भारतीयों को टायफॉइड से 'बचाने' 100 अंग्रेजों ने निगल लिया जिंदा बैक्टीरिया

यूनाइडेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड के रहने वाले 100 लोगों ने जिंदा टायफॉइड बैक्टीरिया निगल लिया ताकि भारत के लिए तैयार हुए टाइफॉइड वैक्सीन के लिए रास्ता साफ हो सके.

News18Hindi
Updated: January 14, 2018, 9:16 PM IST
भारतीयों को टायफॉइड से 'बचाने' 100 अंग्रेजों ने निगल लिया जिंदा बैक्टीरिया
प्रतीकात्मक फोटो
News18Hindi
Updated: January 14, 2018, 9:16 PM IST
यूनाइडेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड के रहने वाले 100 लोगों ने जिंदा टायफॉइड बैक्टीरिया निगल लिया ताकि भारत के लिए तैयार हुए टाइफॉइड वैक्सीन के लिए रास्ता साफ हो सके. इस वैक्सीन को हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी ने तैयार किया है. इसे दिसंबर 2017 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने योग्य घोषित कर दिया था और अब इंटरनेशनल वैक्सीन अलायंस GAVI इसका परीक्षण कर रही है.

यह वैक्सीन छह महीने के बच्चे को भी लगाया जा सकता है. इससे पहले टायफॉइड के जितने भी वैक्सीन तैयार किए गए हैं उन्हें 2 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को ही लगाया जा सकता है. इस वैक्सीन की स्ट्रेंथ को परखने के लिए भारत बायोटेक ने भारत में इसका क्लिनिकल टेस्ट करने के साथ ऑक्सफॉर्म में ह्यूमन चैलेंज स्टडी भी की. भारत बायोटेक कंपनी के फाउंडर और एमडी डॉ कृष्णा एला के मुताबिक किसी भी भारतीय कंपनी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है.

GAVI के मुताबिक WHO ने इस दवाई को एक्वायर करने के लिए 85 मिलियन डॉलर की कीमत लगाई है. एला का कहना है कि यह कीमत अभी और बढ़ सकती है.

टायफॉइड सलमोनेला सेरोवर टाइफी बैक्टीरिया से होता है और मुख्यतः खराब पानी से फैलात है. कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है और कई में लंबे समय तक इंटेस्टाइन से जुड़ी समस्या आती है. इस वैक्सीन को बनाने की प्रक्रिया साल 2001 में शुरू हुई. यह वैक्सीन 6 महीने से 65 की उम्र तक किसी भी व्यक्ति को टायफॉइड से बचा सकता है.

ऐसे काम करेगा वैक्सीन
एला बताते हैं कि यह बैक्टीरिया भारी मात्रा में शुगर और प्रोटीन बनाता है. पहले के वैक्सीन शुगर बेस्ड थे जिसे बच्चे का शरीर फॉरेन ऑब्जेक्ट के रूप में पहचान नहीं पाता था जिसके चलते एंटीबॉडी का फॉर्मेशन नहीं होता था. नया वैक्सीन शुगर और प्रोटीन को क्रॉसलिंक करेगा और बच्चे का शरीर एंटीबॉडी तैयार कर लेगा जो उसे जिंदगीभर टाइफॉइड से बचाएगा.

ऐसे हुई इस वैक्सीन की टेस्टिंग
इस वैक्सीन को भारत में पहले वयस्कों पर, फिर किशोरों पर, फिर पांच साल तक के बच्चों पर और आखिर में 10,000 बच्चों पर टेस्ट किया गया. इसके बाद ऑक्सफॉर्ड में वॉलंटियर्स को एक गिलास पानी में बड़ी मात्रा में जिंदा बैक्टीरिया पिलाया गया. इनमें से कुछ को नया वैक्सीन, कुछ को पुरान वैक्सीन और कुछ को एक अन्य तरह की दवा दी गई. इस ह्यूमन चैलेंज को बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स के फाउंडेशन की तरफ से फंड किया गया था. यह चैलेंज इसीलिए पूरा करवाया गया ताकि इस वैक्सीन को लेकर एला का हर संदेह साफ हो सके. एला ने कहा कि कुछ कंपनियों के चलते वैश्विक स्तर भारत के आंकड़ों पर विश्वास नहीं किया जाता.

(news18.com के लिए आराधना वल)
News18 Hindi पर Jharkhand Board Result और Rajasthan Board Result की ताज़ा खबरे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें .
IBN Khabar, IBN7 और ETV News अब है News18 Hindi. सबसे सटीक और सबसे तेज़ Hindi News अपडेट्स. World News in Hindi यहां देखें.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर