150 साल पहले अंग्रेज कारोबारी ने देखा था सपना, अब उत्तराखंड सरकार करेगी पूरा, बहुरेंगे इस घाटी के दिन

पर्यटन की अपार संभावनों को अपने में समेटे हर्षिल घाटी फिलहाल मूलभूत सुविधाओं की कमी को झेल रहा है.
पर्यटन की अपार संभावनों को अपने में समेटे हर्षिल घाटी फिलहाल मूलभूत सुविधाओं की कमी को झेल रहा है.

तकरीबन 150 साल पहले हर्षिल घाटी (Harshil Valley) को विशेष पहचान दिलाने वाले अंग्रेज व्यापारी विल्सन के सपनों को अब जमीन पर उतारने के लिए सरकार (Uttarakhand Government) ने कदम बढ़ा दिया है.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) की योजना परवान चढ़ी तो जल्द ही गंगोत्री धाम और नेलांग घाटी से महज 30 किमी पहले स्थित विश्व प्रसिद्ध हर्षिल घाटी (Harshil Valley) के दिन बहुर जाएंगे. हर्षिल घाटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटक स्थल (Tourist Place) बनाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार की गई है. जल्द ही इस योजना को जमीन पर उतारकर हर्षिल घाटी को पर्यटकों का मन मोहने के लिए तैयार किया जाएगा.

तकरीबन 150 साल पहले हर्षिल घाटी को विशेष पहचान दिलाने वाले अंग्रेज व्यापारी विल्सन के सपनों को अब जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिया है. फिलहाल हर्षिल घाटी मूलभूत सुविधाओं से भी दूर है.

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि हर्षिल घाटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटनस्थल बनाने की कार्य योजना तैयार कर ली गई है. जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा.



सरकार के इस पहल से स्थानीय लोगों में खुशी है. इनकी मानें तो विश्व प्रसिद्ध हर्षिल घाटी मूलभूत सुविधाओं से वंचित थी, लेकिन सरकार की पहल से अब घाटी के दिन बहुरेंगे. बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से उनको व्यापार और नये रोजगार का मौका मिलेगा.
उत्तरकाशी के डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि जल्द ही हर्षिल घाटी की तस्वीर बदल जाएगी. इसके कायाकल्प के लिए पैसे भी रिलीज कर दिये गये हैं. एकबार घाटी का नजारा बदलते ही पर्यटक का रूख इस ओर होने लगेगा. इससे रोजगार के साथ-साथ घाटी को नई पहचान भी मिलेगी.

सब कुछ ठीक रहा तो अंग्रेज कारोबारी विल्सन ने डेढ़ सौ साल पहले जो सपना इस घाटी के लिए देखा था, वो जल्द जमीन पर हकीकत के रूप में नजर आएगा.
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