पेरिस जलवायु संधि से औपचारिक रूप से अलग हुआ अमेरिका

ट्रंप ने बार-बार इस करार की आलोचना की है और इसे आर्थिक रूप से नुकसानदेह बताया है. फोटो: 
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ट्रंप ने बार-बार इस करार की आलोचना की है और इसे आर्थिक रूप से नुकसानदेह बताया है. फोटो: AP

Paris Climate Change Agreement: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने ग्रीन हाऊस गैस (Green House Gas) के उत्सर्जन में कटौती से संबंधित इस ऐतिहासिक करार से अमेरिका को अलग करने का अपना इरादा 2017 में प्रकट किया था.

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  • Last Updated: November 4, 2020, 10:06 PM IST
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वॉशिंगटन. चुनावी अनिश्चितता के बीच अमेरिका (America) बुधवार को पेरिस जलवायु संधि (Paris Climate Change Agreement, ) से औपचारिक रूप से अलग हो गया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने ग्रीन हाऊस गैस (Green House Gas) के उत्सर्जन में कटौती से संबंधित इस ऐतिहासिक करार से अमेरिका को अलग करने का अपना इरादा 2017 में प्रकट किया था. उन्होंने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को औपचारिक रूप से इस संबंध में अधिसूचित किया था. अमेरिका अनिवार्य एक साल की प्रतीक्षावधि बुधवार को पूरा हो जाने पर इस करार से बाहर आ गया.

इस ऐतिहासिक करार में धरती के बढ़ते तापमान को दो डिग्री के नीचे रखने की व्यवस्था पर बल दिया गया है. यह एक ऐसा आंकड़ा है जिसके संबंध में जलवायु विज्ञानियों का मानना है कि यदि तापमान इससे ऊपर गया तो विनाशकारी परिणाम होंगे. ट्रंप ने बार-बार इस करार की आलोचना की है और इसे आर्थिक रूप से नुकसानदेह बताया है. उनका दावा है कि इससे 2025 तक उनके देश में 25 लाख नौकरियां चली जाएंगी. उन्होंने यह भी कहा कि इससे चीन (China) और भारत जैसे बड़े उत्सर्जकों को बड़ी छूट मिल जाएगी.

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सिर्फ अमेरिका निकला है इस करार से बाहर
अमेरिका इस वैश्विक करार से निकलने वाला एक मात्र देश हैं. वह अब भी इस संबंध में वार्ता कर सकता है और अपनी राय रख सकता है लेकिन अब उसकी स्थिति बस ‘पर्यवेक्षक’ की होगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव के नतीजे को लेकर दुनिया भर में उत्सुकता है और विभिन्न देशों में लोग बेसब्री से चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

लोगों में उत्सुकता बढ़ी
महीनों से दुनिया भर में अनुमान लगाया जा रहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में किसे जीत मिलेगी. मुकाबले के रोमांचक होने के साथ ही लोगों में परिणाम को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने कहा कि व्हाइट हाउस के लिए नजदीकी मुकाबले को देखते हुए हमें थोड़ा धैर्य रखना होगा. बोरेल ने स्पेनिश नेशनल टेलीविजन से कहा, ‘‘अमेरिकी प्रणाली में आखिरी वोट भी मायने रखता है, और आखिरी वोट भी परिणाम को बदल देता है."

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दुनिया भर के नेता आमतौर पर परिणाम को लेकर टिप्पणी करने से परहेज कर रहे हैं. हालांकि नतीजे को लेकर बने संशय से विदेशों में चिंताएं भी पैदा हो रही हैं कि विजेता घोषित होने के बाद अमेरिका में लंबे समय तक आंतरिक संघर्ष बना रह सकता है.

जर्मनी के रक्षा मंत्री ए सी कारेनबाउर ने कहा कि अब परिणाम की वैधता को लेकर लड़ाई शुरू हो गयी है. उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही विस्फोटक स्थिति है... यह अमेरिका में संवैधानिक संकट का कारण बन सकता है. यह निश्चित रूप से हमें चिंतित करेगा."

चुनाव परिणाम में देरी का असर वित्तीय बाजारों में देखा जा रहा है और इससे निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हुई है. कुछ सूचकांकों में वृद्धि हुयी है वहीं कुछ नीचे चले गए हैं.
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