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कोरोना से स्वस्थ होने के बाद भी रह सकता है इसका असर, ये 4 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार, नई स्टडी में खुलासा

कोरोना से स्वस्थ होने के बाद भी रह सकता है इसका असर, ये 4 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार, नई स्टडी में खुलासा

दुनिया में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के केस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दुनिया में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के केस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

4 factors that may increase chances of long Covid: लॉन्ग कोविड लक्षणों को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में हैं. यह किन कारणों से विकसित होते हैं.  शोधकर्ताओं की एक टीम ने जिन्होंने कोविड-19 से संक्रमित 200 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद 2 से 3 महीनों तक उन पर नजर रखी. एक रिपोर्ट में इन शोधकर्ताओं ने कहा कि, इस दौरान उन्होंने कुछ जैविक कारकों की पहचान की है जो यह अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं कि क्या कोई व्यक्ति लॉन्ग COVID से जुड़े लक्षणों को विकसित करेगा. मंगलवार को पब्लिश जरनल सेल में इसके लिए 4 फैक्टर्स की पहचान की गई.

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    न्यूयॉर्क: लॉन्ग कोविड यानि कोरोना महामारी (Corona Pandemic) से रिकवर होने के बाद भी लंबे समय तक इसका प्रभाव शरीर के अन्य हिस्सों में महसूस किया जाता है. लॉन्ग कोविड लक्षणों (Long Covid Symptoms)  को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में हैं. यह किन कारणों से विकसित होते हैं. क्या कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) से स्वस्थ होने के बाद भी कुछ लोगों में शारीरिक या अन्य कारणों से इन लक्षणों के उभरने की संभावना अधिक होती है.

    शोधकर्ताओं की एक टीम ने जिन्होंने कोविड-19 (Covid-19) से संक्रमित 200 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद 2 से 3 महीनों तक उन पर नजर रखी. एक रिपोर्ट में इन शोधकर्ताओं ने कहा कि, इस दौरान उन्होंने कुछ जैविक कारकों की पहचान की है जो यह अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं कि क्या कोई व्यक्ति लॉन्ग COVID से जुड़े लक्षणों को विकसित करेगा.

    मंगलवार को पब्लिश जरनल सेल में इसके लिए 4 फैक्टर्स की पहचान की गई जो कोरोना वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति में कुछ सप्ताह बाद स्थायी लक्षण होने के बढ़ते जोखिम को दर्शाते हैं. इन शोधकर्ताओं का कहना है कि इन फैक्टर्स और लॉन्ग कोविड के बीच संबंध हैं. इन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस शोध में यह पता चला है कि लॉन्ग कोविड के प्रभावों से बचने के लिए, संक्रमण के इलाज के तुरंत बाद उन लोगों को एंटीवायरल ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए.

    इस अध्ययन में शामिल यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डॉ स्टीवन डीक्स ने कहा कि, लॉन्ग कोविड को लेकर बायोलॉजिकल मैकनिज्म के साथ यह पहला सार्थक प्रयास है. हालांकि उन्होंने और इस रिसर्च में शामिल अन्य शोधकर्ताओं ने कहा कि चेतावनी देते हुए कहा कि ये निष्कर्ष काफी जांच के बाद सामने आए हैं लेकिन इन्हें सत्यापित करने के लिए और रिसर्च करने की आवश्यकता होगी.

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    शोधकर्ताओं ने जिन चार कारकों की पहचान की है, उनमें से एक है संक्रमण की शुरुआत में ब्लड में कोरोनावायरस आरएनए का स्तर, जो कि वायरल लोड का सूचक है. वहीं दूसरे फैक्टर के तौर पर विशेष एंटीबॉडी की उपस्थिति, यह एंटीबॉडीज गलती से शरीर के टिश्यू पर हमला करती हैं. वहीं तीसरा फैक्टर ईपस्टिन-बार वायरस का निष्क्रिय होना है. यह वायरस ज्यादातर लोगों को संक्रमित करता है.

    वहीं अंतिम और चौथे फैक्टर के तौर पर टाइप 2 डायबिटीज है. हालांकि शोधकर्ताओं और अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि बड़ी संख्या में रोगियों को शामिल करने के बाद हुए अध्ययनों में यह पता चला है कि डायबिटीज कई मेडिकल कंडीशन में से एक है जो लॉन्ग कोविड के जोखिम को बढ़ाती है.

    Tags: Coronavirus, Omicron

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