मालदीव फिर से राष्ट्रमंडल में शामिल, करीब 3 साल पहले हुआ था अलग

मालदीव के सुंदर समुद्र तट का एक नजारा (सांकेतिक तस्वीर, रॉयटर्स)

मालदीव राष्ट्रमंडल (Commonwealth) में ऐसे समय फिर से शामिल हुआ है जब ब्रिटेन 47 साल सदस्य रहने के बाद यूरोपीय संघ (European Union) से अलग हुआ है.

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    लंदन. मालदीव (Maldives) को राष्ट्रमंडल (Commonwealth) में आधिकारिक रूप से शनिवार को फिर से शामिल कर लिया गया. मालदीव ने करीब तीन वर्ष पहले अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड (Human Rights Record) की आलोचना को लेकर राष्ट्रमंडल से अलग हो गया था.

    मालदीव राष्ट्रमंडल (Commonwealth) में ऐसे समय फिर से शामिल हुआ है जब ब्रिटेन 47 साल सदस्य रहने के बाद यूरोपीय संघ (European Union) से अलग हुआ है.

    निलंबन की चेतावनी के बाद राष्ट्रमंडल से अलग हुआ था मालदीव
    मालदीव अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड और लोकतांत्रिक सुधार (Democratic Reform) पर प्रगति के अभाव को लेकर निलंबित किये जाने की चेतावनी के बाद राष्ट्रमंडल से अलग हो गया था.

    मालदीव ने राष्ट्रमंडल से फिर से जुड़ने का अनुरोध दिसंबर 2018 में किया था जब उसके राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह (Ibrahim Muhammad Soleh) ने राष्ट्रमंडल महासचिव पैट्रीशिया स्कॉटलैंड को पत्र लिखा था.

    'राष्ट्रमंडल के सदस्य मालदीव के शामिल होने पर खुश'
    बैरोनेस स्कॉटलैंड ने मालदीव और उसके लोगों का राष्ट्रमंडल में स्वागत करते हुए कहा, ‘‘मालदीव में जारी सुधार प्रक्रिया राष्ट्रमंडल के मूल्यों और सिद्धांतों (Values ​​and Principles) के अनुरूप है और हम देश को इस मार्ग पर चलना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.’’

    उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल के सदस्य इन घटनाक्रम को लेकर प्रसन्न हैं और मालदीव की गणना परिवार के सदस्य के रूप में करके खुश हैं. हम साथ मिलकर मालदीव (Maldives) को उसकी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में सहयोग करेंगे.’’

    भारत ने मालदीव के राष्ट्रमंडल में शामिल होने का किया था समर्थन
    भारत उन देशों में शामिल था जिन्होंने देश के राष्ट्रमंडल (Commonwealth) में फिर से प्रवेश का समर्थन किया था.

    मालदीव के राष्ट्रपति सोलेह ने कहा, ‘‘आज मालदीव के लोगों के लिए खुशी का दिन है क्योंकि हम राष्ट्रमंडल देशों के परिवार में लौटे हैं. एक युवा लोकतंत्र के रूप में, राष्ट्रमंडल का लोकतंत्र, मानवाधिकारों, सुशासन, बहुपक्षवाद और विश्व शांति (world Peace) को बढ़ावा देने के मूलभूत मूल्य हमारे लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं.’’

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