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हमारे साथ जानवरों से भी बदतर व्‍यवहार किया गया : हरबंश सिंह बाली

हमारे साथ जानवरों से भी बदतर व्‍यवहार किया गया : हरबंश सिंह बाली

आजादी के बाद सन् 1947 में देश तीन हिस्सों में बंट गया, एक हिस्सा बना भारत, एक बना पाकिस्तान और एक बना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जिसे हम पीओके के नाम से भी जानते हैं. उन दिनों पीओके में रहने वाले हजारों परिवार के लोगों पर जो बीता वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. लेकिन उन पीड़ितों की आवाज जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम एक प्रयास जरूर कर रहे हैं.

आजादी के बाद सन् 1947 में देश तीन हिस्सों में बंट गया, एक हिस्सा बना भारत, एक बना पाकिस्तान और एक बना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जिसे हम पीओके के नाम से भी जानते हैं. उन दिनों पीओके में रहने वाले हजारों परिवार के लोगों पर जो बीता वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. लेकिन उन पीड़ितों की आवाज जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम एक प्रयास जरूर कर रहे हैं.

आजादी के बाद सन् 1947 में देश तीन हिस्सों में बंट गया, एक हिस्सा बना भारत, एक बना पाकिस्तान और एक बना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जिसे हम पीओके के नाम से भी जानते हैं. उन दिनों पीओके में रहने वाले हजारों परिवार के लोगों पर जो बीता वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. लेकिन उन पीड़ितों की आवाज जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम एक प्रयास जरूर कर रहे हैं.

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आजादी के बाद सन् 1947 में देश तीन हिस्सों में बंट गया, एक हिस्सा बना भारत, एक बना पाकिस्तान और एक बना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जिसे हम पीओके के नाम से भी जानते हैं. उन दिनों पीओके में रहने वाले हजारों परिवार के लोगों पर जो बीता वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. लेकिन उन पीड़ितों की आवाज जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम एक प्रयास जरूर कर रहे हैं.

आजादी के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद जिले में रह रहे हजारों परिवारों पर तालिबान ने पाकिस्तान की मदद से हमला कर दिया, जिसमें न सिर्फ उन बेगुनाहों का कत्लेआम किया गया बल्कि उनकी बहु बेटियों की इज्जत भी तार-तार हुई. हालात इस कदर बिगड़े की परिवार के कई लोगों ने अपने बच्चों को खुद ही मार दिया क्योंकि वो नही चाहते थे कि कोई भी तालिबानी या पाकिस्तानी उनके बच्चों को छू भी सके.

ऑल सिख मुजफ्फराबाद के अध्यक्ष हरबंश सिंह बाली ने बताया कि घर के घर उजड़ गए हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसा कोई जानवर के साथ भी नही करता है. ऐसे ही सिखों के पांच सौ परिवार आकर बसे देहरादून के विकासनगर में जिन्हें हर सरकार ने राहत देने की बात तो जरूर की पर इन्हें आज तक कोई राहत नहीं मिली.

ये दोबारा कश्मीर वापस जाना चाहते हैं और वहीं बसना चाहते हैं. बशर्ते केन्द्र सरकार इनकी मदद करे क्योंकि सच्चई तो यही है कि इन लोगों के पास रहने के लिए एक अदद आशियाना तक नहीं है.

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