अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहा श्रीलंकाः पिल्लई

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लई ने श्रीलंका सरकार पर निशाना साधते हुए आज कहा कि गृहयुद्ध समाप्त होने के चार साल बाद भी लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हुआ है।

वार्ता
Updated: August 31, 2013, 12:46 PM IST
अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहा श्रीलंकाः पिल्लई
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लई ने श्रीलंका सरकार पर निशाना साधते हुए आज कहा कि गृहयुद्ध समाप्त होने के चार साल बाद भी लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हुआ है।
वार्ता
Updated: August 31, 2013, 12:46 PM IST
कोलंबो। संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लई ने श्रीलंका सरकार पर निशाना साधते हुए आज कहा कि गृहयुद्ध समाप्त होने के चार साल बाद भी लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हुआ है। यह इस बात के संकेत हैं कि देश अधिनायकवादी दिशा की ओर बढ़ रहा है। पिल्लई ने कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि युद्ध समाप्त हो गया है लेकिन लोगों की मुसीबतें नहीं।

पिल्लई श्रीलंका सरकार और तमिलों के बीच 26 साल तक चले युद्ध के बाद विकास कार्यों का मूल्यांकन करने के मिशन के तहत कोलंबो पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से चिंतित हूं कि श्रीलंका को युद्ध की समाप्ति के बाद एक प्रगतिशील देश बनने का अवसर दिए जाने के बावजूद यहां ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह देश अधिनायकवादी दिशा की ओर बढ़ रहा है।

पिल्लई ने युद्ध प्रभावित जोन जाफना, किलिनोच्ची मुल्लैतिवु और त्रिकोमाली का दौरा किया और कोलंबो में नेताओं से मुलाकात की। उनकी यात्रा से उनके इस मिशन के खिलाफ और पक्ष में जगह जगह प्रदर्शन हुए। राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त को कहा था कि उनकी जनता संयुक्त राष्ट्र को एक पक्षपाती संगठन मानती है और जिस रिपोर्ट को पिल्लई पिछले महीने जारी करने जा रही है, वह पक्षपात पूर्ण है।

इस बीच, पिल्लई ने कहा कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और दोबारा विकास महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं लेकिन भैतिक रूप से पुनर्निर्माण से सामंजस्य, गौरव और चिर शांति नहीं होगी बल्कि युद्ध प्रभावित लोगों के उद्धार के लिए अधिक उदारवादी रवैया अपनाए जाने की जरूरत है।

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First published: August 31, 2013, 12:46 PM IST
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