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हर तरफ कोहराम मचा रहा वायु प्रदूषण, 2019 में यूरोपीय यूनियन में हुई 3 लाख की मौत

हर तरफ कोहराम मचा रहा वायु प्रदूषण, 2019 में यूरोपीय यूनियन में हुई 3 लाख की मौत

नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. (फाइल फोटो)

नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. (फाइल फोटो)

Air Pollution Death in European Union: यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी (EEA) ने द्वारा सोमवार को जारी की गई नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट कहती है कि साल 2019 में वायु प्रदूषण की वजह से यूरोपीय यूनियन में तीन लाख लोगों से ज्यादो लोगों की मौत हुई है. रिपोर्ट ये भी कहती है कि अगर नई गाइडलाइंस को माना गया होता तो शायद ये मौतें रोकी जा सकती थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस साल जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स मानकों को अपनाकर इन मौतों में 58 फीसदी तक की कमी की जा सकती है.

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    नई दिल्ली. वायु प्रदूषण की वजह से यूरोपीय यूनियन (EU) में सिर्फ एक साल के भीतर तीन लाख से ज्यादा लोगों (more than 3 lakh deaths) ने जान गंवाई है. यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी (EEA) ने द्वारा सोमवार को जारी की गई नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट कहती है कि साल 2019 में वायु प्रदूषण की वजह से यूरोपीय यूनियन में तीन लाख से लोगों से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. रिपोर्ट ये भी कहती है कि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई गाइडलाइंस को माना गया होता तो शायद ये मौतें रोकी जा सकती थीं.

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में 2018 की तुलना में 2019 की हवा बेहतर हुई. यानी नाइट्रोजन डाईऑक्साइड और ग्राउंड लेवल ओजोन का स्तर सुधरा. ये एक सकारात्मक संकेत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस साल जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स मानकों को अपनाकर इन मौतों में 58 फीसदी तक की कमी की जा सकती थी.

    मानकों को और सख्त कर दिया गया है
    दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अब मानकों को और सख्त कर दिया है. WHO की गाइडलाइंस में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि प्रदूषित हवा का मानवीय स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव होता है. इसी के मद्देनजर प्रदूषण के मानकों को सख्त किया गया है.

    नई गाइडलाइंस के मुताबिक ये हैं नए मानक
    नई गाइडलाइंस के मुताबिक सालाना PM2.5 का औसत 5 ug/m3 होना चाहिए. इससे पहले 2005 में ये सीमा 10 ug/m3 की गई थी. वहीं PM10 का सालाना औसत 15 ug/m3 कर दिया गया है जो पहले 20 ug/m3 था.

    ‘वायु प्रदूषण दुनिया के सभी देशों में स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है’
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया टेडरॉस अधानोम गेब्रेयेसुस ने कहा था-वायु प्रदूषण दुनिया के सभी देशों में स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है. लेकिन इसका सर्वाधिक असर गरीब और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ता है. नई गाइडलाइंस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तय की गई हैं. मैं सभी देशों से आग्रह करता हूं कि इनका पालन कर वो सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करें.

    Tags: Air pollution, European union, WHO

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