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5 wrong decisions of rajapakse government brought economic crisis in sri lanka

चीन से कर्ज और भारी कर कटौती, राजपक्षे सरकार के इन 5 गलत फैसलों से श्रीलंका में आया आर्थिक संकट

श्रीलंका में हिंसक प्रदर्शन की फाइल फोटो

श्रीलंका में हिंसक प्रदर्शन की फाइल फोटो

Economic Crisis in Sri Lanka: 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ऐसे हालात में जनता भोजन, ईंधन और दवाओं की भारी कमी से परेशान है. दक्षिण एशियाई द्वीप में बदतर आर्थिक हालात के 5 अहम कारण रहे हैं- चीन से कर्ज, फर्टिलाइजर आयात पर बैन, भारी कर कटौती और कोरोना महामारी समेत अन्य वजह रही. जिसके कारण श्रीलंका में नागरिक परेशान हो गए. 

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कोलंबो: श्रीलंका में आर्थिक संकट (Economic Crisis in Sri Lanka) और उससे उपजे जनाक्रोश के कारण हालात बेहद खराब हैं. 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ऐसे हालात में जनता भोजन, ईंधन और दवाओं की भारी कमी से परेशान है. इस संकट के लिए लोग मौजूदा राजपक्षे सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. इसके चलते इस सप्ताह पीएम के इस्तीफे इस्तीफे की मांग को लेकर हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए.

श्रीलंका में आखिर यह आर्थिक संकट कैसे उत्पन्न हुआ और इसके पीछे क्या कारण रहे? न्यूज एजेंसी एएफपी ने इस दक्षिण एशियाई द्वीप में बदतर आर्थिक हालात की समीक्षा की है और इसके पीछे की वजह बताई है:

सफेद हाथी

श्रीलंका ने चीन से मिलने वाले लोन के जरिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बड़ा खर्च किया है, जो पहले से ही देश की अस्थिर लोन राशि में जुड़ा हुआ था. दक्षिणी हंबनटोटा जिले में बंदरगाह पर परिचालन शुरू होने के बाद ही पैसों की बर्बादी होने लगी. 6 सालों में $300 मिलियन का नुकसान हुआ. चीन से मिले लोन और उससे जुड़ी फिजूलखर्ची इसकी मुख्य वजह रही. यहां एक बड़ा कॉन्फ्रेंस सेंटर खुलने के बाद से ही अनुपयोगी रहा, साथ ही $200 मिलियन की लागत से तैयार हवाई अड्डा अपना बिजली बिल का भुगतान करने के लिए पर्याप्त रकम नहीं जुटा पा रहा था. ये परियोजनाएं श्रीलंका के सबसे शक्तिशाली राजपक्षे परिवार द्वारा शुरू की गई थीं, जो कि पिछले दो दशकों से श्रीलंका की राजनीति में प्रभाव बनाए हुए हैं.

अस्थिर कर कटौती

राष्ट्रपति बनने के बाद गोटबाया ने अपने भाई महिंदा राजपक्षे को फिर से प्रधानमंत्री नियुक्त किया और श्रीलंका के इतिहास में सबसे बड़ी कर कटौती की घोषणा की, जिसके कारण सरकार के बजट घाटे जबरदस्त वृद्धि हुई.

इसके बाद अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने जल्द ही श्रीलंका की रेटिंग को डाउनग्रेड कर दिया. दरअसल एजेंसियों को यह चिंता थी कि सार्वजनिक ऋण नियंत्रण से बाहर हो रहा है, जिससे सरकार के लिए नए ऋण सुरक्षित करना मुश्किल हो गया है.

महामारी की मार

श्रीलंका सरकार द्वारा कर कटौती का फैसले की टाइमिंग बहुत ही गलत रही. क्योंकि इसके बाद पूरे विश्व में कोरोना महामारी का बुरा दौर आया और श्रीलंका में विदेशी सैलानियों का आना बंद हो गया. इसके अलावा विदेशों में काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिकों की आय पर भी असर पड़ा. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के ये दोनो पिलर जिन पर सरकार ने अपना कर्ज चुकाने के लिए भरोसा किया था, ये दोनों बुरी तरह ध्वस्त हो गए.

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विदेशी नकदी के इन स्रोतों के अभाव में राजपक्षे सरकार ने ऋण चुकाने के लिए विदेशी मुद्रा के अपने भंडार का उपयोग करना शुरू कर दिया.

फर्टिलाइजर के आयात पर प्रतिबंध

श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आ रही थी. इसके बाद 2021 में सरकार ने अधिकारियों को कई आयातों पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रेरित किया और केमिकल फर्टिलाइजर के इम्पोर्ट पर बैन लगा दिया गया. इसके कारण देश के कृषि उत्पादन पर बुरा असर पड़ा और खाद की कमी से चाय का उत्पादन लगातार कम होता गया. चूंकि चाय की खेती और इसका निर्यात श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. इस मामले से संबंधित लोगों का कहना है कि सरकार के इस फैसले के कारण ही देश में आर्थिक संकट पैदा हुआ.

गिरता विदेशी मुद्रा भंडार

2021 के आखिरी तक श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार 2.7 बिलियन डॉलर से घटकर 2.7 बिलियन डॉलर हो गया था. व्यापारियों को आयात होने वाले माल को खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा के स्रोत के कारण संघर्ष करना पड़ा. चावल, दाल, चीनी और दूध पाउडर जैसे खाद्य पदार्थ अलमारियों से गायब होने लगे, जिससे सुपरमार्केट को उन्हें राशन देने के लिए मजबूर होना पड़ा. फिर स्टेशनों पर पेट्रोल और मिट्टी का तेल खत्म होने लगा और बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल की खरीदी नहीं हो सकी. ईंधन की कमी से जरूरी सेवाएं प्रभावित हुईं और राजधानी कोलंबो में बिजली की भारी कटौती की गई.

कर्ज और दिवालिया

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अप्रैल में नया केंद्रीय बैंक प्रमुख नियुक्त किया. जिन्होंने जल्द ही घोषणा की कि श्रीलंका आवश्यक आयात के लिए पैसे बचाने के लिए अपने $51 बिलियन के विदेशी लोन को दिवालिया घोषित करेगा.

लेकिन केंद्रीय बैंक के प्रमुख नंदलाल वीरसिंघे ने बुधवार को कहा कि जब तक नया प्रशासन जल्द ही कार्यभार नहीं संभालता तब तक श्रीलंका इस हालात से नहीं उभर सकता है. बता दें कि सोमवार को भारी विरोध के बीच राष्ट्रपति गोटबाया और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया है.

Tags: China, Economic crisis, Sri lanka

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