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अफगानिस्तान: युद्ध् समाप्ति के लिए 400 कट्टर तालिबान कैदियों की होगी रिहाई

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी. (File Photo)

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी. (File Photo)

अफ़ग़ान सरकार (Afganistan Government) ने रविवार को 400 कट्टर तालिबान कैदियों (Talibani Prisoner) को रिहा करने के लिए सहमति व्यक्त की है. राष्ट्रपति अशरफ गनी आज इस सहमति दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर देंगे.

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    काबुल. अफ़ग़ान सरकार (Afganistan Government) ने रविवार को 400 कट्टर तालिबान कैदियों (Talibani Prisoner) को रिहा करने के लिए सहमति व्यक्त की है. अफगान सरकार के इस कदम से अफगानिस्तान में दो दशकों से चल रहे युद्ध को समाप्त (End of War) करने के उद्देश्य से शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त होगा. तालिबान ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वह तलिबानी कैदियों की रिहाई के 10 दिनों के अंदर ही बातचीत शुरू करने को तैयार है. अफगानिस्तान की महासभा लोया जिरगा ने भी रविवार को कैदियों की रिहाई की मंजूरी दे दी है. तालिबान ने शांति वार्ता में शामिल होने की शर्त के रूप में 5000 कैदियों के आखिरी बैच 400 कैदियों को मुक्त करने की मांग की थी.

    लोया जिरगा ने देश में शांति बहाल के लिए उठाया ये कदम

    लोया जिरगा ने रिहाई के प्रस्ताव में कहा कि देश में एक बाधा को दूर करने के लिए, शांति प्रक्रिया की शुरूआत करने के लिए और खूनखराबे का अंत करने के लिए लोया जिरगा ने इन 400 तालिबानियों की रिहाई को मंजूरी दी है.

    राष्ट्रपति अशरफ गनी रिहाई आदेश पर करेंगे हस्ताक्षर

    अफगान युद्ध पीड़ितों का इस रिहाई पर कहना है कि शांति की उम्मीद क्षमा की कीमत पर ही की जा सकती है. राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी घोषणा कर दी कि वे आज ही इन 400 कैदियों के रिहाई के आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. पिछले हफ्ते गनी ने काबुल में भव्य विधानसभा आयोजित की जिसमें लगभग 3,200 सामुदायिक नेताओं और राजनेताओं को आमंत्रित किया गया ताकि सरकार को तालिबानी कैदियों को मुक्त किये जाने के विषय पर सलाह दी जा सके.

    छोड़े जा रहे तालिबानियों पर आरोप

    जिन 400 कैदियों को छोड़ा जा रहा है उनमें से तालिबान के सदस्य रहे कैदियों पर अफगानी नागरिकों और विदेशियों पर बड़े हमले करने का आरोप है. इन हमलों में एक काबुल में जर्मन दूतावास के पास 2017 में हुआ ट्रक बम विस्फोट शामिल है जिसमें 150 से अधिक लोग मारे गए थे. 19 साल के विद्रोह में यह सबसे घातक हमला था. तालिबान और आधिकारिक सूत्रों ने रायटर को बताया कि छोड़े जा रहे कैदियों में आतंकवादी हक्कानी नेटवर्क के सदस्य भी शामिल हैं जिसका संबंध तालिबान से रहा है.

    इस सप्ताह होगी शांतिवार्ता की शुरुआत

    इस सप्ताह दोहा में सरकार और तालिबान के बीच बातचीत शुरू होगी. गनी ने कट्टर इस्लामी संगठन से अपील की है कि वह वार्ता से पहले पूर्ण युद्ध विराम की प्रतिज्ञा करे. लेकिन जब तालिबान ने रिलीज़ के 10 दिनों के भीतर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई तो अफगान सरकार ने भी ने तत्काल युद्ध विराम नहीं किया है.

    युद्ध विराम वार्ता एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा

    तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने दोहा से फोन पर रॉयटर्स को बताया कि युद्ध विराम वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और आगे भी होगा लेकिन युद्ध विराम जैसे विषय को वार्ता के दौरान तय किया जाएगा उससे पहले नहीं. तालिबान कैदियों के अंतिम जत्थे को छुड़ाने में देरी होने के कारण नागरिकों और अधिकार समूहों में नाराजगी फैल गई थी.

    अमेरिका की भी कई समस्याएं समाप्त होंगी

    3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बजने के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध को समाप्त करने के अपने सबसे महत्वपूर्ण चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उत्सुक हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनावों के दबाव में अमेरिकी सैनिकों को अमेरिका वापिस लाने की डील कर ली है.

    ​अमेरिकी सैनिकों को 5,000 से कम किया जाएगा

    रक्षा सचिव मार्क ओशो ने शनिवार को प्रसारित एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या को नवंबर के अंत तक 5,000 से कम तक लाने की उम्मीद है. फिलहाल 8,600 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में तैनात हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने शांति प्रक्रिया में कमियों के बावजूद उसे आगे बढ़ाने के लिए और कैदियों की रिहाई का समर्थन करने के लिए हाल के दिनों में लोया जिरगा को प्रोत्साहित किया था.

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    सऊदी अरब के कर्ज तले दबे पाकिस्तान को झटका, तेल सप्लाई पर लगाई रोक

    पड़ोसी देश पाकिस्तान जिसे बातचीत के लिए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ने अफगान सरकार के इस फैसले का स्वागत किया. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कैदियों की रिहां करने के बाद इंट्रा-अफगान वार्ता भी शुरू होगी जैसा कि अमेरिकी तालिबान शांति समझौते में कहा गया है.

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