मौत का हॉस्पिटल! कोरोना वायरस से एक इमरजेंसी रूम में महज 40 मिनट में 10 मरीजों की मौत

मौत का हॉस्पिटल! कोरोना वायरस से एक इमरजेंसी रूम में महज 40 मिनट में 10 मरीजों की मौत
न्यूयॉर्क में औसतन हर रोज़ 400 लोगों की मौत हो रही है

इस हॉस्पिटल में सिर्फ कोरोना वायरस (Coronavirus) के मरीजों का इलाज हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यहां एडमिट होने वाले करीब 25 फीसदी लोगों को बचाया नहीं जा पा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 6, 2020, 10:29 AM IST
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न्यूयॉर्क. कोरोना वायरस (Coronavirus) से अमेरिका (America) में हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं. अब तक यहां 9 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 3 लाख 37 हज़ार लोग यहां कोरोना पॉजिटिव हैं. न्यूयॉर्क में हालात बेहद खराब हैं. यहां अब हर रोज औसतन 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. रविवार को न्यूयॉर्क के एक हॉस्पिटल के मंजर ने हर किसी को हिला कर रख दिया. यहां सिर्फ 40 मिनट के अंदर 10 लोगों की मौते हो गई.

पलक झपकते ही मौत
सीएनएन  की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रूकलिन के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हर तरफ अफरा-तफरी का मंजर है. रविवार को यहां 40 मिनट के अंदर 10 मरीजों ने दम तोड़ दिया और वो भी सिर्फ एक इमरजेंसी रूम में. इसमें से 6 मरीजों की मौत कार्डियक अरेस्ट के चलते हुई, जबकि 4 मरीज तो इमरजेंसी रूम के अंदर भी नहीं पहुंच सके. यहां के एक डॉक्टर ने बताया कि लोग इतने ज्यादा बीमार हैं कि पलक झपते ही मरीजों की मौत हो जाती है. इतना ही उन्होंने ये भी कहा कि वेंटिलेटर लगाते-लगाते ही लोगों की मौत हो जाती है.

25% लोगों की मौत



ब्रूकलिन के इस हॉस्पिटल में सिर्फ कोरोना के मरीजों का इलाज हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यहां एडमिट होने वाले करीब 25 फीसदी लोगों की मौत हो रही है. डॉक्टर लॉरेंज़ों पैलिडेनो का कहना है कि ये हॉस्पिटल की कोई गलती नहीं है बल्कि ये बीमारी ही ऐसी है कि कुछ लोगों को बचाना मुश्किल हो जाता है.



लगातार हो रही है मौत
इस हॉस्पिटल के स्टाफ 24 घंटे लगातार काम कर रहे हैं. इन्हें सांस लेने की फुर्सत तक नहीं है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी मरीज की मौत के तुरंत बाद उस जगह को आधे घंटे के अंदर खाली कर सैनेटाइज़ किया जाता है. और फिर दूसरे मरीज़ को वहां रखा जाता है. यहां एडमिट होने वाले 90 फीसदी मरीज़ की उम्र 45 साल से ज्यादा है. जबकि 60 फीसदी मरीज की उम्र 65 साल से ज्यादा रहती है.

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