अपहर्ताओं ने शारीरिक नुक़सान नहीं पहुंचाया: पादरी टॉम उझुन्नालिल

भाषा
Updated: September 16, 2017, 9:51 PM IST
अपहर्ताओं ने शारीरिक नुक़सान नहीं पहुंचाया: पादरी टॉम उझुन्नालिल
Abducted अपहर्ताओं ने शारीरिक नुक़सान नहीं पहुंचाया: पादरी टॉम उझुन्नालिल
भाषा
Updated: September 16, 2017, 9:51 PM IST
यमन में 18 महीने तक बंधक बनाकर रखे जाने के बाद रिहा किए गए भारतीय कैथोलिक पादरी ने शनिवार को कहा कि भले ही वीडियो में उनके अपहर्ता उन्हें पीटते हुए दिख रहे हों, लेकिन इस अवधि में उन्हें कभी शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाया गया. दक्षिणी यमन के अदन में एक वृद्धाश्रम से केरल के रहने वाले पादरी टॉम उझुन्नालिल का अपहरण कर लिया गया था.

इस वृद्धाश्रम की स्थापना मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने मार्च 2016 में की थी. हमले के दौरान चार नन की मौत हो गई थी. उझुन्नालिल ने जब सार्वजनिक तौर पर संवेदना प्रकट की तो उनका गला रूंध गया.

59 वर्षीय उझुन्नालिल ने कहा, 'मैं ईश्वर का इस दिन के लिए शुक्रिया अदा करता हूं. उन्होंने मुझे स्वस्थ रखा. भावनाएं अब तक काबू में हैं.' उन्होंने कहा, 'ईश्वर मुझपर काफी मेहरबान रहे हैं. किसी ने मुझपर बंदूक नहीं तानी.' उन्होंने कहा कि जब वृद्धाश्रम पर हमला किया गया तो उन्होंने अपनी पहचान भारतीय के तौर पर बताई. उनके मुताबिक उन्हें दूसरे कमरे में ले जाया गया जबकि अन्य लोगों को मार डाला गया.

भारतीय अधिकारियों ने उनकी रिहाई की घोषणा मंगलवार को की और तस्वीरों में मस्कट में एक विमान से दुर्बल उझुन्नालिल को उतरते दिखाया गया. पादरी ने कहा कि उन्हें यमन से कार से ओमान भेजा गया और तब रोम की यात्रा पर निकलने से पहले उन्हें विमान से मस्कट लाया गया.

पादरी ने कहा कि वो अपने अपहर्ताओं की पहचान या वो किस संगठन से जुड़े हैं इसको नहीं जानते हैं और मानते हैं कि उनका उद्देश्य फिरौती था. हालांकि उझुन्नालिल के सेल्सियन ऑर्डर के प्रमुख डॉन ए एफ आर्टाइम ने कहा कि उन्हें कोई भी फिरौती की रकम चुकाए जाने की जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा, 'किसी ने भी हमसे एक यूरो भी नहीं मांगा.' उन्होंने कहा, 'हम इस बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं. ये पूरी सच्चाई है और मेरा मानना है कि फादर टॉम इससे भी कम जानते हैं.' उनकी रिहाई के पीछे की युक्ति भी साफ नहीं है, लेकिन वेटिकन ने ओमान के सुल्तान का शुक्रिया अदा किया है और उझुन्नालिल ने भारत के नेताओं का शुक्रिया अदा किया.

पादरी ने कहा कि उनके अपहर्ताओं ने उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाया. उन्होंने उनके मधुमेह का इलाज करने के लिए दवा दी और उनकी बुनियादी आवश्यकताओं का ख्याल रखा. बंधक बनाकर रखे जाने के दौरान उन्हें कई बार दूसरे स्थान पर भेजा गया, लेकिन वो नहीं जानते कि उन्हें कहां रखा गया. उनके अपहर्ता अपना चेहरा ढककर रखते थे.

आर्टाइम ने कहा कि पादरी का वजन इस दौरान 30 किलोग्राम घट गया और उनके स्वास्थ्य को 'बेहद नाजुक और बेहद कमज़ोर' बताया. बंधक बनाकर रखे जाने के दौरान उझुन्नालिल ने कहा कि उन्होंने प्रार्थना की.
First published: September 16, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर