) की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है और इनके संरक्षण के लिए 'सेव द टाइगर' जैसे राष्ट्रीय अभियानों (National Campaigns) को चलाया गया है.

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International Tiger Day 2021: हर साल दुनिया भर में 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है. इसे मनाने का मकसद यही है कि लोगों में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए जागरूकता (Awareness) पैदा की जाए. बाघों को वैसे भी वन्यजीवों (Wildlife) की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है और इनके संरक्षण के लिए ‘सेव द टाइगर’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों (National Campaigns) को चलाया गया है. बाघ संरक्षण को प्रोत्साहित करने और बाघों की घटती संख्या के प्रति जागरूक के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा की गई थी. इसमें 2022 तक बाघों की संख्‍या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया था.

भारत में विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में बाघ अभयारण्य (Tiger Sanctuary) हैं. अगर आपको बाघों को देखने का जुनून है, तो इस टाइगर डे के मौके पर आप इन सबसे अच्छे बाघ अभयारण्यों की सैर की योजना बना सकते हैं. जानिए देश के 5 मशहूर बाघ अभयारण्यों के बारे में-

जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड
हिमालय की तलहटी में बसा जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भारत का एक अहम टाइगर रिजर्व है. 500 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1936 में हुई थी. उत्तराखंड में मौजूद इस जिम कॉर्बेट जैसे हरे-भरे कुछ ही बाघ अभयारण्य हैं. तो इस बार आप एक आकर्षक जंगल सफारी या जंगल के बीच एक रोमांचकारी सफर का आनंद ले सकते हैं.

रणथंभौर टाइगर रिजर्व, राजस्थान
कभी जयपुर के महाराजाओं का शिकार स्थल रहा रणथंभौर आज भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में से एक है. बाघों की एक बड़ी संख्‍या यहां है और यह 1.134 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है. यह विशेष रूप से बंगाल टाइगर्स के निवास के रूप में जाना जाता है. आप यहां बाघों के अलावा अन्य प्रजातियों को भी देख सकते हैं, जिनमें भालू, लकड़बग्घा, लोमड़ी और सियार शामिल हैं.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश
बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य भारत में सर्वश्रेष्ठ बाघ अभयारण्यों की सूची में उच्च स्थान पर है. हर दिन हजारों पर्यटक यहां आते हैं. यहां रॉयल बंगाल टाइगर्स का सबसे अधिक है. 820 वर्ग किमी की दूरी में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में प्राचीन बांधवगढ़ किला भी है. अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और गौरवशाली इतिहास के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की यात्रा लोगों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है.

पेरियार टाइगर रिजर्व, केरल
अगर आप केरल में मनमोहक सुंदरता और अद्भुत वन्य जीवन का आनंद लेना चाहते हैं तो पेरियार टाइगर रिजर्व आपके लिए बेस्‍ट ऑप्‍शन हो सकता है. यह भारत के प्रसिद्ध बाघ अभयारण्यों में से एक है और इसमें बंगाल के बाघ, सफेद बाघ, एशियाई हाथी, जंगली सूअर और सांभर की बड़ी आबादी है. लगभग 777 वर्ग किमी के कुल क्षेत्रफल के साथ इसमें एक कृत्रिम झील भी है, जो इसकी सुंदरता और आकर्षण को बढ़ाती है.

सुंदरबन टाइगर रिजर्व, पश्चिम बंगाल
सुंदरबन टाइगर रिजर्व एक विश्व धरोहर स्थल और रॉयल बंगाल टाइगर का अहम स्‍थान है. इस टाइगर रिजर्व की खासियत यह है कि इसमें जलीय स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों सहित लुप्तप्राय प्रजातियों की एक महत्वपूर्ण संख्या भी है. हालांकि देश के अधिकांश राष्ट्रीय उद्यानों के विपरीत सुंदरबन में जीप सफारी की सुविधा नहीं है. इसके बजाय आपको क्षेत्र के आस-पास के परिवहन और दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए नाव का सहारा लेना होगा.

उत्तराखंड में एक महीने में दूसरी बार भूकंप, अब उत्तरकाशी में लगे झटके

प्रतीकात्मक तस्वीर

Earthquake in Uttarakhand : जून के आखिरी हफ्ते में प्रदेश के एक और पहाड़ी ज़िले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और अब उत्तरकाशी में भूकंप का केंद्र पाया गया. हालांकि यह घातक साबित नहीं हुआ.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में एक महीने के भीतर ही दूसरी बार भूंकप का झटका महसूस किया गया. इस बार भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी ज़िले में होना बताया गया है. उत्तरकाशी में शुक्रवार व शनिवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि ये झटके तेज़ नहीं थे, लेकिन एक थराथराहट जैसी थी. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई. विशेषज्ञों, स्थानीय इकाइयों और आपदा प्रबंधन ने अब तक किसी जान या माल के नुकसान की पुष्टि नहीं की है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक उत्तरकाशी में देर रात हल्के झटके महसूस किए गए. रात करीब 1 बजकर 28 मिनट पर ये झटके लगने की खबरें हैं. भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी से करीब 23 किलोमीटर की दूरी पर माना गया जबकि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology) का कहना है कि केंद्र ज़मीन के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई में था.

