भारत-रूस के बीच आज होने वाली बातचीत में अहम मुद्दा होगा अफगानिस्तान, क्वॉड पर भी हो सकती है चर्चा

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर . (फाइल फोटो )

MEA Jaishankar Russia Tour: भारत और रूस के विदेश मंत्री 'रूसी-भारतीय संबंधों की प्रमुख दिशाओं पर चर्चा कर सकते हैं.' साथ ही दोनों देश अफगानिस्तान की स्थिति, भारत-रूस (India-Russia) की आगामी बैठकों पर भी बातचीत करेंगे.

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    मास्को. विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव ( Sergey Lavrov) के बीच गुरुवार को मास्को में होने वाली वार्ता के दौरान अफगानिस्तान (Afghanistan) पर भी बात होगी. मिली जानकारी के अनुसार दोनों देश अफगानिस्तान की स्थिति, भारत-रूस (India-Russia) की आगामी बैठकों और सुरक्षा और रक्षा में द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा कर सकते हैं. जयशंकर फिलहाल रूस की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं. लावरोव के साथ जयशंकर की मास्को में अहम मुलाकात होगी. इस मुलाकात से पहले रूसी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि दोनों पक्ष 'प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर वार्ता करेंगे, जिसमें अफगानिस्तान में राजनीतिक प्रक्रिया, सीरिया में समझौता और ईरानी परमाणु कार्यक्रम समेत आसपास की मौजूदा स्थिति शामिल है.'

    रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) पर चर्चा करेंगे. रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह चर्चा RIC फॉर्मेट यानी रूस-भारत-चीन को ध्यान में रखकर होगी. हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific ) पर भारत और रूस के बीच मतभेदों पर रूसी विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस चर्चा में 'प्रशांत और हिंद महासागर में  सुरक्षा के विश्वसनीय दृष्टिकोण' पर भी बातचीत हो सकती है.'

    हिंद-प्रशांत के खुले आलोचक रहे हैं लावरोव
    लावरोव हिंद-प्रशांत क्षेत्र के खुले आलोचक रहे हैं, जो अब क्वॉड (जिसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं) के तहत भारत की विदेश नीति और सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. पिछले दिसंबर में, लावरोव ने कहा था कि पश्चिमी ताकतों ने भारत-प्रशांत की रणनीतियों को बढ़ावा देकर 'चीन विरोधी खेलों में' भारत को शामिल करने के लिए 'आक्रामक और कुटिल' नीति अपनाई है.

    हालांकि भारत ने इन चिंताओं को यह कहकर खारिज कर दिया था कि हिंद प्रशांत सबको साथ लेकर चलने वाली अवधारणा है, जिसमें रूस भी शामिल हो सकता है. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के साथ बातचीत 'राजनीतिक संवाद, सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक, सैन्य-तकनीकी, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक बढ़ रही है.' इसमें कहा गया है कि दोनों विदेश मंत्री 'रूसी-भारतीय संबंधों की प्रमुख दिशाओं पर चर्चा कर सकते हैं.'

    भारत-रूस के संबंध प्रमुख स्थिर संबंधों में से एक : जयशंकर
    इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे प्रमुख स्थिर रिश्तों में से एक हैं और भारत वार्षिक द्विपक्षीय शिखर-सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के स्वागत को उत्सुक है.

    मॉस्को में प्राइमाकोव इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकनॉमी ऐंड इंटरनेशनल रिलेशन्स में बदलते विश्व के विषय पर भाषण देते हुए जयशंकर ने कहा कि इन रिश्तों को कई बार हल्के में लिया जाता है. उन्होंने कहा कि इन संबंधों का सतत रूप से समृद्ध होना एक बड़ा कारक है. उन्होंने कहा, ‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे स्थिर संबंधों में से एक हैं.’

    जयशंकर ने कहा, ‘बड़े देशों के संबंधों की दिशा और प्रगति बहुत हद तक हमारे नेतृत्व पर निर्भर करती है.’ जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2014 से अब तक 19 बार मुलाकात कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘यह तथ्य अपने आप में काफी कुछ बयां करता है.’

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