रईसी की धमकी के बाद अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरान के 36 वेबसाइट्स को किया ब्लॉक

इन वेबसाइट्स पर अमेरिका में दुष्प्रचार करने का आरोप है.

इन वेबसाइट्स पर जाने पर अमेरिका सरकार की ओर से अलर्ट आ रहा है. इसमें कहा गया है कि वेबसाइट के खिलाफ एक्‍शन कानून लागू करने की कार्रवाई का हिस्‍सा है. इसके साथ ही अमेरिका सरकार ने फलस्‍तीन टीवी न्‍यूज वेबसाइट के डोमेन नाम पर भी कब्‍जा कर लिया है.

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    वॉशिंगटन. ईरान के नए राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi) की धमकी के बाद अमेरिका (America) ने बड़ा एक्शन लिया है. अमेरिका के न्‍याय विभाग और वाणिज्‍य विभाग ने ईरान की 36 वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया है. इन वेबसाइट्स पर अमेरिका में दुष्प्रचार करने का आरोप है. जिन वेबसाइट्स (News Websites) को ब्लॉक किया गया है, उसमें ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की अंग्रेजी वेबसाइट, यमन के हूती विद्रोहियों का अल मसीराह सैटलाइट न्‍यूज चैनल और ईरान का सरकारी अरबी भाषा का टीवी चैनल अल-अलम शामिल है.

    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह एक ऐसा कदम है, जिसे ईरानी मीडिया पर एक दूरगामी कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है. अमेरिकी सरकार ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

    वेबसाइट्स खोलने पर आ रहा ये मैसेज
    न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक, इन वेबसाइट्स पर जाने पर अमेरिका सरकार की ओर से अलर्ट आ रहा है. इसमें कहा गया है कि वेबसाइट के खिलाफ एक्‍शन कानून लागू करने की कार्रवाई का हिस्‍सा है. इसके साथ ही अमेरिका सरकार ने फलस्‍तीन टीवी न्‍यूज वेबसाइट के डोमेन नाम पर भी कब्‍जा कर लिया है. यह वेबसाइट गाजा में सक्रिय हमास और इस्‍लामिक ज‍िहाद की विचारधारा को पेश करती थी. इस वेबसाइट पर भी वही नोटिस आ रहा है.

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    पिछले साल 100 वेबसाइट्स हो गई थी बंद
    पिछले साल अमेरिका के न्‍याय विभाग ने ऐलान किया था कि उसने ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीब 100 वेबसाइटों को बंद कर दिया है. अमेरिका के न्‍याय विभाग के मुताबिक, ये वेबसाइट्स 'वैश्विक दुष्‍प्रचार अभियान' को चला रही थीं. इनका मकसद अमेरिका की नीतियों को प्रभावित करना और ईरानी प्रोपेगैंडा का दुनियाभर में प्रसार करना था.

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    परमाणु समझौता चर्चा में क्यों?
    दरअसल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 2015 में किए गए ऐतिहासिक परमाणु समझौते को दोबारा लागू करवाने की कवायद तेज हो गई है. इसे लेकर रविवार को ईरान और दुनिया के पांच शक्तिशाली देशों के राजनयिकों के बीच बातचीत हुई. इसमें अमेरिका भी शामिल है. बैठक में शामिल कई राजनयिकों ने कहा कि उन्होंने जिन मुद्दों पर बातचीत की है, उन्हें संबंधित देशों की सरकारों द्वारा मंजूरी मिलना जरूरी है.

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