चीन नरसंहार की 30वीं बरसी: ड्रैगन ने दिखाई आंख, कहा- जो किया सही किया

थियानमेन चौक कार्यकर्ता कहते हैं कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शासनकाल में चीन दमन की उस स्थिति में पहुंच गया है जहां वह माओ के शासन के वक्त था. अपने आलोचकों का मुंह बंद करने में पार्टी की क्षमता भी बढ़ गई है.

News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 11:52 AM IST
चीन नरसंहार की 30वीं बरसी: ड्रैगन ने दिखाई आंख, कहा- जो किया सही किया
थियानमेन चौक कार्यकर्ता कहते हैं कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शासनकाल में चीन दमन की उस स्थिति में पहुंच गया है जहां वह माओ के शासन के वक्त था. अपने आलोचकों का मुंह बंद करने में पार्टी की क्षमता भी बढ़ गई है.
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Updated: June 3, 2019, 11:52 AM IST
थियानमेन चौक नरसंहार की 30वीं बरसी मनाने के लिए दर्जनों कार्यकर्ता अमेरिका में चीनी दूतावास के सामने शनिवार को एकत्रित हुए. चीन के राजनीतिक असंतुष्टों सहित करीब 50 कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर एवं बैटरी से जलने वाली मोमबत्तियां लेकर चीन में लोकतंत्र आने की उम्मीद जताई.

ओवरसीज चाइनीज डेमोक्रेसी कोअलिशन के प्रमुख वेई जिंगशेंग ने कहा, “मेरा मानना है कि विश्वभर के लोग वामपंथी शासन के प्रति अधिक से अधिक असहिष्णु हो रहे हैं. और मुझे लगता है कि अब लोग महसूस करने लगे हैं कि वे अब इस शासन को और नहीं सह सकते.”



चीन की राजधानी बीजिंग में चार जून 1989 को लोकतंत्र की मांग को लेकर थियानमेन चौक पर एकत्र हुए छात्रों और कार्यकर्ताओं पर चीनी सेना ने भीषण बल प्रयोग किया था और आंदोलन को कुचलने के लिए टैंक तक उतार दिए गए थे. इस सैन्य कार्रवाई में अनेक लोग मारे गए थे.

थियानमेन कार्रवाई ‘सही’ नीति : चीनी रक्षा मंत्री

चीन के रक्षा मंत्री ने थियानमेन चौक पर प्रदर्शनकारियों पर 1989 में की गई कार्रवाई को रविवार को सही नीति करार दिया. जनरल वेई फेंगहे ने सिंगापुर में क्षेत्रीय सुरक्षा के एक फोरम से कहा, “वह घटना एक राजनीतिक अस्थिरता थी और केंद्र सरकार ने संकट को रोकने के लिए कदम उठाए जो एक सही नीति थी.”

दुनियाभर के साथी रक्षा मंत्रियों, सेना के शीर्ष अधिकारियों ओर शिक्षाविदों से बात करते हुए वेई ने सवाल किया कि क्यों लोग अब भी कहते हैं कि चीन, “ने घटना को सही तरीके से नहीं संभाला.” उन्होंने कहा, “इन 30 साल में साबित हुआ है कि चीन में कई बड़े बदलाव हुए हैं.”

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई की वजह से ही “चीन में स्थिरता आई और विकास हुआ.” बीजिंग 30 साल पहले छात्रों द्वारा किए विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र था जहां सैकड़ों या संभवत: 1,000 से ज्यादा लोग चार जून, 1989 को थियानमेन चौक पर सैनिकों के हाथों मारे गए थे.

चीन के लिए अब आशा करने की कोई वजह नहीं है : थियानमेन चौक कार्यकर्ता
थियानमेन चौक पर 30 साल पहले टैंकों और गोलियों की मार झेलकर लोकतंत्र के पक्ष में प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को अपना सपना अब दूर की कौड़ी नजर आ रहा है. थियानमेन चौक पर हुए प्रदर्शन के बाद चीन छोड़कर अन्य देशों में रहने को मजबूर इन प्रदर्शनकारियों को लगता है कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और लोकतंत्र से विपरीत दिशा में जा रहा है.

अमेरिका में रहने वाले च्यो फेंसोउ वैसे तो हमेशा आशवादी रहते हैं लेकिन पांच साल पहले जब वह, थियानमेन चौक पर हुई घटना की 75वीं बरसी के दौरान 72 घंटे के ट्रांजिट वीजा पर चीन पहुंचे तो उनका दिल टूट गया. उनका कहना है, थियानमेन चौक पर जो हुआ, आज कोई वैसा करने की सोच भी नहीं सकता.



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वह कहते हैं कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शासनकाल में चीन दमन की उस स्थिति में पहुंच गया है जहां वह माओ के शासन के वक्त था. सुरक्षा बहुत कड़ी है, उसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग हो रहा है और बिना किसी चुनौती के अपने आलोचकों का मुंह बंद करने में पार्टी की क्षमता भी बढ़ गई है.

थियानमेन चौक पर प्रदर्शन की घटना के बाद चीन की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में पांचवे नंबर पर रहे च्यो कहते हैं, ‘‘जो हो रहा है, अगर आप उसे देख रहे हैं तो अब चीन के लिए आशावादी होने की कोई वजह नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालात लगातार खराब हो रहे हैं. जो बात एक साल पहले तक अकल्पनीय थी, वह आज वास्तविकता है.’’

बीजिंग की सड़कों पर 1989 के वसंत के दौरान आंदोलन करने वाले ये लोग अब उम्र के 50वें पड़ाव में पहुंच गए हैं और उनका मानना है कि बीती बातों को सिलसिलेवार याद रख पाना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा. (पीटीआई इनपुट के साथ)

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