ये हैं चीन की वो फोन कंपनियां जिन्हें दुनिया मानती है खतरा, भारत भी है सतर्क

ये हैं चीन की वो फोन कंपनियां जिन्हें दुनिया मानती है खतरा, भारत भी है सतर्क
चीन की इन दो फोन कंपनियों को अमेरिका ने बताया खतरा

चीन की दो ऐसी कंपनियां हैं जिन्हें दुनिया के ज्यादातर देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हैं. अमेरिका ने भी चीनी कंपनी हुवावे (Huawei) और ज़ेडटीई (ZTE )को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि ये चीन के लिए दूसरे देशों में जासूसी करती हैं.

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बीजिंग. भारत के 59 चीनी ऐप्स (India Banned Chinese Appps) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमेरिका (US) में भी टिकटॉक (TikTok) और अन्य चायनीज ऐप्स पर बैन लगाने की मांग उठनी शुरू हो गयी है. हालांकि चीन की दो ऐसी कंपनियां हैं जिन्हें दुनिया के ज्यादातर देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हैं. अमेरिका ने भी चीनी कंपनी हुवावे (Huawei) और ज़ेडटीई (ZTE )को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि ये चीन के लिए दूसरे देशों में जासूसी करती हैं.

अमेरिका की संचार मामलों की नियामक संस्था फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के चेयरमैन अजित पई ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि ये दोनों कंपनियां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की सेना के साथ करीबी संबंध रखती हैं. आरोप है कि चीनी सेना से जुड़े लोग इन कंपनियों में प्रमुख पदों पर भी हैं. दूसरी तरफ चीन के कानून के मुताबिक अगर चीन की इंटेलिजेंस सर्विसेज़ चीन की किसी कंपनी जैसे हुवावे और ज़ेडटीई से कोई जानकारी मांगती हैं तो उनके लिए ये जानकारी साझा करना अनिवार्य है. इसके अलावा ये कंपनियां इन जानकारी के चीनी सरकार या सेना के साझा करने की बात को भी सार्वजनिक करने का अधिकार नहीं रखती हैं.

डेटा चोरी का नहीं चलेगा पता
अजित पई के मुताबिक अगर कोई हुवावे या ऐसी ही किसी चीनी कंपनी का सामान इस्तेमाल करता है तो उसे कभी पता भी नहीं चलेगा कि उनका डेटा चोरी हो गया है. खासकर फोन और टेलिकॉम से जुड़ी कंपनियों के मामले में ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रुरत है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ऐसा खतरा लेने के लिए तैयार नहीं है.
बता दें कि अमेरिका ने अपनी घरेलू टेलीकॉम कंपनियों से हुवावे और जेडटीई के सामान पर निर्भरता ख़त्म करने के लिए कहा है. पई ने भारत के चीनी ऐप्स पर लगाए प्रतिबंध को भी महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में चीन की टेक कंपनियों को लेकर चिंताएं हैं क्योंकि इन पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का सीधा असर है. ये कंपनियां राष्ट्रीय सीमाओं की परवाह नहीं कर रही हैं और आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से ये खतरनाक है.
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