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कोरोना होगा अब बेअसर! वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली वायरस के सभी वेरिएंट्स की कमजोर कड़ी

कोरोना होगा अब बेअसर! वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली वायरस के सभी वेरिएंट्स की कमजोर कड़ी

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की रिसर्च (सांकेतिक फोटो)

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की रिसर्च (सांकेतिक फोटो)

Research on Coronavirus: कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की एक सामान्य दुर्बलता की पहचान की है, जो कि इसके सभी वेरिएंट्स में पाई गई है इसमें अति संक्रामक ओमिक्रॉन वेरिएंट भी शामिल है. डॉ श्रीराम सुब्रमण्यम ने बताया कि, इस अध्ययन के जरिए कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स में एक कमजोर कड़ी का पता चलता है जो बड़े पैमाने पर विभिन्न रूपों में अपरिवर्तित रहती है और एंटीबॉडी के जरिए इसे बेअसर किया जा सकता है.

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हाइलाइट्स

ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय मूल के डॉ श्रीराम सुब्रमण्यम की अगुवाई में रिसर्च
वायरस के स्पाइक प्रोटीन पर कमजोर स्थान की एटॉमिक स्ट्रक्चर की संरचना का चला पता
'यह दुर्बलता विभिन्न रूपों में अपरिवर्तित रहती है इसे एंटीबॉडी के जरिए इसे बेअसर किया जा सकता'

टोरंटो: कोरोना वायरस और उसके अलग-अलग वेरिएंट्स पर दुनियाभर में कई तरह की रिसर्च चल रही है. इस बीच ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को एक अहम जानकारी हाथ लगी है. दरअसल इन साइंटिस्ट ने कोरोना वायरस की एक सामान्य दुर्बलता की पहचान की है, जो कि इसके सभी वेरिएंट्स में पाई गई है इसमें अति संक्रामक ओमिक्रॉन वेरिएंट भी शामिल है. इस रिसर्च को भारतीय मूल और कनाडा के वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया है, जिसे गुरुवार को प्रकाशित किया गया.

खास बात है कि रिसर्च में सामने आई इस जानकारी की मदद से कोविड-19 के बेहतर इलाज की संभावना मजबूत हो गई. यह स्टडी में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के बीच सहयोग से आयोजित की गई. जिसकी अगुवाई प्रोफेसर डॉ श्रीराम सुब्रमण्यम और यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के अन्य वैज्ञानिकों ने की.

स्टडी में ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल

इस स्टडी में क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (क्रायो-ईएम) का उपयोग वायरस के स्पाइक प्रोटीन पर कमजोर स्थान की एटॉमिक स्ट्रक्चर की संरचना का पता लगाने के लिए किया गया, जिसे एपिटोप के रूप में जाना जाता है. यह शक्तिशाली इमेजिंग तकनीक अल्ट्रा-कूलिंग तकनीकों का उपयोग करके ऊतकों और कोशिकाओं के आकार की कल्पना करने के लिए इलेक्ट्रॉनों के बीम का उपयोग करती है. चूंकि कोविड -19 वायरस पिनहेड के आकार से 100,000 गुना छोटा है, इसलिए नियमित प्रकाश माइक्रोस्कोप का उपयोग करके इसका पता नहीं लगाया जा सकता है.

सुब्रमण्यम ने बताया कि, इस अध्ययन के जरिए कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स में एक कमजोर कड़ी का पता चलता है जो बड़े पैमाने पर विभिन्न रूपों में अपरिवर्तित रहती है और एंटीबॉडी के जरिए इसे बेअसर किया जा सकता है. यह पैन-वेरिएंट उपचारों के डिजाइन के लिए मंच तैयार करता है जो संभावित रूप से बहुत कमजोर लोगों की मदद कर सकता है.

Tags: Coronavirus, New Study, Omicron variant

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