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गौरतलब है कि इससे पहले उत्तराखंड के एक और पहाड़ी ज़िले पिथौरागढ़ में भी बीती 28 जून को 3.7 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था. तब इस भूकंप का केंद्र पिथौरागढ़ से 55 किलोमीटर दूर पाया गया था. पिथौरागढ़ में 28 जून की दोपहर झटके महसूस किए गए थे और उस समय भी किसी किस्म के जान माल का नुकसान नहीं हुआ था.

उत्तराखंड : चंपावत में भूस्खलन, दर्जनों फंसे रहे, उत्तरकाशी में पीड़ितों से मिले CM

चंपावत में आठ जगह भूस्खलन के बाद ट्रैफिक कई जगह फंस गया. (File Photo)

भारी बारिश के कहर के बाद उत्तरकाशी के कंकराडी गांव जाकर सीएम धामी ने पीड़ितों को मदद देने के साथ ही एक गांव के विस्थापन के आदेश दिए. वहीं, चंपावत में नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक सुचारू नहीं हो सका.

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चंपावत/उत्तरकाशी. उतराखंड के चंपावत ज़िले में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की लगातार घटनाओं के बाद टनकपुर घाट नेशनल हाईवे पर जैसे मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा. हाईवे जगह जगह बंद हो जाने के चलते करीब 150 लोग रास्ते में फंस गए. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी ज़िले का दौरा किया और उन परिवारों से मुलाकात की, जिनके परिजन बादल फटने के हादसे के शिकार हुए थे. इन परिवारों से मुलाकात करते हुए धामी ने कई तरह की मदद देने की बात कही. वहां, चंपावत में प्रशासन को खासी मशक्कत करना पड़ी.

ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बुधवार को करीब 150 लोगों के चंपावत में फंसे होने की जानकारी देते हुए कहा कि मलबा हाईवे पर गिर जाने के चलते विश्रामघाट के रास्ते में ट्रैफिक जाम रहा. मंगलवार से बुधवार के बीच इस हाईवे पर आठ जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिनमें करीब 150 लोग अटक गए. पांडेय का दावा है कि मंगलवार शाम तक सात जगहों पर मलबा हटा दिया गया था.

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देवीधुरा से हल्द्वानी के रास्ते निकाले गए लोग
चंपावत के हाईवे पर जगह जगह फंसे हुए लोगों को देवीधुरा होते हुए हल्द्ववानी के रास्ते से डायवर्ट कर निकाला गया. हालांकि विश्रामघाट की तरफ रास्ता अवरुद्ध होने के चलते लोग फंसे रहे. पांडेय के हवाले से आखिरी अपडेट खबरों के मुताबिक करीब दो दर्जन लोग फंसे हुए थे. यह भी गौरतलब है कि चंपावत समेत उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मौसम विभाग ने भारी बारिश के आसार भी जताए.

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सीएम ने कहा, विस्थापित करो गांव
दूसरी तरफ, बुधवार को सीएम धामी उत्तरकाशी के मंडो गांव में बादल फटने के पीड़ित परिवारों से मिले और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया. कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के साथ गांवों में पहुंचे सीएम ने ज़िले के कलेक्टर को मंडो गांव को विस्थापित करने के आदेश भी दिए. यहां दो गांवों में लोगों के घर घर जाकर सीएम ने मुलाकात और बातचीत की. इस दौरान सीएम ने मृतकों के परिजन को 1 लाख रुपये की मदद सीएम रिलीफ फंड से और 4 लाख की मदद आपदा राहत फंड से देने की बात कही.

उत्तराखंड : सड़क पर गिरी चट्टान, गंगोत्री नेशनल हाईवे 10 दिन में दूसरी बार बंद

भूस्खलन के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर

Heavy Rains in Uttarakhand : एक सप्ताह पहले भी भूस्खलन के चलते यह हाईवे बंद हो गया था. हाल में राज्य के पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद इन इलाकों में सैकड़ों सड़कें बंद हो गई थीं.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है. भारी बारिश के चलते या उसके बाद भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और इस बारे में मौसम विभाग ने 22 जुलाई तक के लिए अनुमान जारी करते हुए चेतावनी भी जारी की थी. ताज़ा खबर यह है कि भूस्खलन के चलते गंगोत्री नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है. यह वही उत्तरकाशी ज़िला है, जहां दो दिन पहले सोमवार को बादल फटने के कारण तबाही ​मची थी. मांडो गांव में तीन लोगों की मौत हुई थी और कई मकान भारी बारिश की चपेट में आ गए थे.

समाचार एजेंसी एएनआई ने बुधवार सुबह के ताज़ा ट्वीट में बताया गया कि उत्तरकाशी ज़िले के सूनागढ़ इलाके के पास भूस्खलन के चलते नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है. इस साल भारी बारिश में गंगोत्री नेशनल हाईवे का अवरुद्ध हो जाना एक समस्या बन चुका है. इससे पहले 12 जुलाई को भी यह हाईवे इसी कारण से बंद हो गया था. हालांकि तब यह भूस्खलन दाबरानी क्षेत्र में हुआ था.

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एक हफ्ते पहले हुए इस भूस्खलन के चलते करीब आधा दर्जन गांव मुख्यालय से कट गए थे. हालांकि आठ से दस घंटों के राहत कार्य के बाद इस हाईवे को तब खोला जा सका था. यह भी गौरतलब है कि बीते सोमवार को ही पहाड़ी ज़िलों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद 250 सड़कें बंद हो गई थीं, जिनमें से कई सड़कें अब तक नहीं खुल सकी हैं.
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