बॉडी का खून जमा कर हार्ट और ब्रेन पर अटैक करने लगा है कोरोनावायरस

बॉडी का खून जमा कर हार्ट और ब्रेन पर अटैक करने लगा है कोरोनावायरस
न्यूयॉर्क के हॉस्पिटल कोरोना के इलाज में एक खास दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

न्यूयॉर्क (New York) के माउंट सिनाई हॉस्पिटल (Mount Sinai Hospital) के डॉक्टरों ने मरीज़ों के खून में एक अजीब बात देखी कि शरीर में कई भागों में खून के थक्के तो कहीं खून गाढ़ा मिला

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 11:57 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के कहर से दुनिया में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. कोरोना महामारी से दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन वैक्सीन (Vaccine) की अभी दूर दूर तक कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही.  अब कोरोनावायरस ने एक अप्रत्याशित व्यवहार से डॉक्टरों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, कोरनावायरस शरीर का खून जमाने लगा है जिसकी वजह से मरीजों को हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक होने लगा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मरीज़ों के खून में एक अजीब बात देखी. शरीर में कई भागों में खून के थक्के देखे तो कहीं खून गाढ़ा मिला. कोरोना वायरस की वजह से मरीज़ों के शरीर में ब्लड के थक्कों ने डॉक्टरों को हैरानी में डाल दिया. माउंट सिनाई हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजिस्ट ने मरीज़ों की किडनी में खून के जमने के मामले देखे. कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ के शरीर में ये नया दुष्प्रभाव देखने को मिला. गुर्दे का खून जमने से वहां हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

माउंट सिनाई हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर जे मोक्को ने बताया कि किडनी पेशेंट के डायलसिस कैथेटर खून जमने की वजह से ब्लॉक हो गए थे. वहीं वेंटिलेटर पर रहने वाले कोविड 19 मरीजों का मॉनिटर कर रहे पल्मनोलॉजिस्ट ने फेफड़ों में खून की भारी कमी देखी. जबकि न्यूरो सर्जन ने कोविड19 पॉज़िटिव पाए जाने वाले अधिकतर मरीजों के मामले में ब्रेन में ब्लड का थक्का पाया.



डॉ जे मोक्को के मुताबिक कोविड 19 को सांस से जुड़ी बीमारी माना जा रहा है.  लेकिन अब ब्रेन स्ट्रोक के शिकार मरीज़ों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण दिखाई दे रहा है. उन्होंने बताया कि हाल ही में ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हुआ एक युवा कोरोना संक्रमित पाया गया था.इसी तरह 32 मरीज़ों को दिल का दौरा पड़ा जिसमें आधे से ज्यादा कोरोना पॉज़िटिव थे.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये चेतावनी दी है कि कोरोनावायरस लंबे समय तक साथ रह सकता है. साथ ही ये भी कहा कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में संक्रमण दोबारा न होने के कोई सबूत नहीं हैं. ऐसे में कोरोना वायरस के लगातार बदलते असामान्य व्यवहार की वजह से निया में चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. चीन में संक्रमण के एक मामले ने WHO के दावे की पुष्टि भी कर दी जहां वुहान में कोरोना से ठीक हुए मरीज़ को 70 दिन बाद दोबारा संक्रमण हो गया.

कोरोनावायरस की वैक्सीन तैयार करने में जुटे दुनिया के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के सामने कोरोना से जुड़े अलग अलग मामले सामने आ रहे हैं जो कि वैक्सीन की कोशिशों को पेचीदा बनाते जा रहे हैं. चीन में कोरोना मरीज़ों का इलाज करने वाले दो डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो गए थे. उनका इलाज करने के बाद लिवर इस कदर डैमेज हुआ और हार्मोन का संतुलन बिगड़ा कि उनका रंग काला पड़ गया. ऐसे में लगातार बदलते लक्षण और संक्रमण फैलने के तरीकों से कोरोना वायरस का इलाज ढूंढना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
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