भारत के समर्थन में चीन पर भड़का US, कहा- यही है कम्युनिस्ट पार्टी का असली चेहरा

भारत के समर्थन में चीन पर भड़का US, कहा- यही है कम्युनिस्ट पार्टी का असली चेहरा
अमेरिका ने भारत के प्रति आक्रामक रवैये के लिए चीन की निंदा की है.

व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव केली मैक्नेनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हवाले से कहा कि 'इलाके में भारत सहित दूसरे देशों के प्रति चीन का आक्रामक रवैया उसकी कम्युनिस्ट पार्टी वाली सत्ता का असली चेहरा है.'

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वॉशिंगटन. भारत-चीन सीमा विवाद (India-China Border Dispute) पर भारत को लगातार अमेरिका (US) की तरफ से समर्थन मिल रहा है. इसी क्रम में अमेरिका ने चीन (China) को उसके पड़ोसी देशों खासकर भारत के प्रति लगातार आक्रामक रवैये के लिए चेतावनी दी है. अमेरिका ने कहा है कि चीन भारत के खिलाफ लगातार आक्रामक है और उसे अपनी इस नीति पर फिर से विचार कर लेना चाहिए. व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव केली मैक्नेनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हवाले से कहा कि 'इलाके में भारत सहित दूसरे देशों के प्रति चीन का आक्रामक रवैया उसकी कम्युनिस्ट पार्टी वाली सत्ता का असली चेहरा है.'

मैक्नेनी ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद और तनाव के बीच अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकले. चीन से जुड़े एक सवाल के जवाब में मैक्नेनी ने कहा- 'भारत-चीन संबंध में हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. राष्ट्रपति की नजर भी इस पर है और उन्होंने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर चीन का जो रुख है, वो चीन के बड़े स्तर पर अपनाए गए आक्रामक रुख का हिस्सा है. चीन की यह हरकतें चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी का असली चेहरा हैं.' इससे पहले कांग्रेस की एक सुनवाई के दौरान अमेरिकी सांसदों ने भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर (LAC) चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी. हाउस इंटेलीजेंस कमिटी के अध्यक्ष एडम शिफ ने कहा, 'इस पिछले महीने में चीन LAC पर घातक झड़पों में लिप्त रहा है, जिसमें दर्जनों भारतीय जवानों की जानें गई हैं. वहीं चीनी सेना में भी कुछ सैनिकों की मौतें हुई हैं.'

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चीनी सेना की वजह से भड़की हिंसा
ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो तन्वी मदान ने सीनेट कमेटी को बताया कि मई की शुरुआत से ही चीनी सेना LAC पर दोनों देशों के बीच स्थित वास्तविक सीमा पर यथास्थिति को बदलने की लगातार कोशिशें कर रही है. उन्होंने कहा कि चीनी सेना की यह हरकत और कोरोनावायरस महामारी के चलते भारत, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को लेकर नजरिया प्रभावित हुआ है और होता रहेगा. मदान ने कहा कि अक्टूबर, 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले थे तो उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात की थी.

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मदान के मुताबिक पिछले कुछ दशकों की कोशिशों के बाद भी दोनों देशों के संबंध बहुत ही स्तरीय और प्रतिस्पर्धात्मक हैं, जो कभी भी संघर्ष में बदल सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने चीन को इशारे दिए हैं कि सीमा विवाद, खासकर यथास्थिति को दोबारा लागू न करने पर बडे़ स्तर पर संबंधों पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चीन को लेकर सार्वजनिक दृष्टिकोण के लिहाज से गिरावट आई है, वहीं भारत में बड़े स्तर पर चीन के खिलाफ माहौल देखा जा रहा है. वहां यह माना जा रहा है कि चीन के साथ संबंधों का एक बार आकलन करना जरूरी है.

अमेरिका में भी उठने लगी टिकटॉक पर प्रतिबंध की मांग
भारत में टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध की चर्चा अमेरिका में भी हो रही है और कुछ सांसद इसका समर्थन कर रहे हैं. इन सासंदों ने अमेरिकी सरकार से इस पर विचार करने की अपील की है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि छोटे छोटे वीडियो शेयर करने वाले ऐप किसी भी देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. भारत ने 29 जून को टिकटॉक, यूसी ब्राउजर समेत 59 चीनी ऐप को यह कहते हुए प्रतिबंधित कर दिया कि यह देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के लिए नुकासनदेह हैं.

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यह प्रतिबंध लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के, चीनी सैनिकों के साथ चल रहे गतिरोध के बीच लगाया गया है. इन प्रतिबंधित ऐप की सूची में वीचैट और बिगो लाइव भी शामिल हैं. रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर जॉन कॉर्निन ने द वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर को टैग करते हुए अपने ट्वीट में कहा, 'खूनी झड़प के बाद भारत ने टिकटॉक और दर्जनों चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया.' वहीं रिपब्लिकन पार्टी के ही सांसद रिक क्रोफोर्ड ने कहा, 'टिकटॉक को जाना ही चाहिए और इसे तो पहले ही प्रतिबंधित कर देना चाहिए था.' पिछले सप्ताह अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने आरोप लगाया था कि चीनी सरकार टिकटॉक का इस्तेमाल अपने उद्देश्यों के लिए कर रही है. अमेरिकी संसद में कम से कम वैसे दो विधेयक लंबित हैं जिनमें संघीय सरकारी अधिकारियों को अपने फोन पर टिकटॉक का इस्तेमाल करने से रोकने के प्रावधान हैं.
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