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Nobel 2019: इन 3 वैज्ञानिकों को मिला केमिस्ट्री का नोबेल, इनकी खोज से संभव हुआ है स्मार्टफोन

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 4:22 PM IST
Nobel 2019: इन 3 वैज्ञानिकों को मिला केमिस्ट्री का नोबेल, इनकी खोज से संभव हुआ है स्मार्टफोन
इस बार तीन वैज्ञानिकों को लीथियम आयन बैटरी के विकास के लिए केमिस्ट्री के नोबेल से सम्मानित किया जाता है (फोटो क्रेडिट- नोबेल एकेडमी)

लीथियम-आयन बैटरियों (Lithium-Ion Batteries) के विकास के लिए 2019 के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prizes) तीन वैज्ञानिकों को साझा रूप से दिए गए हैं. इनमें से एक वैज्ञानिक ने सबसे उम्रदराज नोबेल विजेता का तमगा भी हासिल कर लिया है.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 4:22 PM IST
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स्टॉकहोम (स्वीडन). साल 2019 के लिए केमिस्ट्री (Chemistry) के नोबेल पुरस्कारों (Nobel Prize) की घोषणा कर दी गई है. यह पुरस्कार भी संयुक्त रूप से तीन रसायन विज्ञानियों, अमेरिका (America) के जॉन बी गुडइनफ, ब्रिटेन (Britain) के एम स्टेनली विटिंघम और जापान (Japan) के अकीरा योशीनो को दिया गया है. तीनों को संयुक्त रूप से यह पुरस्कार लीथियम-आयन बैटरी (Lithium-Ion Batteries) की खोज और उसके विकास के लिए दिया गया है. आपको बता दें कि लीथियम-आयन बैटरी के बिना आधुनिक युग के स्मार्टफोन या फिर सेल्फ स्टार्ट बाइक की कल्पना करना असंभव था.

नए तरह की लीथियम-आयन बैटरियों (Lithium-Ion Batteries) के विकास में इन तीनों का ही अलग-अलग दौर में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि इस खोज के लिए लंबे समय से पुरस्कार के इंतजार का इस घोषणा के साथ अंत हो गया है.



नए तरीके के इलेक्ट्रिक उपकरणों के लिए क्रांति साबित हुईं लीथियम-आयन बैटरियां
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लीथियम-आयन बैटरी  (Lithium-Ion Batteries)  ही बैटरियों की वह तकनीक थी, जिसे वास्तविक तौर पर हल्का कहा जा सके. इन बैटरियों के चलते ही आगे चलकर पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की राहें आसान हो सकीं. इन छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में हम मोबाइल फोन-स्मार्टफोन (Mobile Phone), पेसमेकर (Pacemaker) और इलेक्ट्रिक कारों (Electric Cars) की बात भी कर सकते हैं. इन सारे उपकरणों के नए संस्करण नए तरह की लीथियम-आयन बैटरियों के चलते ही विकसित हो सके.

एक साल में ही टूट गया सबसे उम्रदराज नोबेल विजेता का रिकॉर्ड
इस पुरस्कार को पाने के साथ ही जॉन बी गुडइनफ (John B. Goodenough) नोबेल पुरस्कार पाने वाले सबसे उम्रदराज वैज्ञानिक बन गए. उन्हें यह पुरस्कार 97 साल की उम्र में मिला. इससे पहले पिछले साल 96 साल की उम्र में यह पुरस्कार पाकर ऑर्थर एश्किन सबसे उम्रदराज नोबेल विजेता बने थे लेकिन उनका रिकॉर्ड बस एक साल में ही टूट गया.

तीन-तीन विज्ञानियों ने ही साझा किया चिकित्सा और भौतिकी का नोबेल
बता दें कि इससे पहले घोषित किए जा चुके भौतिकी और के पुरस्कार भी तीन-तीन वैज्ञानिकों ने साझा किए. चिकित्सा विज्ञान (Medicine & Physiology) के क्षेत्र में जहां यह पुरस्कार विलियम जी कीलिन (William G. Kaelin), सर पीटर जे रैटक्लिफ (Peter J. Ratcliffe) और ग्रेग एल सेमेंज़ा (Gregg L. Semenza) को संयुक्त रूप से मिला. वहीं भौतिकी के क्षेत्र में भी यह पुरस्कार स्विट्जरलैंड (Switzerland) के मिशेल मेयर, दिदिएर क्वेलोज और कनाडाई-अमेरिकी (Canadian-American) मूल के जेम्स पेबल्स ने आपस में साझा किया.

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First published: October 9, 2019, 3:41 PM IST
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