आखिर रमजान में क्यों झुलस रहा है यरुशलम?

फिलिस्तीनियों की इज़राइली पुलिस के बीच मुठभेड़ चल रही है.

फिलिस्तीनियों की इज़राइली पुलिस के बीच मुठभेड़ चल रही है.

दरअसल इज़राइली पुलिस (Israel Police) ने दीवारों से घिरे पुराने शहर दमिश्क के गेट पर बैरियर लगा दिया ताकि शाम को इफ्तार के दौरान एकत्र होने वाली भीड़ को रोका जा सके. फिलिस्तीनी (Palestine) इस बैरियर को एकजुट होने की स्वतंत्रता में पाबंदी के तौर पर देखे रहे हैं

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इजराइल. पूर्वी यरुशलम (Jerusalem) में रमजान के पाक महीने में फिलिस्तीनियों (Palestine) की इज़राइली पुलिस (Israel Police) और वहां के निवासियों से रात्रिकालीन भिड़ंत हो रही है. मुद्दे की वजह और इसकी तीव्रता के कई कारण हैं, जिसमें धर्म, ज़मीन और राजनीति कई मामले शामिल हैं. इज़राइली और फिलिस्तनियों के बीच इस टकराव के मध्य में है वो शहर जहां यहूदी, इस्लाम और ईसाई धर्म के मुख्य स्थल हैं. ये हैं कुछ तथ्य जो बताते हैं कि यरुशलम क्यों झुलस रहा है -

विरोध की शुरूआत कब हुई?

मध्य अप्रैल में रमजान के शुरू होने के साथ ही हर रात फिलिस्तीनियों की इज़राइली पुलिस से भिड़ंत हो रही है. दरअसल इज़राइली पुलिस ने दीवारों से घिरे पुराने शहर दमिश्क के गेट पर बैरियर लगा दिया ताकि शाम को इफ्तार के दौरान एकत्र होने वाली भीड़ को रोका जा सके. फिलीस्तीनी, इस बैरियर को एकजुट होने की स्वतंत्रता में पाबंदी के तौर पर देखे रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि ये सब कुछ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जा रहा है.

हिंसा की आग फिर से क्यों भड़की?
इज़राइली सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहे एक केस की 10 मई को सुनवाई होनी थी, जिसमें ये फैसला लिया जाना है कि दमिश्क गेट के करीब शेख़ जर्राह इलाके से फिलिस्तिनी परिवार और उनके घरों को हटाकर, वहां इज़राइली निवासियों को बसाया जाए या नहीं. सुनवाई की तारीख करीब आने के साथ ही फिलिस्तीनी और वामपंथी इज़राइलियों ने प्रदर्शन करने शुरू किए, जिसके जरिए कहा गया कि इस तरह की बेदख़ली फिलीस्तीनी इलाके में आग में घी डालने का काम करेगी. शेख़ जर्राह में यहूदियों के प्राचीन उच्च पुजारी शिमोन द जस्ट का गुंबद भी है, जिसके दर्शन के लिए यहूदी लगातार यहां आते रहते हैं और इस वजह से फिलीस्तिनियों से उनकी भिड़ंत का तनाव बढ़ता है. हालांकि निचली अदालत ने इस केस के लिए कहा था कि 1948 युद्ध से पहले यह विवादित ज़मीन पूर्वी यरुशलम की थी. पूर्वी यरुशलम में इज़राइलियों को बसाने की आलोचना के बीच इस मुद्दे ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान बटोर लिया है.

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आगे क्या?



रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेदख़ली के मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया था, ताकि समाधान के लिए थोड़ा वक्त और मिल सके, और रमजान के अंत तक कम से कम हिंसा को रोका जा सके. नया सत्र 30 दिन के भीतर तय किया जाएगा. सोमवार को यरुशलम दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन 1967 युद्ध के दौरान पूर्व यरुशलम पर कब्ज़ा किया गया था. इस दिन यहूदी तीर्थयात्री, पुराने शहर में चक्कर लगाते हैं. जिसमें कई कट्टर राष्ट्रवादी भी शामिल होते हैं, जो भिड़ंत की एक और वजह बन सकते हैं.

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क्यों यरुशलम संवेदनशील जगह है?

यरुशलम के पुराने शहर के बीचों बीच एक पहाड़ है जिसे दुनिया भर के यहूदी, टेंपल माउंट कहते हैं. ये यहूदियों का पवित्र धार्मिक स्थल है और मुसलमान भी इसे हरम-अस-शरीफ (पवित्र पूजा स्थल) मानते हैं. यह यहूदियों के प्राचीन मंदिरों में से एक है. अब यहां मुस्लमानों के दो धार्मिक स्थल हैं. अल अक़्स मस्जिद (इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र जगह) और कुब्बत-अल-सख़रा. ईसाई भी इस जगह को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यीशू ने यहीं उपदेश दिए, प्राण त्यागे और पुनर्जीवित हुए. इज़राइल की नज़र में यरुशलम उसका अभिन्न हिस्सा और अविभाजित राजधानी है. जबकि फिलिस्तीनी चाहते हैं कि पूर्वी हिस्सा, भविष्य में तैयार होने वाले राज्य की राजधानी बने. पूर्वी यरुशलम पर इज़राइल के कब्ज़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं है.

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