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यहां की बदहाल सड़कों की किसी को परवाह नहीं

यहां की बदहाल सड़कों की किसी को परवाह नहीं

थोड़ी सी बारिश में भी हरिद्वार की सड़के जलमग्न हो जाती हैं: File Photo

थोड़ी सी बारिश में भी हरिद्वार की सड़के जलमग्न हो जाती हैं: File Photo

आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हरिद्वार से तैयारी कर रहे नेताओं को होमवर्क कर जनता के बीच जाना पड़ेगा. हरिद्वार में देश-प्रदेश के तमाम मुद्दों पर सड़कों का नदियों में तब्दील होना भारी पड़ने वाला है. यह ऐसा मुद्दा है, जिससे हरिद्वार के आम आदमी का वास्ता है. हरिद्वार के सबसे बड़े वोटर व्यापारी वर्ग का वास्ता है.

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    हरिद्वार की बदहाल सड़कों को लेकर लोग बेहद नाराज हैं. थोड़ी सी बारिश में भी शहर की सड़के जलमग्न हो जाती हैं. कांग्रेस हो या भाजपा, कोई भी जनप्रतिनिधि जनता की सुनने को तैयार नहीं हैं.

    आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हरिद्वार से तैयारी कर रहे नेताओं को होमवर्क कर जनता के बीच जाना पड़ेगा. हरिद्वार में सड़कों के जलमग्न होने का मुद्दा सभी दूसरे मसलों पर भारी पड़ने वाला है. आम आदमी से लेकर व्यापरी तक, सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर परेशान हैं.

    हरिद्वार धर्मनगरी है, लेकिन यहां का ड्रेनेज सिस्टम किसी कस्बे से भी बदतर है. जरा सी बारिश से यहां की सड़कें लबालब हो जाती हैं. फिलहाल बारिश का सीजन चल रहा है.

    हरिद्वार के हर इलाके में हालात खराब हैं. रानीपुर मोड़ का इलाका तो डूबने के कगार पर है. दुकानों में कईं बार पानी भर चुका है. इससे व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. हरिद्वार की उपनगरी ज्वालापुर में भी यही हाल है. कटहरा बाजार में पानी ऐसे बह रहा है मानो कोई नदी हो. बारिश ने यहां कारोबार को ठप कर रख दिया है. पुराने हरिद्वार, कनखल और ज्वालापुर में आवासीय क्षेत्रों में घरों में पानी घुस रहा है.

    दरअसल बारिश के पानी की निकासी की कोई व्यवस्था हरिद्वार में नहीं है. बारिश होते ही पानी रास्ता तलाशता है और रास्ता नहीं मिलता तो घरों और दुकानों में घुस जाता है.

    आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता मदन कौशिक, हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से लेकर खुद सीएम हरीश रावत से जनता इस मुद्दे पर सवाल पूछती है तो जवाब देना मुश्किल होगा.

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे जनप्रतिनिधियों से बदहाल सड़कों का हिसाब मांगेंगे. खन्ना नगर निवासी प्रदीप यादव, हरेंद्र सैनी निवासी कनखन और ज्वालापुर के रहने वाले दिनेश का कहना है कि स्थानीय शासन, प्रशासन से उन्होंने इस समस्या की शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ. इनका कहना है कि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, जो भी वोट मांगने आएगा, उन्हें शहर की जलमग्न सड़कों की याद दिलाई जाएगी.

     

    Tags: Uttarakhand news

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