यूरोप में फंसे नागरिकों के लिए भारतीय मिशन, इस तरह पहुंचाई जा रही मदद

यूरोप में फंसे नागरिकों के लिए भारतीय मिशन, इस तरह पहुंचाई जा रही मदद
ब्रिटेन में कुछ प्रतिबंध पूरे साल जारी रह सकते हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण फैलने के बाद यूरोप (Europe) में फंसे भारतीयों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय अपने दूतावास के जरिए कई तरह के मिशन चला रही है.

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कोरोना वायरस (Cornavirus) के चलते यूरोप (Europe) में फंसे अपने नागरिकों को मदद पहुंचाने के लिए भारत कई तरह के मिशन (mission) चला रहा है. यूरोप में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से इन नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन परेशानियों से उन्हें निकालने के लिए विदेश मंत्रालय ने कई मिशन चला रखे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में फंसे भारतीयों को मेडिकल सलाह, वीजा एक्सटेंशन की सुविधा और कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को जानकारी मुहैय्या करवाने जैसी मदद दी जा रही है.

विदेश मंत्रालय उन मंत्रालयों में से एक है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलते ही सबसे पहले हरकत में आई. विदेश मंत्रालय ने कोविड-19 नाम से सेल बनाया है. इसमें 24 घंटे करीब 75 अधिकारी काम कर रहे हैं. छोटे-छोटे भौगोलिक हिस्सों को टारगेट करते हुए छोटे ग्रुप्स बनाए गए हैं. इन सबके साथ विदेशों में फंसे भारतीयों को निकालने और उन तक मदद पहुंचाने के लिए मिशन चलाए जा रहे हैं.



लंदन में हजारों भारतीयों तक पहुंचाई गई मदद



लंदन में भारतीय दूतावास ने हजारों भारतीयों तक मदद पहुंचाई है. इनमें भारतीय छात्र, प्रोफेशनल्स और शॉर्ट टर्म वीजा वाले टूरिस्ट शामिल हैं. सबसे बड़ी चुनौती इन्हें रहने की जगह उपलब्ध करवाना, खाना पहुंचाना, हेल्थ केयर की सुविधा और वीजा एक्सटेंशन जैसी सुविधाएं देना है.

भारतीय दूतावास स्वयंसेवी संस्थाओं, स्टूडेंट बॉडी और कम्यूनिटी सपोर्ट के साथ मिलकर भारतीयों को रहने की जगह और खाना उपलब्ध करवा रही है. मेडिकल हेल्प चाहने वालों की तीन तरह से मदद की जा रही है- स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए उन्हें टेलीफोनिक कंसलटेशन की सुविधा दी जा रही है, मिशन के पैनल वाले डॉक्टरों की कंसलटेशन उपलब्ध करवाई जा रही है, इसके साथ ही एक ऐप के जरिए हॉस्पिटल से कंसलटेशन की मदद भी दी जा रही है.

जर्मनी में भारतीय दूतावास चला रही है मिशन
जर्मनी के बर्लिन, फ्रैंकफर्ट, हैम्बर्ग और म्यूनिख में इस तरह के मिशन चलाए जा रहे हैं. जर्मनी में कोरोना वायरस के संक्रमण ने बुरी तरह से कहर बरपाया है. 31 मार्च तक यहां संक्रमण के 67 हजार मामले सामने आए हैं. जर्मनी में सभी भारतीयों तक मदद पहुंचाई जा रही हैं. इनमें करीब 22 हजार भारतीय छात्र भी शामिल हैं.

किसी भी तरह की गलत सूचना और अफवाह से बचने के लिए कांसुलेट ने हेल्प लाइन नंबर और ईमेल जारी किए हैं. यहां हर दिन करीब 5 हजार फोन कॉल्स और करीब ढाई हजार मेल आ रहे हैं. सबसे ज्यादा फोन ऐसे स्टूडेंट्स के आते हैं, जो अकेले रह रहे हैं और ऐसी स्थिति में बस उन्हें किसी से बात करनी होती है.

दूतावास और वाणिज्य दूतावास रेगुलर वीडियो मैसेज जारी कर रहे हैं. इसमें भारतीय और जर्मनी की सरकार के दिशा निर्देशों के बारे में जानकारी दी जाती है. इन सबका बड़ा अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.
करीब 60 भारतीय संगठन और करीब 30 स्टूडेंट बॉडी जर्मनी में फंसे भारतीयों की मदद कर रही है. खासकर बुजुर्गों और मेडिकल हेल्प चाहने वालों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है.

स्विटजरलैंड में फंसे भारतीयों तक पहुंचाई जा रही मदद
स्विटजरलैंड में फंसे भारतीय पर्यटकों और छात्रों का एक डेटाबेस बनाया गया है. उन्हें लगातार हेल्थ एडवाइजरी और दूसरी जानकारियां दी जा रही हैं. स्विटजरलैंड के विभिन्न इलाकों में भारतीय संगठनों और उनके मजबूत कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया गया है.स्विटजरलैंड में चल रहे मिशन में सिटी मेयर और यूनिवर्सिटी के टीचर्स की मदद भी ली जा रही है.

नीदरलैंड के भारतीय दूतावास में भी इसी तरह का मिशन चलाया जा रहा है. वहां फंसे भारतीयों, खासकर छात्रों तक मदद पहुंचाई जा रही है. एम्सटर्डम एयरपोर्ट पर करीब 115 भारतीयों का एक समूह फंसा था, इन तक मदद पहुंचाई गई. 22 मार्च को एक स्पेशल फ्लाइट के जरिए इन्हें भारत लाया गया. इस मिशन की एक महिला सदस्य ने एक ग्रुप में शामिल एक गर्भवती महिला की भी मदद की, जिसे मेडिकल हेल्प की जरूरत थी.

फिलहाल नीदरलैंड में 34 भारतीय फंसे हैं. इनमें 20 शॉर्ट टर्म वीजा और ट्रांजिट वीजा वाले टूरिस्ट हैं, जबकि 14 स्किल्ड वर्कर्स हैं.

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First published: April 3, 2020, 5:50 PM IST
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