हिटलर के पालतू मगरमच्छ की मास्को ज़ू में मौत, 84 साल थी उम्र

हिटलर के पालतू मगरमच्छ की मास्को ज़ू में मौत, 84 साल थी उम्र
हिटलर के पालतू मगरमच्छ को मास्को ज़ू में रखा गया था.

बताया जाता है कि ब्रिटिश सैनिकों ने हिटलर (Hitler) के पालतू मगरमच्छ (Alligator) को पकड़कर सोवियत यूनियन के सैनिकों के हवाले कर दिया था.

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मास्को के ज़ू में नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर (Adolf hitler) के पालतू मगरमच्छ (Alligator) की मौत हो गई है. मगरमच्छ की उम्र 84 साल की बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये एडोल्फ हिटलर का पालतू मगरमच्छ था. द्वितीय विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद ब्रिटिश सैनिकों ने इसे बर्लिन में पाया था. ब्रिटिश सैनिकों ने इसे सोवियत यूनियन की सेना के हवाले कर दिया था.

इस मगरमच्छ का नाम सैटर्न (शनि) था. सोवियत यूनियन की सेना ने बाद में इसे मास्को के ज़ू में रखवा दिया. 1946 से लेकर अब तक वो मास्को के ज़ू में रह रहा था.

बताया जा रहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू होने से पहले ये बर्लिन में लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था. द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के एक लेखक बोरिस अक्यूनिन ने इसे हिटलर का पालतू मगरमच्छ बताया था.



मगरमच्छ प्रेमी था तानाशाह हिटलर
मास्को ज़ू के वेटनरी डॉक्टर दिमित्री वैसिलयेव ने बताया है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि हिटलर मगरमच्छ प्रेमी था.

पिछले दिनों हिटलर की 75वीं हार की सालगिरह के मौके पर मगरमच्छ सैटर्न जिंदा था. बताया जाता है कि इस मगरमच्छ का जन्म मिसिसिपी के जंगलों में 1936 को हुआ था. नवंबर 1943 में इसे पकड़कर बर्लिन लाया गया था. इसके तीन साल बाद ये ब्रिटिश सैनिकों को मिला था.

एक थ्योरी के मुताबिक ये अंधेरे बेसमेंट के कचरे वाले नाले में पड़ा मिला था. एक दूसरी कहानी के मुताबिक वो हिटलर के जंगली जानवरों के पिंजरे में मिला था.

मास्को की ज़ू का सबसे उम्रदराज जानवर था मगरमच्छ
बताया जाता है कि ये मगरमच्छ मास्को के ज़ू का सबसे उम्रदराज जानवर था. इसके पहले कई बार उसने मौत को चकमा दिया था. 1980 में ज़ू की छत का कंक्रीट का एक टुकड़ा इसके ऊपर गिरते-गिरते बचा था. उस हादसे में इस मगरमच्छ की जान बाल-बाल बची थी.

एक बार ज़ू घूमने आए एक शख्स ने इसके सिर पर पत्थर से हमला किया था. हमले में उसे गंभीर चोट आई थी. महीनों तक उसका मेडिकल केयर चला था.

कहा जाता है कि जब इस मगरमच्छ के लिए नया एक्वेरियम बना था तो इसने 4 महीनों तक खाना नहीं खाया था. 2010 में ऐसा ही उसने एक साल तक के लिए किया. बाद में वो खाने लगा. मास्को ज़ू के लोगों ने मगरमच्छ की मौत पर शोक व्यक्त किया है.

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