ग्लोबल शटडाउन के चलते 1.5 अरब छात्रों ने छोड़ा स्कूल, 11 करोड़ छात्राएं शामिल

ग्लोबल शटडाउन के चलते 1.5 अरब छात्रों ने छोड़ा स्कूल, 11 करोड़ छात्राएं शामिल
वायरस के चलते स्कूल की पढ़ाई से करोड़ों छात्र दूर हो जाते हैं (file photo)

ग्लोबल शटडाउन (Global Shutdown) के कारण दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में मार्च में लगभग 1.5 अरब छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं, जिसमें 11 करोड़ से ज्यादा लड़कियां शामिल हैं.

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हवे. अफ्रीका की मारी कालोकोह उस समय 13 साल की थी जब इबोला वायरस ने उसके देश सिएरा लियोन पर अटैक किया. इस वायरस की मार से बचने के लिए वहां के स्कूलों को बंद कर दिया गया था. यह बंद लगभग नौ महीने तक चला लेकिन मारी कालोकोह वर्षों तक कक्षा में वापस नहीं लौट पाई. अफ्रीका में इबोला वायरस के हमले के बाद अब कोरोना वायरस ने हमला बोल दिया है. इसके कारण बच्चों के स्कूल बंद कर दिए गए हैं जिसका बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है.

 महिलाओं की आर्थिक संभावनाओं को किया कम

पश्चिम अफ्रीका में पिछली महामारी ने लड़कों की तुलना में ज्यादा लड़कियों को अपनी पढ़ाई रोकने के लिए मजबूर कर दिया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि 2014 से 2016 तक के समय में इबोला महामारी ने युवतियों और महिलाओं की एक पूरी पीढ़ी के लिए आर्थिक संभावनाओं को कम कर दिया था. शिक्षकों को डर है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूल बीच में ही छोड़ने वाले बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ा सकती है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अनुसार, ग्लोबल शटडाउन के कारण दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में मार्च में लगभग 1.5 अरब छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं, जिसमें 11 करोड़ से ज्यादा लड़कियां शामिल हैं.



15 वर्ष के बाद इतने लोग पढ़ाई रख पाते हैं जारी
सिएरा लियोन के इबोला संकट के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली मलाला फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार 1 करोड़ माध्यमिक-स्कूली उम्र की लड़कियों की शिक्षा के समाप्त होने का अनुमान है. नाइजीरिया और लाइबेरिया में लड़कियों ने घर से दूर होने और लॉकडाउन से वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि वे आजकल पढ़ाई में पिछड़ने या स्कूल छोड़ने के बारे में चिंतित रहती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक परंपरागत रूढ़िवादी देशों में माता-पिता अपने बेटों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं. पश्चिम और मध्य अफ्रीका में, 15 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में 73 प्रतिशत लड़के पढ़ाई जारी रख पाते हैं जबकि लड़कियों के मामले में केवल 60 प्रतिशत लड़कियाँ ही अपनी पढ़ाई जारी रख पाती हैं.

वायरस के चलते ये दिक्कतें भी बढ़ीं

लड़कियों के संदर्भ में दूरस्थ शिक्षा बोझ है क्योंकि अधिकतर परिवार लड़कियों से खाना पकाने, सफाई और बच्चों की देखभाल करने की उम्मीद करते हैं. यह समय यौन शोषण, गर्भावस्था और बाल विवाह के लिहाज से भी अधिक असुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा, लड़कियों के लिए विशेष रूप से बोझ है, जिन्हें अक्सर अधिक खाना पकाने, सफाई और बच्चों की देखभाल करने की उम्मीद होती है. वे असुरक्षित रूप से यौन शोषण, गर्भावस्था और बाल विवाह के प्रति अधिक असुरक्षित हैं. मलाला फंड की रिपोर्ट के मुताबिक लाइबेरिया में इबोला फैलने से पहले 8 प्रतिशत लड़कियां ग्रेड स्कूल नहीं जाती थीं और इसके बाद यह आंकड़ा लगभग तीन गुना ज्यादा हो गया.

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