टेस्ट के बाद एमिली को पता चला उसके शरीर में 29 केमिकल पहुंच चुके हैं, फिर छेड़ी ये मुहिम

टेस्ट के बाद एमिली को पता चला उसके शरीर में 29 केमिकल पहुंच चुके हैं, फिर छेड़ी ये मुहिम
एमिली पेन ने समुद्र को 2030 तक प्लास्टिक मुक्त करने की मुहिम चलाई है.

एमिली पेन (Emily Penn) ने टेस्ट के बाद पाया कि उसके शरीर में 29 केमिकल (Plastic Chemicals) शरीर में पहुंच चुके हैं. इसकी वजह कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स (Cosmetics Products) का इस्तेमाल और प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाना था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 4:07 PM IST
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लंदन. एमिली पेन (Emily Penn) ने टेस्ट के बाद पाया कि उसके शरीर में 29 केमिकल (Twenty Nine Plastic Chemicals) शरीर में पहुंच चुके हैं. इसकी वजह कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स (Cosmetics Products) का इस्तेमाल और प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाना था. एमिली ने यह टेस्ट प्लास्टिक से शरीर में जाने वाले 35 प्रकार के केमिकल का असर जानने के लिए करवाया था. एमिली ने इसके बाद समुद्रों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का अभियान छेड़ दिया. उन्होंने इस काम को पूरा करने के लिए वर्ष 2030 तक का वक्त तय किया है.

30 देशों की 300 महिला रिसर्चर्स जुड़ चुकी हैं

वे अभी तक 30 देशों से 300 महिला रिसर्चर्स को अपने साथ जोड़ लिया है और अबतक 10330 नॉटिकल मील की यात्रा कर चुकी हैं. इस अभियान के लिए उन्होंने अभी तक 9 देशों को कवर कर लिया है. एमिली पेन बताती हैं कि वर्ष 2019 में हमने ‘ई-एक्सपीडिशन राउंड द वर्ल्ड’ यात्रा शुरू की है.



हवाई जहाज से सफर नहीं करने का लिया फैसला
एमिली बताती हैं कि उन्हें वर्ष 2007 में एक रिसर्च के लिए चीन जाना था। कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए मैंने तय किया कि हवाई सफर नहीं करूंगी. इसके चलते उन्हें चीन पहुंचने में तीन महीने का वक्त लग गया. अगले साल मुझे 20 हजार किमी दूर ऑस्ट्रेलिया में नौकरी मिली. अब उनके सामने यह चुनौती थी कि बिना हवाई जहाज के इतना लंबा सफर कैसे पूरा होगा? गूगल पर सर्च करने पर बायोफ्यूल से चलने वाली अर्थरेस बोट के बारे में पता चला. मैंने उस बोट के कैप्टन से बात की और 120 दिन के समुद्री सफर पर निकल पड़ी.

'इतना प्लास्टिक समुद्र में आया कहां से, जैसे सवालों ने बैचेन कर दिया'

ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के बीच हमारी बोट प्लास्टिक के कचरे से जा टकराई. मेरे मन में यह सवाल उठा कि यहां इतना प्लास्टिक कैसे आया? इसी सवाल से समुद्र को प्लास्टिक मुक्त बनाने की मेरी यात्रा शुरू हुई. 2014 में ई-एक्सपीडिशन संस्था की शुरुआत हुई. मैंने खुद प्लास्टिक से शरीर में जाने वाले 35 प्रकार के केमिकल का असर जानने के लिए अपना टेस्ट कराया। पाया कि 29 केमिकल शरीर में पहुंच चुके हैं. कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से और प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से यह केमिकल शरीर में पहुंचते हैं.

'प्लास्टिक की समस्या असल में महिलाओं का मुद्दा है'

प्लास्टिक के चलते कैंसर, फर्टिलिटी या हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. मुझे आभास हुआ कि असल में यह मुद्दा महिलाओं का है. यह उनकी सेहत से जुड़ा हुआ है, इसलिए तय किया कि दुनिया को इन समस्याओं से अवगत कराने महिलाएं समुद्री यात्रा के जरिए यह मुहिम चलाएं.
इस अभियान को पूरा करने में 3 साल में 38 हजार नॉटिकल मील की यात्रा कर समुद्र की सेहत को समझा जाएगा. फिलहाल दुनिया में कुल प्लास्टिक उत्पादन का 20% ही रिसाइकिल हो रहा है. यह गति बहुत धीमी है, जिसे बढ़ाना होगा.

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एमिली और उनकी टीम ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म SHiFT लॉन्च किया है, ताकि वर्चुअल इम्पैक्ट पता किया जा सके. यह टूल लोगों को उनके हितों, कौशल और स्थान से मेल खाने वाले प्लास्टिक के मुद्दे का हल खोजने में मदद करता है.
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