महिलाओं की अनूठी पहल ने बुझाई 78 गांवों की प्यास, PM मोदी ने भी की तारीफ

उत्तरकाशी जिले में जामक और जखोल गांव की महिलाओं ने सामुदायिक जल प्रबंधन से दोनों गांवों के करीब 78 परिवारों को पीने का पानी मुहैया कराया है.

News18 Uttarakhand
Updated: July 14, 2019, 7:48 AM IST
महिलाओं की अनूठी पहल ने बुझाई 78 गांवों की प्यास, PM मोदी ने भी की तारीफ
महिलाओं की अनूठी पहल ने बुझाई 78 गांवों की प्यास, PM मोदी ने भी की तारीफ
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Updated: July 14, 2019, 7:48 AM IST
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जामक और जखोल गांव की महिलाओं ने सामुदायिक जल प्रबंधन की अनूठी मिसाल पेश की है. महिलाओं की इस पहल से दोनों गांवों के करीब 78 परिवारों को पीने का पानी मिल रहा है. ये महिलाएं जल स्रोत का रिचार्ज बढ़ाने के लिए पिछले दो वर्षों से कैचमेंट एरिया में पौधरोपण भी कर रही हैं. आपको बता दें कि इन महिलाओं को पेयजल योजना तैयार करने के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने जरूरी सामान और तकनीकी ज्ञान मुहैया कराया है. महिलाओं के इन प्रयासों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी सराहा है.

गांव में भूकंप आने से 76 ग्रामीणों की मौत के साथ बढ़ गया था जल संकट



मालूम हो कि सन् 1991 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 15 किलोमीटर दूर जामक गांव चर्चा में आया था, तब गांव में 76 ग्रामीणों की मौत हो गई थी. साथ ही गांव में पानी का संकट भी बढ़ गया था. इसे देखते हुए पेयजल निगम ने गांव के लिए जामक गदेरे से पेयजल लाइन बिछाई, जो वर्ष 2006 के बाद हर बरसाती गदेरे में उफान आने के कारण क्षतिग्रस्त होती चली गई, जिससे ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ा. वहीं वर्ष 2016-17 में रिलायंस फाउंडेशन को ग्रामीणों की समस्याओं के बारे में पता किया.

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जुलाई 2017 में जामक सामुदायिक पेयजल योजना तैयार हुआ (सांकेतिक तस्वीर)


जुलाई 2017 में जामक सामुदायिक पेयजल योजना तैयार हुआ

तब महिलाओं ने फाउंडेशन के सामने जामक गांव से ढाई किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोत से पेयजल योजना बनाने का प्रस्ताव रखा. इसके बाद महिलाओं की योजना पर श्रमदान शुरू हुआ और जुलाई 2017 में जामक सामुदायिक पेयजल योजना तैयार हो गया. योजना को चलाने के लिए महिलाओं ने मां राजराजेश्वरी ग्राम कृषक समिति का गठन किया. समिति की अध्यक्ष अमरा देवी ने बताया कि इस योजना को तैयार करने में उन्हें 6 महीने का समय लगा. उन्होंने कहा कि गांव की हर महिला ने श्रमदान में हिस्सा लिया. यही वजह है कि आज गांव के 60 परिवारों के हर सदस्य को रोजाना 70 लीटर से ज्यादा पानी मिल रहा है.

हर परिवार हर माह में 30 रुपए शुल्क के रूप में जमा करता है
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हर परिवार हर माह में 30 रुपए शुल्क के रूप में जमा करता है (सांकेतिक तस्वीर)


अमरा देवी ने बताया कि इस योजना की मरम्मत के लिए उन्होंने 15 हजार रुपए की धनराशि समिति के खाते में जमा करवाई है. हर परिवार हर माह शुल्क के रूप में 30 रुपए जमा करता है. वहीं गांव की देवेंद्री देवी का कहना है कि घर में पर्याप्त पानी आने से वे घर के आस-पास ही सब्जियां उगा रही हैं. इसी क्रम में बीते वर्ष उन्होंने करीब 6 हजार रुपए का लहसुन और प्याज बेचा.

जखोल में भी महिलाओं ने 1 पहुंचाया पानी

इधर, जामक की ही तरह जखोल गांव में 50 परिवारों की महिलाओं ने भी रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से सामुदायिक पेयजल योजना बनाई. इस योजना से उन 18 परिवारों को पीने के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है, जो वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे थे. बता दें कि जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 50 किलोमीटर दूर जखोल गांव में यह सामुदायिक पेयजल योजना महिलाओं ने जनवरी 2019 में बनाई थी. योजना को चलाने के लिए महिलाओं ने मां दुर्गा ग्राम कृषक समिति का गठन किया है.

समिति की अध्यक्ष कुसुमलता रमोला ने कहा कि यह सब कुछ महिलाओं की मेहनत से संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि योजना की मरम्मत के लिए महिलाओं ने 10 हजार रुपए की राशि जमा की गई है.

वहीं रिलायंस फाउंडेशन के परियोजना निदेशक कमलेश गुरुरानी का कहना है कि योजनाओं पर स्वामित्व महिलाओं का है. पेयजल संकट से जूझ रहे पहाड़ में इससे बेहतर जल प्रबंधन कुछ और नहीं हो सकता. यह सामुदायिक भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण है.

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