चीनी सागर के बाद अब हिंद महासागर में पैठ बढ़ाने की चीनी सेना कर रही है तैयारी!

चीनी सागर के बाद अब हिंद महासागर में पैठ बढ़ाने की चीनी सेना कर रही है तैयारी!
चीनी सेना की पनडुब्बियां

फॉर्ब्स पत्रिका के अनुसार चीन आने वाले समय में हिंद महासागर (Indian Ocean) की ओर अपनी पनडुब्बियों (Chinese submarines) का रुख मोड़ सकता है. जाहिर सी बात है कि अगर चीन ऐसा करता है तो इससे भारत के साथ-साथ दुनिया की चिंताएं बढ़ सकती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 27, 2020, 11:21 AM IST
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बीजिंग. चीन ना सिर्फ कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर बल्कि इन दिनों अपनी कूटनीति के चलते दुनिया में बैचेनी का माहौल तैयार कर रहा है. चीन ना सिर्फ भारत को ही परेशान कर रहा है बल्कि वह कई देशों को परेशान कर रहा है. फॉर्ब्स पत्रिका के अनुसार चीन आने वाले समय में हिंद महासागर (Indian Ocean)  की ओर अपनी पनडुब्बियों (Chinese submarines) का रुख मोड़ सकता है. जाहिर सी बात है कि अगर चीन ऐसा करता है तो इससे दुनिया की चिंताएं बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अगर चीन हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियां तैनात करता है तो इससे उसे भारत से युद्ध के समय ताकत मिलेगी. हालांकि इसे देखते हुए अमेरिका ने एशिया में सैनिकों की तैनाती करने का ऐलान कर दिया था.

दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा पनडुब्बियां भारत के पास

गौरतलब है कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत के पास सबसे ज्यादा पनडुब्बियां हैं. इससे इतर चीन द्वारा नौसेना का लगातार विस्तार करना दुनिया को चिंतित कर रहा है. चीनी पनडुब्बियों ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान और श्रीलंका में पोर्ट कॉल का भुगतान किया है।अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीनी कम्युनिष्ट पार्टी को भारत समेत एशिया के अन्य देशों के लिए खतरा बताते हुए कहा था कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) को काउंटर करें. इससे इतर वर्तमान समय में चीन का सबसे ज्यादा ध्यान चीनी सागर पर है और फिलहाल हिंद महासागर को पर उसका ध्यान कम है.



चीनी सागर पर है चीन का ध्यान
इस रिपोर्ट के अनुसार शांति के समय चीनी पनडुब्बियां स्ट्रेट ऑफ मलक्का के जरिए से हिंद महासागर में प्रवेश कर सकती हैं. हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि चीन अभी भी भारत को संदेश देने के लिए अभी ऐसा कर सकता है लेकिन इस समय दुनिया की निगाह भारत—चीन के सीमा विवाद को लेकर उठ खड़े हुए विवाद पर बनी हुई है.

युद्ध के दौरान चीन यह मार्ग अपना सकता है

युद्ध के दौरान, चीनी पनडुब्बियां सुंडा स्ट्रेट या लोम्बोक स्ट्रेट से आ सकती हैं. ये इंडोनेशियाई श्रृंखला के बीच से गुजरते हैं जो प्रशांत और हिंद महासागर को अलग करते हैं। सिंगापुर से सटे मलक्का स्ट्रेट से यह फायदा है कि इससे पनडुब्बियां पूर्वी महासागर के गहरे पानी में पहुंच सकती हैं. इसके बाद वहां से वे अपने लक्ष्य की ओर आसानी से बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार सुंडा स्ट्रेट सबसे छोटा रास्ता है लेकिन यह पूर्वी क्षेत्र में काफी उथल-पुथल वाला है. इस हालात में चीन लोम्बोक स्ट्रेट को प्राथमिकता दे सकता है. एक बार हिंद महासागर में घुसने के बाद, पनडुब्बियों को चीन लौटाए बिना वहां पुनः स्थापित किया जा सकता था. मालूम हो कि चीनी नौसेना ने पहले ही अफ्रीका के जिबूती में एक बेस बनाया है.

चीन ने इन देशों में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई

पाकिस्तान के ग्वादर में चीन एक बंदरगाह बना रहा है. उसका काम बड़े व्यापक स्तर पर चल रहा है. जाहिर सी बात है कि चीन इसके निर्माण के बाद इस बंदरगाह का इस्तेमाल भी अपने फायदे के लिए करेगा. ग्वादर बंदरगाह चीन के हित में है क्योंकि यह चीन की जमीन से जुड़ा हुआ है. वहीं, यदि हिंद महासागर में चीन एक स्थायी स्क्वाड्रन बनाता है तो फिर, उसके प्राकृतिक आधार ग्वादर और जिबूती होंगे. मालदीव में एक छोटा सा द्वीप भी है, जिसे चीन रिसोर्ट के रूप में विकसित कर रहा है. योजनाकारों का मानना है कि यह कुछ परिदृश्यों में बेस या निगरानी स्टेशन के रूप में कार्य कर सकता है.

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वहीं, चीन को काउंटर करने के लिए भारत भी पूरी तरह से मुस्तैद है. भारतीय नौसेना भी अपनी क्षमताओं को बढ़ा रही है और खतरे का मुकाबला करने के लिए अपने ऑपरेटिंग पैटर्न को संशोधित कर रही है. इस बात के प्रमाण हैं कि भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पनडुब्बियों को तैनात करने की क्षमता का परीक्षण कर रहा है. यह मलक्का स्ट्रेट में पनडुब्बी गतिविधि की निगरानी करने के लिए महत्वपूर्ण है.
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