खुफिया एजेंसियों से बाइडन ने कहा- कोरोना कैसे पैदा हुआ, 90 दिन में दें रिपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने बुधवार को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से कोविड-19 (Coronavirus) महामारी की उत्पत्ति की जांच के अपने प्रयासों को 'दोगुना' करने के लिए कहा.

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वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने बुधवार को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से कोविड-19 (Coronavirus) महामारी की उत्पत्ति की जांच के अपने प्रयासों को 'दोगुना' करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि यह निष्कर्ष निकालने के लिए अपर्याप्त सबूत हैं कि 'क्या यह किसी संक्रमित जानवर के साथ मानव संपर्क से उभरा है या प्रयोगशाला में हुई दुर्घटना से उभरा है.'

बाइडन ने एक बयान में कहा, 'अधिकांश खुफिया समुदाय को यह नहीं लगता है कि इसका आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी है कि किसकी संभावना अधिक है.' उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को जांच में सहायता करने का निर्देश दिया और चीन से महामारी की उत्पत्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच में सहयोग करने का आह्वान किया.

90 दिन में दें रिपोर्ट- बाइडन

उन्होंने कहा, 'अमेरिका दुनिया भर में समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम करता रहेगा ताकि चीन पर पूर्ण, पारदर्शी, साक्ष्य-आधारित अंतरराष्ट्रीय जांच में भाग लेने और सभी प्रासंगिक आंकड़ों एवं साक्ष्यों तक पहुंच प्रदान करने के लिए दबाव डाला जा सके.' उन्होंने इस संभावना को खारिज कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय जांच में पूरी तरह से सहयोग करने में चीनी सरकार के इनकार को देखते हुए एक निश्चित निष्कर्ष कभी नहीं निकाला जा सकता है.
बाइडन ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को जांच में सहायता करने का निर्देश दिया और चीन से महामारी की उत्पत्ति में अंतरराष्ट्रीय जांच में सहयोग करने का आह्वान किया.

चीन कोविड-19 के वुहान प्रयोगशाला से लीक होने के आरोप की स्वतंत्र जांच पर खामोश

इससे पहले चीन (China) ने बुधवार को यह प्रश्न टाल दिया कि क्या वह वुहान विषाणु विज्ञान संस्थान (WIB) से कोविड-19 (Covid-19) के लीक होने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की अनुमति देगा या नहीं. वहीं चीन के शोधार्थियों ने दावा किया है कि यह संक्रमण पैंगोलिन (एक प्रकार की छिपकली) से मनुष्य तक पहुंचा हो. कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर स्वतंत्र जांच की मांग अमेरिका की नयी रिपोर्ट के बाद और तेज हुई है जिसमें कहा गया है कि डब्ल्यूआईवी के कुछ शोधकर्ता चीन द्वारा 30 दिसंबर 2019 को कोविड-19 के आधिकारिक ऐलान से पहले ही बीमार पड़ गए थे.



जांच की मांग पर सवालों के जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ समूह द्वारा कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर किए गए अध्ययन का हवाला दिया किंतु इस प्रश्न को टाल दिया कि कोविड-19 के डब्ल्यूआईवी से लीक होने के आरोपों की जांच बीजिंग पर सहमत होगा या नहीं.

इस विशेषज्ञ समूह ने 14 जनवरी से 10 जनवरी के बीच वुहान और डब्ल्यूआईवी का दौरा किया था. झाओ ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के मिशन के विशेषज्ञों ने वुहान के दौरे के दौरान क्षेत्र निरीक्षण किया था और कई आंकड़ों को देखा था जिसके बाद संयुक्त अध्ययन जारी किया था जिसमें कई निष्कर्ष हैं.

मंगलवार को वाशिंगटन से आई मीडिया खबरों में व्हाइट हाउस के कोरोना वायरस सलाहकार एंडी स्लाविट के हवाले से कहा गया है, ‘हमें कोरोना वायरस की उत्पत्ति की तह में जाने की जरूरत है' और डब्ल्यूएचओ तथा चीन को विश्व समुदाय को और निश्चित उत्तर देंने चाहिए.

चीन के सरकारी अखबार ने क्या कहा?

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने 24 मई को खबर दी थी अप्रैल 2012 में छह खनिक एक खदान में जाने के बाद कोरोना वायरस जैसी रहस्यमय बीमारी से बीमार पड़ गए थे. यह खदान दक्षिण पश्चिम चीन के पहाड़ों में स्थित एक गांव के बाहर स्थित है. डब्ल्यूआईवी के शीर्ष शोधार्थियों ने इसकी जांच की थी. डब्लूआईवी के शोधार्थियों का अब दावा है कि यह वायरस पैंगोलिन से अधिक करीब है और इसके 'वुहान लैब से निकलने की संभावना नहीं है.'

सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि नए शोध संकेत देते हैं कि नोवल कोरोना वायरस के डब्ल्यूआईवी से लीक होने की संभावना नहीं है. डब्ल्यूआईवी और चीनी विज्ञान अकादमी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओ ने पिछले शुक्रवार को ‘बायोरेक्सिव‘ पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस कथन का खंडन किया है कि वायरस प्रयोगशाला से निकला है. इनमें शी झेंगली शामिल हैं जिन्हें चमगादड़ों पर शोध के लिए चीन की ‘बैट वूमैन’ कहा जाता है.

वुहान विश्वविद्यालय के विषाणु विज्ञान विशेषज्ञ यांग झानक्यू ने ‘ग्लोबल टाइम्स’ से कहा कि शुक्रवार की रिपोर्ट के आधार पर यह कहना सुरक्षित रहेगा कि चमगादड़ उस कोरोना वायरस के संभावित पूर्वज हैं जिसके कारण 2003 में सार्स और हाल ही में कोविड-19 महामारी हुई है लेकिन कोरोना वायरस के स्वरूप पैंगोलिन में मिले हैं जो मनुष्यों में पाए जाने वाले नोवल कोरोना वायरस से करीब है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि वायरस कैसे चमगादड़ों से पैंगोलिन से होता हुआ मानव को लगा.

कोविड-19 उत्पत्ति जांच का दूसरा चरण ‘पारदर्शी’ हो : अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री

उधर अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री जेवियर बेसेरा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि कोविड​​​​-19 की उत्पत्ति की जांच का अगला चरण अधिक 'पारदर्शी' और 'विज्ञान-आधारित' हो. बेसेरा ने यह अपील यहां मीडिया में इन खबरों के बीच की है जिसमें कहा गया है कि हो सकता है कि वायरस चीन में किसी प्रयोगशाला से उभरा हो.


गत मार्च में विश्व डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर चीन के वैज्ञानिकों के साथ संयुक्त रूप से लिखी गई एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया था कि इसके किसी प्रयोगशाला में शुरू होने की संभावना 'बेहद कम' है. हालांकि डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों के चीन में महामारी के केंद्र वुहान सहित अन्य स्थानों पर अभियान को जिस तरह से संचालित किया गया, उसको लेकर तथा बीजिंग से पर्याप्त सहयोग की कमी को लेकर अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने चिंता जतायी है. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदानोम गेब्रिएसस ने भी इसको लेकर सहमति व्यक्त की है कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आगे और अध्ययन की आवश्यकता है.

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