खुलासा! यहां छुपा है हिटलर का खजाना, कुएं में मौजूद है 2800 किलो सोना

खुलासा! यहां छुपा है हिटलर का खजाना, कुएं में मौजूद है 2800 किलो सोना
यहां छुपा है हिटलर का खजाना

इस खजाने को द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के अंतिम दिनों में हिटलर (Adolf Hitler) ने अपनी सबसे भरोसेमंद एसएस फ़ोर्स के जवानों को छुपाने के लिए दिया था लेकिन ये कहां गायब हो गया किसी को नहीं पता था.

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वर्साय. जर्मनी (Germany) के नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) की मौत के साथ ही कई सारे ऐसे राज हैं जिनका पता आज तक किसी को नहीं लग सका है. ऐसा ही एक राज है कि हिटलर का खजाना आखिर कहां चला गया? इस खजाने को द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के अंतिम दिनों में हिटलर ने अपनी सबसे भरोसेमंद एसएस फ़ोर्स के जवानों को छुपाने के लिए दिया था लेकिन ये कहां गायब हो गया किसी को नहीं पता था. हालांकि अब हिटलर की एसएस फ़ोर्स के जवान की एक डायरी मिली है जिसमें इस खजाने का कथित पता मिल गया है.

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के सामने अपनी हार होते देख हिटलर ने करीब 2800 किलो सोना एसएस की एक बटालियन को छुपाने के लिए सौंप दिया था. अब हिटलर की सेना में शामिल एक सैनिक की डायरी से खुलासा हुआ है कि उन्होंने इस खजाने को पौलेंड के महल में छुपा दिया था. ऐसा माना जा रहा है कि पोलैंड के व्रोकला शहर के पास स्थित होचबर्ग पैलेस के मैदान में एक कुएं की शॉफ्ट के नीचे सोने की छड़ें, सिक्के और ज्वैलरी को जमीन के 200 फीट नीचे दबाया गया है और आज भी ये खजाना वहीं मौजूद है.

डायरी में लिखी है पूरी लोकेशन
पोलिश-जर्मन सिलेसियन ब्रिज फाउंडेशन की एक टीम काफी समय से इस खजाने को ट्रैक कर रही है. अब इस टीम ने कहा है कि उन्हें हिटलर के निजी सेना के एक सिपाही की डायरी मिली है जिसमें लिखा है कि इस खजाने को द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार के आशंका के कारण पौलेंड में ही दफना दिया गया था. कहा जाता है कि इस खजाने को पोलैंड के तत्कालीन शहर ब्रेस्लाउ (वर्तमान में व्रोकला) के रीचबैंक में जमा करना था लेकिन रूसी सेना ने एसएस बटालियन को घेर लिया और वे इसे पौलेंड में ही छुपाकर चले गए.
हिटलर को कैसे मिला इतना सोना


बताया जाता है कि हिटलर के खजाने के आलावा साल 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के धनवान लोगों ने अपने कीमती सामानों को रूस की रेड आर्मी से सुरक्षित रखने के लिए जर्मनी की एसएस सैनिकों को सौंप दिया था. दावा किया जाता है कि इस खजाने का मूल्य 1.25 बिलियन यूरो से ज्यादा हो सकता है. इस खजाने का पता लगाने वाले पोलिश-जर्मन सिलेसियन ब्रिज फाउंडेशन के प्रमुख रोमन फुरमानी ने कहा कि सरकार इसे ढूंढने में रूचि नहीं दिखा रही इसलिए उन्हें मजबूरी में इस सार्वजनिक करना पड़ा है.

इस फाउंडेशन का दावा है कि हिटलर के जिस सैनिक की डायरी उन्हें मिली है उसे जर्मनी में भी प्रमाणित किया गया है. उन्होंने पोलैंड के संस्कृति मंत्रालय से भी इस डायरी की सत्यता के बारे में संपर्क किया लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला है. फुरमानी ने कहा कि बिना सरकारी अनुमति और वित्तपोषण के ऐसा करना हमारे लिए कठिन साबित हो रहा है. फिलहाल इस महल के मालिकों ने इन्हें एक निश्चित सीमा में खुदाई करने की अनुमति दे दी है और इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं.

 

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