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कंधार कांड: जब प्लेन सहित अगवा भारतीयों को छुड़ाने के लिए देने पड़े थे तीन खूंखार आतंकी

कंधार कांड: जब प्लेन सहित अगवा भारतीयों को छुड़ाने के लिए देने पड़े थे तीन खूंखार आतंकी

IC841 को 1999 में अगवा कर लिया गया था.

IC841 को 1999 में अगवा कर लिया गया था.

तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह खुद तीन आतंकियों अपने साथ कंधार ले गए थे.

    उस घटना को अब 19 साल गुजर चुके हैं. 24 दिसंबर, 1999 की तारीख थी, दिन शुक्रवार. क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले का दिन. घड़ी में शाम के साढ़े चार बजने वाले थे. भारत सहित पूरी दुनिया में क्रिसमस और मिलेनियम इयर सेलिब्रेशन का जश्न शुरू हो चुका था. इसी दिन दो घंटे देरी के बाद शाम को साढ़े चार बजे काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जो फ्लाइट दिल्ली के लिए उड़ी, उसे भारत के क्षेत्र में घुसते ही पांच बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया. इंडियन एयरलाइंस की इस फ्लाइट का नंबर था, IC841.

    प्लेन को हाईजैक करने वाले आतंकियों ने बंदूक की नोक पर पायलट से प्लेन को लाहौर ले जाने को कहा. लेकिन पायलट ने बताया कि प्लेन में इतना तेल नहीं कि उसे लाहौर ले जाया जा सके. ऐसे में 6 बजे प्लेन अमृतसर में लैंड कराया गया लेकिन फिर लाहौर के लिए रवाना हो गया.

    पाकिस्तान सरकार की इजाजत के बिना ही इस विमान ने रात आठ बजकर सात मिनट पर लाहौर में लैंड किया. लाहौर से यह विमान फिर दुबई के लिए चला गया. विमान रात के पौने दो बजे दुबई पहुंचा. जहां ईंधन के बदले आतंकियों ने 27 लोगों को विमान से उतारने दिया गया, इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं-बच्चे थे. इसके बाद फिर से विमान को काबुल की ओर रवाना किया गया. लेकिन जब पायलट काबुल एयरपोर्ट से बातचीत की तो पता चला काबुल का रनवे ऐसे प्लेन लैंड करा सकने में सक्षम नहीं था. जिसके बाद प्लेन को कंधार ले जाया गया. कंधार, अफगानिस्तान का एक इलाका है, जहां उस वक्त तालिबान की हुकूमत थी.

    8 दिनों तक बंधक रहने के दौरान एक यात्री को खोनी पड़ी जान
    जिस वक्त विमान का अपहरण हुआ उस पर कुल 179 यात्री और 11 क्रू मेंबर सवार थे. विमान हाईजैक करवाने वाले आतंकियों ने खौफ पैदा करने के लिए हाईजैकिंग के कुछ ही घंटों में एक यात्री रूपन कात्याल को मार दिया था. 25 साल के रूपन कात्याल की हाल ही में शादी हुई थी और वे अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर गए थे. आतंकियों ने उन्हें चाकुओं से गोदकर मार दिया था.



    लेकिन जैसे-जैसे हाईजैकिंग का वक्त बढ़ता जा रहा था, वैसे-वैसे सरकार और आतंकियों की मुश्किलों भी बढ़ती जा रही थीं. उधर बंधक बनाए गए लोगों के परिजन भी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. ऐसे में आतंकियों ने अपहर्त यात्रियों को छोड़ने के लिए भारत सरकार के सामने अपने 36 आतंकी साथियों को छोड़ने और 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की फिरौती की पेशकश की.

    आतंकी इसके अलावा एक कश्मीरी अलगाववादी के शव को सौंपे जाने की मांग भी कर रहे थे. लेकिन तालिबान की गुजारिश के बाद उन्होंने पैसे और शक की मांग छोड़ दी. लेकिन अपनी बाकी मांगों पर अड़े रहे.

    हालांकि विमान में ज़्यादातर यात्री भारतीय ही थे लेकिन इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, इटली, जापान, स्पेन और अमरीका के नागरिक भी इस फ़्लाइट से सफ़र कर रहे थे. तत्कालीन एनडीए सरकार को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए तीन चरमपंथियों को कंधार ले जाकर रिहा करना पड़ा था.

    विदेशी मंत्री खुद आतंकियों को लेकर गए कंधार
    31 दिसंबर को सरकार और अपहरणकर्ताओं के बीच समझौते के बाद दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर अगवा रखे गए सभी 155 बंधकों को रिहा कर दिया गया. ये ड्रामा उस वक्त ख़त्म हुआ जब वाजपेयी सरकार भारतीय जेलों में बंद कुछ आतंकियों को रिहा करने के लिए तैयार हो गई.

    तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह ख़ुद तीन आतंकियों को अपने साथ कंधार ले गए थे. छोड़े गए आतंकियों में जैश-ए -मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद शामिल थे.

    भारत सरकार और आतंकियों के बीच समझौता होते ही तालिबान सरकार ने उन्हें 10 घंटे के भीतर अफगानिस्तान छोड़ने का अल्टीमेटम दिया था. शर्तों पर सहमति बनते ही आतंकी हथियारों के साथ विमान से उतरे और एयरपोर्ट पर इंतजार कर रही गाड़ियों में बैठ तुरंत रवाना हो गए.



    सरकार ने तीन बड़े आतंकियों को छोड़ने के बाद भी खुद की कामयाबी बताया
    कहा जाता है आतंकियों ने एक तालिबानी अधिकारी को भी बंधक बना लिया था. वहीं लोग कहते हैं आतंकियों ने इन 8 दिनों में अपने भी एक साथी को मार दिया था. लेकिन इसकी पुष्टि दूसरे तरीकों से नहीं की जा सकी है.

    ऐसे में ठीक आठ दिन बाद साल के आखिरी दिन 31 दिसंबर को सरकार ने समझौते की घोषणा की और नए साल की पूर्व संध्या पर देश को बताया कि उनकी सरकार अपहरणकर्ताओं की मांगों को काफी हद तक कम करने में कामयाब रही.

    यह भी पढ़ें: संजय गांधी की खोज थे सज्जन कुमार, दिल्ली के 2 मुख्यमंत्रियों को दी थी करारी मात

    Tags: Afghanistan, BJP, Dubai, Happy new year, Jaswant singh, Kabul, Merry Christmas, NDA, Tehrik e taliban

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