श्रीलंका के संसदीय चुनावों में 72% हुई वोटिंग, आधी रात से शुरू होगी मतगणना

श्रीलंका के संसदीय चुनावों में 72% हुई वोटिंग, आधी रात से शुरू होगी मतगणना
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे

श्रीलंका में मतदान (Voting In Srilanka) समाप्त हो गया. कोराना काल के जारी होने के बावजूद श्रीलंका में करीब 72 फीसदी मतदान (Seventy Two Percent Voting) हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 10:53 PM IST
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कोलंबो. श्रीलंका में मतदान (Voting In Srilanka) समाप्त हो गया. कोराना काल के जारी होने के बावजूद श्रीलंका में करीब 72 फीसदी मतदान (Seventy Two Percent Voting) हुआ.  इस बार संसदीय चुनावों में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के चलते चुनाव प्रचार काफी सीमित रहा और सभी दलों ने सोशल मीडिया (Social Media) के जरिए ही जनसमर्थन जुटाने की कोशिशें की थीं. ऐसे विपरीत समय में मतदान करने के लिए पहुंचे आम जनता सैल्यूट के लायक है.

चुनाव में महिंदा राजपक्षे की जीत सुनिश्चित है

श्रीलंका के तमाम सर्वेक्षणों के आधार पर यह उम्मीद की जा रही है कि चुनाव में महिंदा राजपक्षे (PM Mahinda Rajapaksa) की जीत सुनिश्चित है. देखने वाली बात यह होगी कि वह भारी बहुमतों से ​जीतेंगे या सामान्य बहुमत से, इस बारे में अभी कहा नहीं जा सकता है. मतगणना आज आधी रात से शुरू होगी.



श्रीलंका की सत्ता पर राजपक्षे का है कब्जा
फ़िलहाल श्रीलंका की सत्ता पर राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षेका कब्जा है. इन चुनावों में राजपक्षे भाई कम से कम सो तिहाई सीटें जीतने की उम्मीद लगाए हुए हैं. ये मतदान कोरोना संक्रमण फैलने के मद्देनज़र पहले ही दो बार टल चुके हैं.

संसद के लिए चुने जाते हैं 225 सांसद

बता दें कि श्रीलंका की संसद के लिए कुल 225 सांसद चुने जाते हैं. राष्ट्रपति गोटबाया ने मार्च में ही संसद भंग कर दी थी और नए चुनावों का ऐलान किया था. पिछली संसद का गठन अगस्त 2015 में हुआ था लेकिन श्रीलंका का संविधान कहता है कि राष्ट्रपति साढ़े चार साल बाद संसद को अपनी मर्जी से कभी भी भंग कर चुनावों का ऐलान कर सकता है.

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225 सीटों के लिए कुल 7452 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें से 3652 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से हैं, जबकि 3800 निर्दलीय हैं.

श्रीलंका का चुनावी गणित

श्रीलंका के इन चुनावों में राजपक्षे ब्रदर्स की एसएलपीपी (SLPP) और पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की एसएलएफपी (SLFP) के बीच में ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है. इसके अलावा एसजेबी (SJB) और यूएनपी (UNP) भी दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां मानी जाती हैं. राजपक्षे की एसएलपीपी और यूएनपी गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि इनकी जीत पक्की है. बता दें कि सजित प्रेमदासा की एसजेबी वास्तव में यूएनपी से अलग होकर ही बनी. श्रीलंका के गांवों में इस पार्टी की अच्छी पकड़ मानी जाती है. श्रीलंका के चुनावों में कई छोटे क्षेत्रीय दल भी हिस्सा ले रहे हैं लेकिन उनकी सक्रियता सिर्फ अपने-अपने इलाके तक ही है.
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