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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शोधार्थी को स्थायी निवास देने से किया मना, समर्थन में आये सैकड़ों शिक्षाविद

News18Hindi
Updated: November 12, 2019, 11:46 AM IST
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शोधार्थी को स्थायी निवास देने से किया मना, समर्थन में आये सैकड़ों शिक्षाविद
शोधार्थी ने बितया था ज्यादा समय भारत में

ब्रिटेन (Britain) के गृह मंत्रालय ने डॉ. आसिया इस्लाम के अनिश्चितकालीन छुट्टी (आईएलआर) को पिछले हफ्ते यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निश्चित समय अवधि से ज्यादा समय बिताया है.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 11:46 AM IST
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लंदन. सैकड़ों शिक्षाविदों, छात्रों और कार्यकर्ताओं ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय को खुला पत्र लिखकर कैंब्रिज (Cambridge) विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी (Researcher) को ब्रिटेन (Britain) में स्थायी निवास देने से मना करने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है. दरअसल ब्रिटेन ने उसको भारत में काफी समय बिताने के चलते स्थायी निवास देने से मना कर दिया था. शोधार्थी ने अपना पक्ष रखते कहा कि फील्डवर्क और शोध के लिए भारत में समय बिताना जरूरी था.

ब्रिटेन ने किया आवेदन खारिज
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने डॉ. आसिया इस्लाम के अनिश्चितकालीन छुट्टी (आईएलआर) को पिछले हफ्ते यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निश्चित समय अवधि से ज्यादा समय के लिए कोई बाहर नही रह सकता. यदि कोई ऐसा करता हैतो वह नियमों का उल्लंघन करता है.

डॉ. आसिया ने जमा किए जरूरी डाक्यूमेंट

31 वर्षीय शोधार्थी ने कहा कि अनुपस्थित रहने के जो कारण हैं उनके लिए उसने जरूरी डाक्यूमेंट लगाए हैं. नई दिल्ली में उसने अपनी पीएचडी के लिए बिताए समय के लिए दिए. डॉ. आसिया ने 2016 और 2017 में भारत में समय बिताया और ‘जेंडर, क्लास एंड लेबर इन द न्यू इकोनॉमी ऑफ अर्बन इंडिया’ विषय पर रिसर्च किया है.

शैक्षणिक समुदाय ने बनाया गृह मंत्रालय पर दबाव
गृह मंत्रालय के इस निर्णय से शिक्षाविदों, छात्रों और कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी है. उन्होंने गृह मंत्रालय के खिलाफ खुला पत्र लिखा है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस पर 900 शिक्षाविदों और छात्रों के हस्ताक्षर हैं. डॉ. आसिया 10 साल से ब्रिटेन में हैं.
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उसने कहा कि मेरे और मेरी तरह अन्य शिक्षाविदों को देश के बाहर अपने दिनों के आधार पर रहने के लिए महत्वपूर्ण फील्डवर्क करने के बाद, गृह कार्यालय वैश्विक शोधकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है. द गार्डियन ने हाल ही में गृह कार्यालय के इस तरह के निर्णयों के परिणामस्वरूप यूके में रहने के लिए संघर्ष कर रहे मूल्यवान शिक्षाविदों के कई मामलों पर एक रिपोर्ट दी है. (भाषा इनपुट के साथ)

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First published: November 12, 2019, 10:52 AM IST
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