VIDEO: सीटी की आवाज़ से बढ़ता है जोश, भक्त के शरीर में आते हैं देवता

उत्तरकाशी में मनाया जाने वाला दो दिवसीय सेलकु मेला मंगलवार को संपन्न हो गया. इंसानों के देवताओं के साथ रिश्तों का गवाह यह मेले आज भी पांच गांव रैथल, बद्राणी, नटिन, क्यारक, भटवाड़ी में एकता का प्रतीक माना जाता है. राजा रजवाड़ों के समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार पंच मालगुज़ार इसका आयोजन करते हैं. टैक्स वसूली का काम बंद होने के बाद ये लोग मेलों, थौलों और धार्मिक कार्यक्रम को ही आयोजित करने का काम कर रहे हैं. ख़ास बात यह है कि यह मेला दुर्लभ प्रजाति के पुष्प के साथ मनाया जाता है. रैथल गांव में मां जगदम्बा मंदिर चौक पर पांचों गांवों की बहुओं, बेटियों और आमंत्रित अतिथियों की मौजूदगी में स्थानीय समेश्वर देवता की डोली के निर्देश पर देव पश्वा पर कंपन के साथ देव शक्ति अवतरित होती है. जोश दिलाने के लिए स्थानीय लोग सीटियां बजाते हैं जिसके साथ पश्वा पर कंपन बढ़ जाता है. समेश्वर मंदिर के पुजारी ने न्यूज़ 18 संवाददाता हरीश थपलियाल को मेले का महत्व बताया.

News18 Uttarakhand
Updated: September 11, 2018, 7:58 PM IST
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उत्तरकाशी में मनाया जाने वाला दो दिवसीय सेलकु मेला मंगलवार को संपन्न हो गया. इंसानों के देवताओं के साथ रिश्तों का गवाह यह मेले आज भी पांच गांव रैथल, बद्राणी, नटिन, क्यारक, भटवाड़ी में एकता का प्रतीक माना जाता है. राजा रजवाड़ों के समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार पंच मालगुज़ार इसका आयोजन करते हैं. टैक्स वसूली का काम बंद होने के बाद ये लोग मेलों, थौलों और धार्मिक कार्यक्रम को ही आयोजित करने का काम कर रहे हैं. ख़ास बात यह है कि यह मेला दुर्लभ प्रजाति के पुष्प के साथ मनाया जाता है. रैथल गांव में मां जगदम्बा मंदिर चौक पर पांचों गांवों की बहुओं, बेटियों और आमंत्रित अतिथियों की मौजूदगी में स्थानीय समेश्वर देवता की डोली के निर्देश पर देव पश्वा पर कंपन के साथ देव शक्ति अवतरित होती है. जोश दिलाने के लिए स्थानीय लोग सीटियां बजाते हैं जिसके साथ पश्वा पर कंपन बढ़ जाता है. समेश्वर मंदिर के पुजारी ने न्यूज़ 18 संवाददाता हरीश थपलियाल को मेले का महत्व बताया.
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