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    कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021 तक 15 करोड़ अति गरीब हो जाएंगे: विश्व बैंक

    दुनिया में वर्ष 2021 तक 15 करोड़ लोग गरीबी के दलदल में फंस जाएंगे.
    दुनिया में वर्ष 2021 तक 15 करोड़ लोग गरीबी के दलदल में फंस जाएंगे.

    विश्व बैंक (World Bank) ने बुधवार को यह चेतावनी जारी करके कहा है कि वर्ष 2021 तक करीब 15 करोड़ गरीब (Extremly Poor) हो जाएंगे. इस हालत के पैदा होने के पीछे कोरोनोवायरस (Coronavirus) को जिम्मेदार ठहराया गया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 7, 2020, 4:29 PM IST
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    वाशिंगटन. विश्व बैंक (World Bank) ने बुधवार को यह चेतावनी जारी करके कहा है कि वर्ष 2021 तक करीब 15 करोड़ गरीब (Extremly Poor) हो जाएंगे. इस हालत के पैदा होने के पीछे कोरोनोवायरस (Coronavirus) को जिम्मेदार ठहराया गया है. विश्व बैंक का कहना है कि देश को इस हालात के पैदा होने के बाद 'अलग अर्थव्यवस्था' बनाने की दिशा में पहल करना होगा. संगठन ने कहा कि कोविड महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को पूंजी, श्रम, कौशल और नए बिजनेस और सेक्टर के लिए अलग पहल करना पड़ेगा.

    अगर दुनिया में कोरोना महामारी न फैली होती तो...

    वाशिंगटन स्थित ग्लोबल लैंडर के अनुसार कोविड-19 महामारी 88 मिलियन से 115 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी में धकेल देगी जिससे यह आंकड़ा 2021 तक कुल 150 मिलियन तक पहुँच जाएगा. यह सब आर्थिक दबावों की गंभीरता पर भी निर्भर करता है. दी बाइएनियल पावर्टी एंड शेयर्ड प्रोस्पेरिटी रिपोर्ट (the biennial Poverty and Shared Prosperity Report) के अनुसार 2017 में 9.2 प्रतिशत की दर से रिग्रेशन दिखा था. अगर दुनिया में कोरोना महामारी न फैली होती तो 2020 में में गरीबी दर घटकर 7.9 फीसदी रहने की उम्मीद थी.



    पोस्ट कोविड अर्थव्यवस्था तैयार करना होगा: डेविड मलपास
    विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मलपास ने कहा कि दुनिया की 1.4 प्रतिशत आबादी का अधिक  गरीब होने का कारण महामारी और वैश्विक मंदी है. आर्थिक विकास और गरीबी में कमी लाने के लिए इस कुचक्र को उलटना होगा और उसके लिए देशों को पोस्ट-कोविड अर्थव्यवस्था की तैयारी करनी होगी जिसमें नए व्यवसायों और क्षेत्रों में कदम रखने के लिए पूंजी, श्रम, कौशल की अनुमति देनी होगी. अब यह माना जा रहा है कि ये नए गरीब उन देशों में होंगे जिनमें पहले से ही उच्च गरीबी दर है.

    2030 तक वैश्विक गरीबी दर लगभग सात प्रतिशत हो सकती है: विश्व बैंक

    विश्व बैंक ने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रसार ने हितों के संघर्ष के साथ जलवायु परिवर्तन के दबाव ने 2030 तक गरीबी खत्म करने के लक्ष्य को बिना किसी तीव्र महत्वपूर्ण और पर्याप्त पॉलिसी एक्शन के पहुँच से दूर कर दिया है. विश्व बैंक ने साथ में यह भी कहा कि 2030 तक वैश्विक गरीबी दर लगभग सात प्रतिशत हो सकती है.

    'भारत के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है'

    विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत में हालिया आंकड़ों की कमी के कारण वैश्विक गरीबी पर नजर बनाये रखने में दिक्क्तें आ रही हैं. भारत जो अत्यधिक गरीब लोगों की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक हैं, में हालिया आंकड़ों की अनुपस्थिति के कारण वैश्विक गरीबी के मौजूदा अनुमानों के बारे में पर्याप्त अनिश्चितता पैदा हो सकती है.

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    जॉन्स हॉपकिन्स कोरोनावायरस रिसोर्स सेंटर के अनुसार संक्रमण ने 35 मिलियन से अधिक लोगों को अपनी चपेट में है और दुनिया भर में 1 मिलियन से अधिक लोग मारे गए. अमेरिका कोरोना के 7.5 मिलियन से अधिक मामलों और 2,10,000 से अधिक मौतों के साथ कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश है. कोविड-19, जो पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर में उत्पन्न हुआ था, ने भी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ-साथ विश्व अर्थव्यवस्था को भी यह कहने के लिए मजबूर कर दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक खतरनाक आर्थिक मंदी भुगतने के लिए बाध्य है. इस समस्या को दूर क
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