किम जोंग-उन के बाद बहन किम यो-जोंग होंगी उत्तर कोरिया की अगली सुप्रीम लीडर!

उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग
उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग

सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन (Kim Jong Un) की बहन किम यो-जोंग (Kim yo Jong) अभी कोई 33 साल की हैं इसलिए सत्ता उनके अपनों के पास रहे इसलिए भी वह अपनी बहन को देश की राजनीति के केंद्र में बनाए रखना चाहते हैं.

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  • Last Updated: June 20, 2020, 11:00 AM IST
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प्योंगयांग. उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन (Kim Jong Un) की बहन किम यो-जोंग (Kim yo Jong) बीते वर्षों में ​दुनिया में एक ताकतवर शख्स के बतौर छवि बना पाने में कामयाब हो पाई हैं. इस साल अप्रैल महीने में किम यो-जोंग का नाम सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन के उत्तराधिकारी (Sucessor) के रूप में खूब जोरशोर से चर्चा में आया. दरअसल इस महीने सुप्रीम लीडर किम सार्वजनिक जीवन से कई ​हफ्तों के लिए दूर हो गए थे और उनके गायब और मौत तक की अटकलें लगाई जाने लगी थीं.

2018 में पहली बार सुर्खियों में आईं किम यो-जोंग

किम यो-जोंग वर्ष 2018 में पहली बार सुर्खियों में आईं. वे किम वंश की पहली सदस्य थीं जो दक्षिण कोरिया शीत ओलंपिक के दौरान एक शिष्टमंडल का सदस्य बनकर गईं थी. दोनों देशों ने मिलकर एक टीम के बतौर शीत ओलंपिक में भाग लिया था. वे इस दौरान अपने भाई किम जोंग-उन के साथ मिलकर देश के लिए रणनीति तैयार करती हुई नजर आने लगी थी. किम यो-जोंग वर्तमान सुप्रीम लीडर किम जोंग के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं. सत्ता का समीकरण किम यो जोंग के पक्ष में इस तरह से भी रहा है कि उनकी शादी किम जोंग-उन के दाएं हाथ माने जाने वाले पार्टी के सचिव चॉय रयोंग-हे के बेटे से हुई है. सुप्रीम लीडर की बहन किम यो-जोंग अभी कोई 33 साल की हैं इसलिए सत्ता उनके अपनों के पास रहे इसलिए भी वह अपनी बहन को देश की राजनीति के केंद्र में बनाए रखना चाहते हैं.



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किम यो-जोंग का राजनीतिक कद सबसे पहले अक्टूबर, 2017 में बढ़ा जब वो ताकतवर पोलित ब्यूरो की सदस्य बनीं. इससे पहले वो उस महकमे की उप निदेशक थीं जो किम जोंग-उन की सार्वजनिक छवि और नीतियों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभालता है. किम जोंग-उन ने 2018 में दक्षिण कोरियाई सुप्रीम लीडर मून जे-इन, चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी. इन मुलाकातों ने किम यो-जोंग के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति का रास्ता खोला था. इस मौके को किम यो—जोंग ने बहुत कुशलता से भुनाया. किम यो-जोंग ने वर्ष 2014 से ही अपने भाई किम जोंग-उन की छवि को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और इस काम के चलते वह उनकी प्रिय और विश्वसनीय होती चली गईं.

हनोई वार्ता असफल होने के बाद एक बार कमजोर हुई थीं इनकी भूमिका

किम जोंग-उन जब भी सार्वजनिक जगहों पर दिखते हैं, उसका पूरा इंतज़ाम किम यो-जोंग ही करती हैं. इसके अलावा वो अपने भाई की राजनीतिक सलाहकार भी हैं. माना जाता है कि साल 2019 में जब अमरीका के साथ उत्तर कोरिया की हनोई शिखरवार्ता असफल होने के बाद पोलित ब्यूरो में कुछ हद तक उनकी भूमिका कमज़ोर कर दी गई थी. हालांकि साल 2020 में वो वापस अपनी पुरानी भूमिका में लौट आईं.

हाल ही में किम यो-जोंग ने उत्तर और दक्षिण कोरिया सीमा पर सैन्यरहति इलाके में सेना भेजने की धमकी दी थी. इससे पहले उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया था कि दक्षिण कोरिया सीमा पार से आने वाले सत्ताविरोधी कार्यकर्ताओं और बैलून के रूप में प्रचार सामग्री को रोकने में असफल रहा है.दोनों देश के साझा दफ्तर को नष्ट करने की धमकी भी दी थी और बाद में इस इमारत में एक धमाका हुआ और धुआं उठता हुआ दिखाई दिया.दक्षिण कोरिया ने आधिकारिक रूप से इस दफ्तर के नष्ट होने की पुष्टि भी की थी. उत्तर कोरिया ने मार्च 2019 में इस दफ़्तर से ख़ुद को अलग कर लिया था. 2018 में बातचीत के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए यह कार्यालय बनाया था. इसकी मरम्मत के लिए दक्षिण कोरिया ने 8 मिलियन डॉलर रुपये दिए थे.

परिवार की बहुत ही लाडली हैं किम यो-जोंग

किम यो-जोंग किम जोंग-इल की सबसे छोटी बेटी हैं. उनकी, किम जोंग-उन और किम जोंग-चोल एक ही मां की संतानें हैं. किम जोंग-चोल, किम जोंग-उन और किम यो-जोंग के भाई हैं और राजनीति में उन्हें बहुत वरिष्ठ नहीं माना जाता है. 1987 में जन्मी किम यो-जोंग अपने भाई किम जोंग-उन से उम्र में चार साल छोटी हैं. दोनों भाई-बहन ने स्विटज़रलैंड में साथ रहकर पढ़ाई की है.

सत्ता की बागडोर मिलने की संभावना प्रबल

किम जोंग-उन के उत्तराधिकारी को चुनना हो तो इसमें पारिवारिक रिश्तों की महत्वूर्ण भूमिका होगी. उत्तर कोरिया के प्रॉपगैंडा और राजनीतिक सिद्धातों की शुरुआत देश के संस्थापक किम इल-सुंग ने की थी. माना जाता है कि किम जोंग-उन के बच्चे तो हैं लेकिन वो अभी काफ़ी छोटे हैं. ऐसे में चूंकि किम यो-जोंग परिवार की सदस्य हैं इसलिए, उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया मानती है कि किम जोंग-उन के बाद सत्ता की बागडोर उनके ही हाथों में होगी.
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