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अमेरिकी डॉक्टरों का दावा,HIV पीड़ित बच्ची को किया ठीक

अमेरिकी डॉक्टरों का दावा,HIV पीड़ित बच्ची को किया ठीक

डॉक्टरों का कहना है कि इलाज तभी संभव है, जब शरीर में विषाणु की मात्रा बेहद कम हो। लेकिन डॉक्टरों का ये भी कहना है कि बच्ची पूरी जिंदगी स्वस्थ्य रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है।

डॉक्टरों का कहना है कि इलाज तभी संभव है, जब शरीर में विषाणु की मात्रा बेहद कम हो। लेकिन डॉक्टरों का ये भी कहना है कि बच्ची पूरी जिंदगी स्वस्थ्य रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है।

डॉक्टरों का कहना है कि इलाज तभी संभव है, जब शरीर में विषाणु की मात्रा बेहद कम हो। लेकिन डॉक्टरों का ये भी कहना है कि बच्ची पूरी जिंदगी स्वस्थ्य रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है।

    नई दिल्ली। तमाम तकनीकी और वैज्ञानिक विकास के बावजूद एड्स का कारगर इलाज नहीं मिल सका है। सुरक्षा और सावधानी को ही इस जानलेवा बीमारी का एकमात्र इलाज माना जाता है। मगर पहली बार अमेरिका में दावा किया गया है कि एचआईवी संक्रमित एक बच्ची को पूरी तरह ठीक कर लिया गया है।

    अमेरिका के मिसिसिपी राज्य में एचआईवी वायरस के साथ पैदा हुई बच्ची के सफल इलाज का डॉक्टरों ने दावा किया है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची को एक साल से कोई दवा नहीं दी गई फिर भी उसे कोई संक्रमण नहीं हुआ है। उनका मानना है कि जन्म के 30 घंटे के भीतर ही उसका इलाज शुरू कर देने से बीमारी पर काबू पाने में सफलता मिली। इलाज करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची ढाई साल की हो चुकी है और बिल्कुल स्वस्थ है। बच्ची की पहचान गुप्त रखी गई है।

    कैसे हुआ इलाज
    मिसीसिपी के एक गांव में जन्मी इस बच्ची की मां एचआईवी संक्रमित थी। आमतौर पर बच्चे के जन्म से पहले ही संक्रमित मां का इलाज शुरू कर दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ और डॉक्टर पूरी तरह से आश्वस्त थे कि होने वाला बच्चा भी एचआइवी संक्रमित होगा।

    बच्ची के जन्म लेते ही उसे जैक्सन के यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी मेडिकल सेंटर में भर्ती करा दिया गया। एचआईवी विशेषज्ञ डॉक्टर हानाह गे के नेतृत्व में बच्ची का इलाज संक्रमण की पुष्टि से पहले ही शुरू कर दिया गया। डॉक्टरों को पहले ही अहसास हो गया कि बच्ची की जान को खतरा है और इसे उच्च-स्तरीय इलाज की जरूरत है।
    उसे एचआइवी के खिलाफ लड़ने वाली तीन विशिष्ट दवाओं का मिश्रण दिया गया। इस मिश्रण से एचआईवी के वायरस को शरीर में घर करने से पहले ही हटा दिया गया। हालांकि यह उपचार वयस्कों या बड़े बच्चों में कारगर नहीं होगा। पांच महीने के लगातार इलाज के बाद डॉक्टरों की खुशी का ठिकाना नहीं जब एचआईवी टेस्ट नेगेटिव आया। बच्ची ढाई साल की हो चुकी है और वो पूरी तरह तंदुरुस्त है।

    डॉक्टरों का कहना है कि इलाज तभी संभव है, जब शरीर में विषाणु की मात्रा बेहद कम हो। लेकिन डॉक्टरों का ये भी कहना है कि बच्ची पूरी जिंदगी स्वस्थ्य रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। हालांकि उच्च स्तरीय टेस्ट ये बताते हैं एचआईवी वायरस जीन के नगण्य अंश बच्ची के शरीर में मौजूद हैं। एचआईवी के ज्यादातर मामलों में दवा बंद करते ही वायरस के सेल दोबारा शरीर में संक्रमण पैदा करने लगते हैं। इसीलिए किसी मरीज का पूरी तरह ठीक होना अजूबा सा है।

    शोधकर्ताओं के मुताबिक बच्ची के इलाज से इस अवधारणा को बल मिलता है कि नवजात बच्चों में एचआइवी संक्रमण का इलाज संभव है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर बच्ची का स्वास्थ्य आने वाले सालों में भी अच्छा रहा तो ये दुनिया का दूसरा मामला होगा जिसमें एचआईवी पीड़ित का उपाचर किया जा सका है। इससे पहले 2007 में टिमोथी रे ब्राउन का भी सफल इलाज किया गया था।
    ब्राउन को ल्यूकेमिया हो गया था, जिसके इलाज के लिए उनकी स्टेम सेल प्रत्यारोपित की गई। इसके लिए ऐसा डोनर खोजा गया था जिसके जीन एचआइवी प्रतिरोधी थे। इनकी मदद से ब्राउन के पूरे शरीर के प्रतिरोधी तंत्र को बदला गया। इसके बाद वह पूरी तरह ठीक हो गए। 2011 में करीब 3 लाख बच्चे एचआईवी संक्रमित पैदा हुए थे। इसलिए अगर अमेरिकी डॉक्टरों के दावे सही साबित हुए तो ये इलाज नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित होगा।

    Tags: HIV

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