शिमला में जल संकट : हाई लेवल कमेटी गठित, सरकार ने की ये व्यवस्थाएं

पानी के लिए कतारों में लगे लोग.

पानी के लिए कतारों में लगे लोग.

आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त 22 एमएलडी पानी मिल रहा है, हालांकि शहर को पचास एलडी पानी की जरूरत है. लेकिन पानी का सही तरीके से वितरण नहीं होने की वजह से भी एक बड़ी दिक्कत पेश आ रही है. जबकि 22 एमएलडी पानी में भी लोगों की प्यास बुझाई जा सकती थी. सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर पानी को पी कौन रहा है?

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गहराए जल संकट पर अब जयराम सरकार संजीदा हो गई है. सोमवार को सीएम ने हाई लेवल बैठक बुलाकर जलापूर्ति की समीक्षा की.

शिमला शहर में जलापूर्ति के मुददे की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्ष में एक हाई लेवल कमेटी भी बनाई गई है. राजधानी शिमला में जल संकट ने प्राकृतिक आपदा का रूप धारण कर लिया है. कई क्षेत्रों से 6 से 7 सात दिनों से पानी नहीं आ रहा है.

जल संकट को लेकर आज सीएम जयराम ठाकुर ने हाई लेवल बैठक बुलाई, जिसमें जलापूर्ति के मुददे को लेकर मंथन हुआ. राजधानी में गहराए पेयजल संकट से निपटने के लिए मुख्य सचिव विनीत चौधरी की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी भी बनाई गई, जिसमें एसीएस शहरी, विशेष सचिव राजस्व, नगर निगम आयुक्त, डीसी शिमला, लोक निर्माण और आईपीएच के प्रमुख अभियंता, सचिव आईपीएच भी सदस्य होंगे. समिति मंगलवार को सीएम जयराम ठाकुर को अपनी रिपोर्ट भी देगी.



पानी को लेकर ये व्यवस्थाएं की गईं
राजधानी में गहराए जल संकट को देखते हुए पेयजल आपूर्ति के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. शिमला शहर में पानी की आपूर्ति के लिए 17 जल टेंकर्ज, 15 यूटिलिटीज और चार टिप्परों की सेवाएं ली जा रही हैं. इसके अतिरिक्त शहर के लोगों को पर्याप्त जल उपलब्ध करवाने के लिए सिरमौर से तीन टेंकर्ज और बिलासपुर से भी तीन टेंकर्ज मंगवाए गए हैं.

जयराम ठाकुर ने अधिकारियों को टेंकरों के माध्यम से जल के समान वितरण के लिए विश्वसनीय तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को पीने का पानी प्राप्त करने में किसी प्रकार का असुविधा से न जूझना पड़े.

शहर को मिल रहा है इतना पानी

आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त 22 एमएलडी पानी मिल रहा है, हालांकि शहर को पचास एलडी पानी की जरूरत है. लेकिन पानी का सही तरीके से वितरण नहीं होने की वजह से भी एक बड़ी दिक्कत पेश आ रही है. जबकि 22 एमएलडी पानी में भी लोगों की प्यास बुझाई जा सकती थी. सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर पानी को पी कौन रहा है?

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