अंटार्कटिका में हरी बर्फ के बाद अब इटली में बर्फ के पहाड़ हुए गुलाबी, वैज्ञानिक हैरान

अंटार्कटिका में हरी बर्फ के बाद अब इटली में बर्फ के पहाड़ हुए गुलाबी, वैज्ञानिक हैरान
इटली में बर्फ के पहाड़ हुए गुलाबी

अंटार्कटिका (Antarctica) में मौजूद बर्फ के सफ़ेद पहाड़ों के हरे रंग (Green Snow) में बदलने के बाद अब इटली (Italy) के बर्फ के पहाड़ गुलाबी (Pink Snow) हो गए हैं.

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रोम. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. अंटार्कटिका (Antarctica)  में मौजूद बर्फ के सफ़ेद पहाड़ों के हरे रंग (Green Snow) में बदलने के बाद अब इटली (Italy) में बर्फ के पहाड़ गुलाबी (Pink Snow) हो गए हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्फ के हरे और गुलाबी होने की वजह एक प्रकार के शैवाल ही हैं, लेकिन ये इटली कैसे पहुंचे इसका पता लगाना बेहद मुश्किल काम है. वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ का रंग सफेद से गुलाबी हो रहा है. हालांकि इस गुलाबी बर्फ की छानबीन के लिए इटली की सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

वैज्ञानिकों की जांच के केंद्र में बर्ग का गुलाबी होना नहीं बल्कि इसकी वजह बन रहे शैवालों का इटली पहुंचना है. इटली नेशनल रिसर्च काउंसिल के मुताबिक ये शैवाल कभी इटली में नहीं पाए गए और इसका यहां तक पहुंचना काफी चौंकाने वाला है. वैज्ञानिक बियाजियो दी मौरो के मुताबिक प्रेसेना ग्लेशियर के कई हिस्सों की बर्फ गुलाबी हो गयी है. ऐसा शैवाल ग्रीनलैंड में तो पाया जाता है लेकिन ये इटली कैसे आया ये काफी चौंकाने वाला है. उन्होंने बताया कि इस शैवाल से कोई खतरा नहीं है लेकिन इससे बर्फ जल्दी से पिघलने लगेगी. आमतौर पर बर्फ सूरज की सारी गारी को रिफ्लेक्ट कर देती है लेकिन रंग बदलने के बाद ये उसे सोखने लगेगी और जल्दी पिघलेगी. इस शैवाल का नाम Ancylonema nordenskioeldii बताया जा रहा है.

 
अंटार्कटिका में हरी हो गयी थी बर्फबीते दिनों अंटार्कटिका में भी कई जगह हरे रंग की बर्फ नज़र आई थी. यहां भी वैज्ञानिकों ने पहाड़ों के सफेद से हरे रंग में बदलने की वजह शैवाल को बताया है. उनका कहना है कि अंटार्कटिका में लंबे समय से शैवाल मौजूद हैं. वैज्ञानिकों ने कहा कि वहां शैवाल की मौजदूगी बढ़ गई है, जिस कारण पहाड़ों पर जमी बर्फ का रंग सफेद से बदलकर हरा होने लगा है. 




रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने बताया है कि वो इस बात की जांच कर रहे हैं कि शैवाल कहां से बढ़ रहे हैं और क्या भविष्य में इनके तेजी से बढ़ने की गुंजाइश है. शैवाल की खासियत होती है कि वो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके में यूके की पेट्रोल कारों के सफर की वजह से कार्बन का उत्सर्जन काफी बढ़ा है. वैज्ञानिक सिर्फ हरे रंग की नहीं बल्कि लाल और नारंगी रंग के शैवाल पर भी शोध कर रहे हैं.
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